नई दिल्ली/खुशबू पांडेय। उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में चारधाम यात्रा 2026 से पहले बड़ा बदलाव आया है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने फैसला लिया है कि इन धामों समेत उसके अधीन आने वाले 47-48 मंदिरों में गैर-सनातनियों (सनातन धर्म न मानने वालों) का प्रवेश वर्जित रहेगा। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति सनातन धर्म में अपनी आस्था जताता है और इसके लिए एफिडेविट (शपथ पत्र) देता है, तो उसे दर्शन की अनुमति मिल सकती है।
इस नियम की चर्चा सबसे ज्यादा बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान के नाम पर हो रही है, क्योंकि समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा है कि सारा अली खान जैसी कोई भी हस्ती यदि एफिडेविट देती हैं, तो उन्हें रोका नहीं जाएगा। यह फैसला यात्रा की तैयारियों के बीच लिया गया है, जिससे श्रद्धालुओं की प्रक्रिया में बदलाव आ सकता है।
नया नियम क्या है?
बीकेटीसी की हालिया बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हुआ। बद्रीनाथ, केदारनाथ और अन्य मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म में आस्था रखने वाले सभी लोग, चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो, एफिडेविट भरकर दर्शन कर सकेंगे। मंदिर परिसर में ही यह शपथ पत्र उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे भरने के बाद प्रवेश मिलेगा। सिख, जैन और बौद्ध जैसे समुदायों को सनातन परंपरा का हिस्सा मानकर छूट मिल सकती है, लेकिन अन्य गैर-सनातनियों के लिए यह अनिवार्य होगा।
सारा अली खान का जिक्र क्यों?
सारा अली खान का केदारनाथ से पुराना नाता है। उन्होंने अपनी डेब्यू फिल्म ‘केदारनाथ’ की शूटिंग यहीं की थी और बाद में भी कई बार दर्शन के लिए आई हैं। उनकी पूजा-अर्चना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते हैं। हेमंत द्विवेदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि सारा अली खान केदारनाथ आती हैं और सनातन धर्म में आस्था का एफिडेविट देती हैं, तो उन्हें दर्शन से नहीं रोका जाएगा। यह बयान नियम की व्याख्या के लिए दिया गया, जिससे खबर में हलचल मच गई।
अन्य सेलेब्स का दौरा
केदारनाथ में जैकलीन फर्नांडिस (2023), नुसरत भरुचा (2024) और टीवी अभिनेत्री हिना खान भी दर्शन कर चुकी हैं। नए नियम से ऐसी यात्राओं पर असर पड़ सकता है, लेकिन एफिडेविट से रास्ता खुला रहेगा।
यात्रा पर प्रभाव
चारधाम यात्रा अप्रैल से शुरू होगी। इस नियम से दर्शन प्रक्रिया में समय लग सकता है, लेकिन समिति का उद्देश्य मंदिरों की पवित्रता और परंपराओं की रक्षा करना है। सरकार इस प्रस्ताव का अध्ययन कर रही है। लाखों श्रद्धालु हर साल यहां आते हैं, इसलिए व्यवस्था को सुचारू रखने की तैयारी जोरों पर है।
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