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Friday, October 22, 2021
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DSGMC : स्कूल की बसों में बनाया रैन बसेरा, प्रदर्शनकारी किसानों को सौंपा

–गुरुद्वारा कमेटी ने स्कूल की 25 बसों में बनाया मोबाइल रैन बसेरा
–बारिश और ठंड से बचाने के लिए गुरुद्वारा कमेटी की अनोखी पहल

नई दिल्ली /टीम डिजिटल : दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने दिल्ली के बार्डरों पर संघर्ष कर रहे किसानों के लिए लंगर, टैंट, गीजर और अन्य सहूलतें उपलब्ध करने के बाद अब किसानों के लिए मोबाइल रैन बसेरे बना कर पेश कर दिए हैं। चलते फिरते यह रैन बसेरे जरूरत मुताबिक कहीं भी ले जाए जा सकते हैं। यह रैन बसेरे आज शाम को कमेटी के प्रधान सरदार मनजिन्दर सिंह सिरसा और महासचिव सरदार हरमीत सिंह कालका की तरफ से किसानों के हवाले किए गए। बता दें कि गुरुद्वारा कमेटी ने स्कूल एवं कालेज की बसों को रैन बसेरे में तब्दील किया है। इन्हीं बसों को धरना स्थल पर पहुंचा दिया है। पहले चरण में 25 बसों की सीटें हटाकर उसमें गद्दा बिछाकर मोबाइल रैन बसेरा बना दिया है। मोबाइल रैन बसेरे बना कर दिए हैं जो जरूरत अनुसार कहीं भी ले जाए जा सकते हैं। इन बसों में कंबल, चदरें, गद्दे और अन्य समान मुहैया करवाया गया है, जिससे किसानों को कड़ाके की ठंड के हालातों से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि किसान पिछले 41 दिन से दिल्ली के बार्डरों पर बैठे हैं, इनके टैंट और अन्य रैन बसेरे भारी बारिश, धुंध और कड़ाके की ठंड के चलते प्रभावित हुए हैं।

किसानों को पेश मुश्किलों को देखते गुरुद्वारा कमेटी ने फैसला किया कि मोबाइल रैन बसेरे बनाऐ जाएं। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत पहले कुंडली बार्डरों पर यह मोबाइल रैन बसेरे उपलब्ध करवाए हैं और बाद में ज़रूरत अनुसार यह सिंघू और अन्य बार्डरों पर भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। सिरसा ने बताया कि पहले पड़ाव में हम 25 ऐसे मोबाइल रैन बसेरे तैयार किए हैं, किसानों की जरूरत अनुसार जितनी भी जरूरत पड़ी, हम यह रैन बसेरे उपलब्ध करावांगे। उन्होंने यह भी बताया कि महिलाएं और पुरुषों के लिए अलग-अलग रैन बसेरे तैयार किये गए हैं। यह मोबाइल रैन बसेरे सिर्फ सुरक्षित ही नहीं हैं, बल्कि किसानों को कड़ाके की ठंड के इस खराब मौसम की मार से भी बचाएंगे।
इस मौके कालका ने बताया कि दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी का अकेला मंतव्य मानवता ख़ास तौर पर देश के अन्नदाता की सेवा करना है। हम इस होंद की लड़ाई में किसानों के डट कर के साथ ठहरे हैं और केंद्र सरकार को भी अपील करते हैं कि वह किसानों की मांगें मान लें और तीन विवादग्रस्त खेती कानून तुरंत रद्द करे।

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