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Monday, October 18, 2021
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दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी की वरिष्ठ उपाध्यक्ष रंजीत कौर का निर्वाचन रद्द

–सरदार इंद्रमोहन सिंह की याचिका पर अदालत ने सुनाया फैसला
–बाल रंगने एवं गैर अमृतधारी होने को लेकर किया था चैलेंज
–2017 के गुरुद्वारा चुनाव में रंजीत कौर कोआप्शन से बनी थी सदस्य

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल : दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीबी रंजीत कौर के निर्वाचन को आज दिल्ली की एक अदालत ने रद्द कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता इंद्रमोहन सिंह को इलेक्टेड घोषित किया है। कमेटी के 2017 के चुनाव में कोआप्शन के जरिये रंजीत कौर कमेटी सदस्य निर्वाचित हुई थी।
दरअसल, कोआप्शन की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में शिरोमणि अकाली दल की तरफ से रंजीत कौर और सर्वजीत सिंह विर्क को उम्मीदवार बनाया गया था। 9 मार्च 2017 को इनके नामांकन को विरोधी उम्मीदवार शिरोमणि अकाली दल दिल्ली इंद्रमोहन सिंह ने चुनौती दी थी। चुनौती देने का मुख्य कारण दोनों के बाल रंगे होना एवं गैर अमृतधारी होना बताया गया था। साथ ही कमेटी एक्ट के अनुसार कमेटी के कर्मचारी के चुनाव लडऩे पर लगी हुई रोक का हवाला देते हुए इंद्रमोहन सिंह ने रंजीत कौर के गुरु हरिकिशन पब्लिक स्कूल में अध्यापक होने का उस समय के निर्वाचन अधिकारी तथा दिल्ली गुरुद्वारा निदेशालय के डायरेक्टर शूरवीर सिंह को चुनौती दी थी। तब रंजीत कौर ने दावा किया था कि दिल्ली कमेटी की कर्मचारी नहीं है बल्कि वह गुरु हरिकिशन पब्लिक स्कूल की कर्मचाी है। साथ ही उन्होंने दावा किया था कि बचपन में अमृत छका था, जिसका वैध प्रमाण उनके पास नहीं है। लेकिन, दूसरे सदस्य विर्क ने उस समय निर्वाचन अधिकारी के सामने अपने अमृत छकने का प्रमाण पत्र सौंप दिया था। जिस वजह से निर्वाचन अधिकारी ने इंद्रमोहन सिंह की आपत्तियों केा खारिज करके दोनों के नामांकन को वैध घोषित कर दिया था। इंद्रमोहन सिंह ने इसको तीस हजारी जिला अदालत में चुनौती दी थी। अदालत में दाखिल याचिका में इंद्रमोहन सिंह ने दोनों के 11 मार्च 2017 दोनों के निर्वाचन को चुनौती दी थी। लगभग 4 साल तक चले केस में आज कोर्ट ने रंजीत कौर की सदस्यता खारिज कर दिया है। ऐसा दावा इंद्रमेाहन सिंह के वकील कुलविंदर सिंह के द्वारा किया गया है। हालांकि कोर्ट के विस्तृत आदेश आना अभी बाकी है। इससे पहले रंजीत कौर ने लगभग 4 महीने पहले गुरुद्वारा बंगला साहिब से अमृत छककर उसका प्रमाणपतं अदालत में लगाया था। जिस वजह से इंद्रमोहन सिंह यह साबित करने में सफल हुए हैं कि निर्वाचन के वक्त रंजीत कौर अमृतधारी नहीं थी।

रंजीत कौर 2017 में कमेटी सदस्य, 2019 में कमेटी की वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुनी गईं

बता दें कि रंजीत कौर 2017 में कमेटी सदस्य बनने के बाद 2019 में कमेटी की वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुनी गईं। इससे पहले उपाध्यक्ष कुलवंत सिंह बाठ अपना इस्तीफा देकर कमेटी छोड़ चुके हैं। अब वरिष्ठ उपाध्यक्ष का निर्वाचन खारिज होने के बाद कमेटी के लिए दुविधा की स्थिति खड़ी हो गई है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इंद्रमोहन सिंह को कोआप्टेड सदस्य के तौर पर स्वीकार किया है या नहीं यह स्पष्ट नहीं है। बता दें कि रंजीत कौर वर्तमान में अकाली दल की महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष भी हैं।

एक औरत को कमजोर करने के लिए हुई बड़ी सौदेबाज़ी : रंजीत कौर

दिल्ली कमेटी की वरिष्ठ उपाध्यक्ष रंजीत कौर ने दावा किया है कि अदालत आदेश की प्रति आने के बाद वह दिल्ली हाईकोर्ट में उसे चुनौती देंगी। उन्होंने कहा कि एक औरत को कमजोर करने के लिए बड़ी सौदेबाज़ी हुई है। यह केस रंजीत कौर नहीं, बल्कि शिरोमणि अकाली दल की हार हुई है। उन्हें हराने के लिए अकाली दल के अपने ही सिपहसालार शामिल थे जिन्हें औरत की चढ़त बर्दाशत नहीं थी। उन्होंने कहा कि हम अकाली दल को मजबूत बनाने के लिए दिन रात मरते रहे और हमारी ही पार्टी के अध्यक्ष एवं कमेटी के अध्यक्ष हमें खत्म करने के लिए पर्दे के पीछे रणनीति बनाते रहे। हम ऐसे कायरों से डरने वाले नहीं हैं और हम ऊपर वाले के मेहर से अपने मिशन में लगे रहेंगे।

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