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Wednesday, February 11, 2026

कोविड-19 वैक्‍सीन रोल आउट : 125 जिलों में वैक्‍सीन देने का पूर्वाभ्‍यास

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—लगभग 1,14,100 टीका लगाने वालों को प्रशिक्षण दिया गया
—को-विन सॉफ्टवेयर पर 75 लाख से ज्‍यादा लाभार्थियों ने पंजीकरण कराया
—टीका लगाने से जुड़ी बारीक से बारीक बातों पर गौर किया गया

नई दिल्ली /टीम डिजिटल : कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में भारत द्वारा निरंतर नई ऊंचाइयों को छूने का सिलसिला जारी है। अब जबकि देश कोविड-19 के वैक्‍सीन को रोल-आउट करने के लिए तैयार है, केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय राज्‍यों एवं संघ शासित प्रदेशों और अन्‍य हितधारकों के सहयोग से इस रोल-आउट की तैयारियों में पिछले कुछ महीनों से सक्रियता के साथ सम्मिलित रहा है, ताकि कोविड-19 वैक्‍सीन को रोल-आउट करने संबंधी तैयारियों को सही दिशा में आगे बढ़ाया जा सके। एक व्‍यापक राष्‍ट्रव्‍यापी अभ्यास के तहत आज सभी राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों के 125 जिलों में 286 सत्रों में शुरुआत से अंत तक कोविड-19 वैक्‍सीन देने का पूर्वाभ्‍यास किया गया। प्रत्‍येक जिले ने तीन या ज्‍यादा स्‍थानों पर पूर्वाभ्‍यास किया, जिनमें सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं (जिला अस्‍पताल,मेडिकल कॉलेज), निजी अस्‍पताल और ग्रामीण या शहरी आउटरीच स्‍थान शामिल थे। सभी राज्‍य और जिला अधि‍कारियों को इस पूर्वाभ्‍यास के परिचालन संबंधी दिशानिर्देशों के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। इस पूर्वाभ्‍यास का लक्ष्‍य कोविड-19 टीकाकरण के लिए स्‍वास्‍थ्‍य प्रणाली में निर्धारित प्रणालियों का परीक्षण करना तथा ब्‍लॉक, जिला और राज्‍य स्‍तर पर नियोजन, क्रियान्वयन और रिपोर्टिंग के लिए व्‍यावहारिक वातावरण में को-विन एप्‍लीकेशन के उपयोग की परिचालन संबंधी व्‍यवहार्यता का आकलन करना था। यह पूर्वाभ्‍यास राज्‍य, जिला, ब्‍लॉक और अस्‍पताल स्‍तर के अधिकारियों को कोविड-19 रोल-आउट के सभी पहलुओं से अवगत कराने के लिए भी संचालित किया गया। देश भर के राज्‍यों और संघशासित प्रदेशों ने सुबह 9:00 से पूर्वाभ्‍यास का संचालन निर्बाध रूप से किया। इस एक दिन के अभ्‍यास के अंतर्गत टीकाकरण के वास्‍तविक दिन का अधिकतम अनुकरण या सिमुलेशन करते हुए लाभार्थी के डेटा को अपलोड करने से लेकर सत्र के स्‍थान का आवंटन और सूक्ष्‍म नियोजन, वैक्‍सीन आवंटन, परीक्षण लाभार्थियों के साथ सत्र वाले स्‍थान का प्रबंधन, रिपोर्टिंग व्‍यवस्‍था आदि तक के कार्यकलापों को शामिल किया गया था। सत्र वाले सभी स्‍थानों पर टीकाकरण के बाद की प्रतिकूल घटनाओं (एईएफआई) से निपटने की तैयारी और कॉल सेंटर की कार्यात्‍मकता को भी परखा गया। पूर्वाभ्‍यास का निरीक्षण जिला‍धिकारियों द्वारा किया गया। पूर्वाभ्‍यास का समापन डीब्रीफिंग बैठकों के साथ हुआ, जिनमें दिन भर में सामने आए मसलों और चुनौतियों के बारे में चर्चा की गई थी।

वैक्‍सीन के भंडार, कोविड-19 के लिए लाभार्थियों की व्यक्तिगत ट्रेकिंग

जिला और राज्‍य स्‍तर पर राज्‍यों का फीडबैक लेने के लिए केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने दिन भर उनके साथ निरंतर सम्‍पर्क बनाए रखा। राज्‍यों, संघ शासित प्रदेशों ने पूर्वाभ्‍यास के सफल संचालन पर पूरी तरह संतोष प्रकट किया है, जिसमें परिचालन संबंधी प्रक्रिया और को-विन सॉफ्टवेयर के साथ उसका संबंध शामिल था। को-विन सॉफ्टवेयर केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है, ताकि वैक्‍सीन के भंडार, भंडारण के तापमान और कोविड-19 के लिए लाभार्थियों की व्यक्तिगत ट्रेकिंग के बारे में वास्‍तविक जानकारी ली जा सके। यह सॉफ्टवेयर पूर्व-पंजीकृत लाभार्थियों, उनके प्रमाणन के लिए स्‍वचालित सत्र आवंटन के माध्‍यम से सभी स्‍तरों पर कार्यक्रम प्रबंधकों की सहायता करेगा और वैक्‍सीन शैड्यूल के सफलतापूर्वक संपन्‍न होने के बाद एक डिजिटल प्रमाण पत्र तैयार किया जाएगा।

अब तक को-विन सॉफ्टवेयर पर 75 लाख से ज्‍यादा लाभार्थियों ने पंजीकरण

अब तक को-विन सॉफ्टवेयर पर 75 लाख से ज्‍यादा लाभार्थियों ने पंजीकरण कराया है। कोविड-19 वैक्‍सीन की देश भर में नियंत्रित तापमान वाले वातावरण में अंतिम स्‍तर डिलिवरी हो सके, यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्‍त कोल्‍ड चेन अवसंरचना मौजूद है। कोविड-19 टीकाकरण अभियान शुरु करने के लिए सीरिंज और अन्‍य लॉजिस्टिक्‍स की आपूर्तियां भी पर्याप्‍त मात्रा में सुनिश्चित करायी गई हैं। टीकाकरण स्‍थलों पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के लिए लगभग 1,14,100 टीका लगाने वालों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिसमें लाभार्थी का प्रमाणन, टीकाकरण, कोल्‍ड चेन और लॉजिस्टिक्‍स का प्रबंधन, जैव-चिकित्‍सकीय अपशिष्‍ट प्रबंधन, एईएफआई प्रबंधन तथा को-विन सॉफ्टवेयर पर उसकी जानकारी अपलोड किया जाना शामिल है। आंध्र प्रदेश, असम, पंजाब और गुजरात सहित चार राज्‍यों में 28 और 29 दिसम्‍बर 2020 को समूचे संचालन का नियोजन और आईटी प्‍लेटफॉर्म का व्‍यावहारिक परीक्षण किया गया था; और प्राप्‍त फीडबैक के आधार पर आईटी प्‍लेटफॉर्म पर मामूली वृद्धि की गई है।

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