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Wednesday, August 17, 2022

लालू प्रसाद यादव के हनुमान भोला यादव के भोले कारनामे

नई दिल्ली/खुशबू पाण्डेय :  पूर्व रेल मंत्री एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के सहयोगी भोला यादव को रेलवे में जमीन के बदले नौकरी घोटाले के सिलसिले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। लालू प्रसाद जब यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे तब यह कथित घोटाला हुआ था। इसको लेकर सीबीआई ने बुधवार को भोला यादव के चार परिसरों में छापेमारी भी की। इनमें दरभंगा और पटना में दो-दो परिसर शामिल हैं। यादव 2005 और 2009 के बीच तत्कालीन रेल मंत्री प्रसाद के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) थे। इसके अलावा रेलवे कर्मचारी हृदयानंद चौधरी को भी गिरफ्तार किया है, जो घोटाले के कथित लाभार्थी हैं। यादव को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) समर्थकों के बीच लालू प्रसाद के ‘हनुमान या ‘परछाई के रूप में जाना जाता है। सीबीआई ने यादव से घोटाले के संबंध में पूछताछ की। इस घोटाले में नौकरी के आकांक्षी उम्मीदवारों के परिवारों से पटना में एक लाख वर्ग फुट से अधिक भूमि कथित तौर पर रेलवे में ग्रुप-डी की ‘सब्सीट्यूट के तौर पर नौकरी के बदले में लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों के नाम खरीदी गई या उसे हस्तांतरित किया गया। सीबीआई को संदेह है कि यादव ने नौकरियां दिलाने और बाद में प्रसाद क परिवार को जमीन हस्तांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

-लालू यादव के पूर्व OSD गिरफ्तार, सीबीआई ने किया बड़ा खुलासा
– रेलवे में जमीन के बदले नौकरी घोटाले के मास्टर माइंड थे भोला
-भोला यादव के 4 परिसरों में छापेमारी, रेलकर्मी हृदयानंद चौधरी गिरफ्तार

सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि जांच के दौरान, यह पता चला कि पूर्व रेल मंत्री के तत्कालीन ओएसडी ‘सब्सीट्यूट की नियुक्ति में कथित साजिश में शामिल थे। यह भी आरोप है कि आरोपी ‘सब्सीट्यूट के परिवार के सदस्यों से भूमि पूर्व रेल मंत्री के परिवार के सदस्यों के नाम हस्तांतरण से संबंधित मामलों का प्रबंधन कर रहे थे। सीबीआई ने कहा कि यादव ने इस दौरान कुछ संपत्तियां भी खरीदीं। लालू प्रसाद के करीबी सहयोगी माने जाने वाले भोला यादव ने चुनावी राजनीति में कदम रखा था और 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद के टिकट पर दरभंगा की बहादुरपुर सीट पर जीत दर्ज की थी। उन्होंने 2020 में सीट को उसी जिले के हयाघाट से बदलने का फैसला किया, हालांकि वह चुनाव हार गए। सीबीआई ने 18 मई को लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव के अलावा मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर के रेलवे जोन में नौकरी लेने वाले 12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि पटना में करीब 1.05 लाख वर्ग फुट जमीन लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों ने विक्रेताओं को नकद भुगतान करके हासिल की थी। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है, उपरोक्त सात भूखंडों का वर्तमान मूल्य, जिसमें उपहार विलेख के माध्यम से प्राप्त भूमि भी शामिल है, मौजूदा सर्कल रेट के अनुसार लगभग 4.39 करोड़ रुपये है। पूछताछ में पता चला है कि जमीन के भूखंड को मौजूदा सर्किल दरों से कम दरों पर खरीदा गया था और इसे लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों द्वारा सीधे विक्रेताओं से खरीदा गया था। इसने कहा कि जाली दस्तावेजों के आधार पर बिना किसी विज्ञापन या सार्वजनिक नोटिस जारी किए रेलवे में लोगों की नियुक्ति की गई। सीबीआई ने 20 मई को पटना में लालू प्रसाद के आवास और अन्य स्थानों पर भी छापेमारी की थी। हालांकि राजद ने छापेमारी के बाद आरोप लगाया था, हम दोहराते हैं कि सीबीआई का ताजा मामला और इसके सिलसिले में देश भर में की गई छापेमारी केंद्र में शासन करने वाली भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रायोजित है।

लालू परिवार की 40 से ज्यादा संपत्ति में भोला बने गवाह

लालू परिवार की 40 से ज्यादा संपत्ति की खरीद-फरोख्त में भोला यादव ने गवाह के रूप में हस्ताक्षर किया है। लालू के साथ साए के रूप में रहने वाले भोला यादव लालू परिवार के हर भ्रष्टाचार में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल रहे हैं। कांति सिंह, रघुनाथ झा द्वारा तेजस्वी, तेजप्रताप को गिफ्ट में दिया मकान हो या लालू परिवार की अधिकांश जमीन के दस्तावेजों में भोला यादव ने गवाह के रूप में हस्ताक्षर किया है। रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले मामले में रेलवे के कोचिंग कंपलेक्स स्टोर, राजेंद्र नगर में खलासी का काम करने वाले हृदयानंद चौधरी ने पटना शहर की 70 लाख 7.6 डिसमिल जमीन लालू प्रसाद की 5वीं बेटी हेमा यादव को दान कर दिया। आखिर एक रेलवे खलासी के पास पटना शहर में 70 लाख की जमीन कहां से आई? फिर उसने लालू परिवार को दान क्यों कर दिया?
विष्णु देव राय के पोते पिंटू कुमार को 2008 में पश्चिम रेलवे मुंबई में नौकरी लगी। श्री विष्णु देव राय ने पटना की जमीन हृदयानंद चौधरी को दे दिया और हृदयानंद चौधरी ने कुछ वर्षों बाद वह जमीन हेमा यादव को दान में दे दिया।

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