नई दिल्ली। भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी रानी वेलु नचियार की जयंती पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। दोनों नेताओं ने उनके साहस, नेतृत्व और औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्ष की सराहना की। रानी वेलु नचियार का जन्म 3 जनवरी 1730 को तमिलनाडु के रामनाथपुरम में हुआ था। वे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ युद्ध लड़ने वाली पहली भारतीय रानी थीं और तमिलनाडु में उन्हें वीरमंगई के नाम से याद किया जाता है। उनकी बहादुरी की कहानी आज भी लोगों को प्रेरित करती है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की श्रद्धांजलि
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रानी वेलु नचियार को याद करते हुए लिखा कि वे महिलाओं की ताकत और नेतृत्व की अमर प्रतीक हैं। उन्होंने कहा, “भारत की शुरुआती महिला स्वतंत्रता सेनानियों में से एक वीरमंगई रानी वेलु नचियार की जयंती पर मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”
उन्होंने आगे बताया कि रानी एक बहादुर शासक और दूरदर्शी नेता थीं, जिन्होंने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ डटकर मुकाबला किया। उनके साहस, रणनीतिक समझ और नेतृत्व ने सबको प्रभावित किया। उनकी विरासत आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है, खासकर महिलाओं को साहस, गरिमा और देशभक्ति सिखाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रानी वेलु नचियार की जयंती पर उन्हें याद किया। उन्होंने लिखा कि वे भारत की शुरुआती बहादुर योद्धाओं में से एक हैं, जिन्होंने अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल दिखाया। रानी ने औपनिवेशिक दमन के खिलाफ आवाज उठाई और भारतीयों के आत्मनिर्भर शासन के अधिकार पर जोर दिया।
मोदी ने उनकी अच्छे शासन और सांस्कृतिक गर्व की प्रतिबद्धता की तारीफ की। उन्होंने कहा कि रानी का त्याग और दूरदर्शी नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। इससे पहले मन की बात कार्यक्रम में भी मोदी ने रानी वेलु नचियार का जिक्र किया था और तमिलनाडु के लोगों द्वारा उन्हें वीरमंगई कहे जाने की बात कही थी।
रानी वेलु नचियार कौन थीं?
रानी वेलु नचियार का जन्म 3 जनवरी 1730 को तमिलनाडु के रामनाथपुरम राजवंश में हुआ था। वे राजा चेल्लामुथु विजयरघुनाथ सेथुपति और रानी सकंधिमुथथल की इकलौती संतान थीं। चूंकि कोई पुत्र नहीं था, इसलिए उन्हें राजकुमार की तरह पाला गया। बचपन से ही उन्होंने हथियार चलाना, मार्शल आर्ट जैसे सिलंबम और वलारी, घुड़सवारी और तीरंदाजी सीखी। वे कई भाषाओं जैसे अंग्रेजी, फ्रेंच और उर्दू में निपुण थीं।
पति की हत्या और संघर्ष की शुरुआत
रानी की शादी शिवगंगा के राजा मुथु वडुगनाथ थेवर से हुई थी। दोनों की एक बेटी भी थी। साल 1772 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और आर्कोट के नवाब की सेनाओं ने हमला किया। इस हमले में राजा की हत्या हो गई और शिवगंगा का किला कब्जा लिया गया। रानी अपनी बेटी के साथ बच निकलीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
जंगल के दिन और हैदर अली से गठबंधन
किले खोने के बाद रानी ने कई साल जंगल में बिताए। उन्होंने हैदर अली से संपर्क किया और मैसूर की सेना से मदद मांगी। हैदर अली ने सहायता दी। रानी ने अपनी सेना तैयार की और गोपाला नायकर जैसे सहयोगियों के साथ मिलकर योजना बनाई। उनकी सेनापति कुइली ने ब्रिटिश गोला-बारूद भंडार पर आत्मघाती हमला किया, जिससे बड़ा नुकसान हुआ।
ब्रिटिशों पर जीत और शासन
साल 1780 में रानी वेलु नचियार ने ब्रिटिशों को हराकर शिवगंगा का किला वापस हासिल कर लिया। वे करीब एक दशक तक शासक रहीं। उन्होंने मरुडु ब्रदर्स को प्रशासन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी। रानी ने अच्छा शासन चलाया और सांस्कृतिक गर्व को बनाए रखा। साल 1796 में उनका निधन हो गया। उनकी बेटी वेल्लाची ने उत्तराधिकार संभाला।
रानी वेलु नचियार की कहानी बताती है कि भारत में स्वतंत्रता की लड़ाई बहुत पहले शुरू हो गई थी। वे महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जिन्होंने मुश्किल हालात में भी हिम्मत नहीं हारी। उनकी जयंती पर दी गई श्रद्धांजलि उनकी विरासत को जीवंत रखती है। आज भी तमिलनाडु और पूरे देश में उनकी बहादुरी की चर्चा होती है।
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