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Tuesday, February 10, 2026

’25 साल अभी बाकी हैं’: पीएम मोदी ने परीक्षा पे चर्चा में 75वें जन्मदिन का मजेदार किस्सा सुनाया

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Pariksha Pe Charcha 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ कार्यक्रम में छात्रों से बातचीत करते हुए अपने 75वें जन्मदिन का एक मजेदार किस्सा साझा किया। उन्होंने कहा कि “अभी मेरे 25 साल बाकी हैं” और बीते हुए समय को गिनने की बजाय बचे हुए समय पर फोकस करने की सलाह दी। यह कार्यक्रम 6 फरवरी 2026 को आयोजित हुआ, जहां पीएम मोदी ने परीक्षा की तैयारी, सिलेबस पढ़ने के तरीके और जीवन में शिक्षा के महत्व पर छात्रों को मार्गदर्शन दिया।

पीएम मोदी का 75वें जन्मदिन का किस्सा

कार्यक्रम के दौरान मणिपुर की सैनिक स्कूल इंफाल से आई एक छात्रा ने पीएम मोदी की तारीफ की और बताया कि उसका जन्मदिन भी 17 सितंबर को ही पड़ता है, जो प्रधानमंत्री का जन्मदिन है। छात्रा ने कहा कि पीएम मोदी बचपन से उनकी प्रेरणा रहे हैं।

इस पर पीएम मोदी ने हंसते हुए एक किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा, “17 सितंबर को मेरे जन्मदिन पर एक नेता ने फोन किया और कहा कि आपके 75 साल हो गए। मैंने उन्हें जवाब दिया कि 25 अभी बाकी हैं। मैं जो बीत गया है, उसे गिनता नहीं हूं, बल्कि जो बचा हुआ है उसकी गिनती करता हूं।”

यह बात छात्रों को प्रेरित करने के लिए कही गई, ताकि वे बीते हुए समय पर अफसोस करने की बजाय आगे के जीवन को बेहतर बनाने पर ध्यान दें।

परीक्षा की तैयारी पर पीएम मोदी की सलाह

एक छात्रा ने पूछा कि बोर्ड एग्जाम या स्कूल परीक्षा की तैयारी में पिछले सालों के प्रश्न देखकर कुछ टॉपिक छोड़ देते हैं, क्या यह सही है?

पीएम मोदी ने जवाब दिया कि पेपर कभी सिलेबस से बाहर नहीं आता। लेकिन कई बार पेपर भारी लगता है क्योंकि छात्र पिछले 10 साल के पैटर्न पर ही फोकस करते हैं। उन्होंने “श्योर सजेशन्स बुक”, “महत्वपूर्ण प्रश्न बुक” और “10 साल का प्रश्न बैंक” को बीमारी बताया। कुछ शिक्षक भी अच्छे रिजल्ट के चक्कर में पूरी किताब नहीं पढ़ाते, सिर्फ संभावित सवालों पर जोर देते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि अच्छे शिक्षक पूरे सिलेबस को पढ़ाते हैं और उसके महत्व को समझाते हैं। उन्होंने छात्रों को समझाया कि शिक्षा सिर्फ परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन बनाने के लिए है। जैसे खिलाड़ी को पूरे शरीर की मास्टरी चाहिए, वैसे ही शिक्षा से संपूर्ण विकास होता है। परीक्षा खुद को जांचने का माध्यम है, न कि अंतिम लक्ष्य। अंतिम लक्ष्य जीवन का समग्र विकास होना चाहिए।

छात्रों को जीवन का मंत्र

पीएम मोदी ने छात्रों को सलाह दी कि जो बीत गया, उसकी गिनती में समय बर्बाद न करें। बचे हुए समय को जीने और बेहतर बनाने पर सोचें। उन्होंने कहा कि शिक्षा आधे-अधूरे मन से नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे जीवन सफल नहीं बनता।

यह कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ का 9वां संस्करण था, जिसमें लाखों छात्रों ने हिस्सा लिया। पीएम मोदी ने छात्रों के साथ हंसी-मजाक भी किया और उन्हें प्रेरित किया।

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