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Thursday, February 5, 2026

DSGMC चुनाव : सरना का आरोप, गुरुद्वारा कमेटी में लोकतंत्र की हत्या, विपक्ष को कुचला

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नयी दिल्ली/अदिति सिंह : दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के आंतरिक चुनाव में शनिवार को व्यापक स्तर पर हुए पुलिस व प्रशासन के हस्तक्षेप तथा श्री गुरु ग्रंथ साहिब की मर्यादा को चोट लगने के मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है। संयुक्त विपक्ष ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। साथ ही आरोप लगाया है कि अकाली दल बादल एवं भाजपा ने मिलकर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में लोकतंत्र का चीरहरण किया है। शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने आरोप लगाया कि अकाली दल बादल ने गुरु साहिब की मौजूदगी में चिटठी लिखकर गुरु घर में पुलिस बुलाई जबकि इतिहास में आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ। सरना ने कहा कि सत्तापक्ष ने पुलिस की बंदूक की नोक पर विपक्ष का गला घोंट दिया और हाउस से संपूर्ण विपक्ष को बाहर निकाल दिया। यह सरासर अन्याय । सरना ने कहा कि जब पुलिस विपक्ष को बाहर निकाल रही थी तब अकाली दल के नेता दिल्ली पुलिस जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे।आखिरकार आधी रात को वही हुआ, जिसे अकाली दल एंव भाजपा के तथाकथित नेता चाह रहे थे।

—अकाली—भाजपा ने मिलकर पुलिस के बल पर किया खेला :विपक्ष
—आधी रात को विपक्ष को हाउस से निकालकर सत्तापक्ष को सौंप दी कमेटी
—इतिहास में पहली बार अकाली दल ने चिटठी लिखकर पुलिस बुलाई
—सरकारी बंदूक की नोक पर विपक्ष की आवाज दबाई : सरना
—हम गुप्त वोटिंग करवाना चाहते थे, अकाली हाथ उठवाकर : सरना
—दिल्ली कमेटी चुनाव पर विरोधियों ने उठाए गंभीर सवाल

विपक्ष को बाहर निकालकर रिजल्ट घोषित कर दिया।परमजीत सिंह सरना ने सवाल किया कि यदि इनके पास 29 वोट थे तो कालड़ा का वोट रद्द करने से इन्हें डर क्यों लग रहा था ? परमजीत सिंह सरना ने कहा कि हमारे पास सदस्य ज्यादा थे, कुछ सामने थे, कुछ पीछे थे। इसलिए कालड़ा के अवैध वोट को रद्द करने की बात पर इनका अड़ना यह साबित करता है कि इन्होंने हार पहले ही मान ली थी।
दिल्ली कमेटी के पूर्व अध्यक्ष हरविंदर सिंह सरना ने दावा किया कि भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में हमारे चुने हुए सदस्यों को खींच कर बाहर किया गया। 30 कमेटी सदस्यों के हस्ताक्षरों पर दिल्ली पुलिस को बुलाया गया और गुरु ग्रंथ साहिब जी की हुजूरी में पुलिस बुलाने की इस करतूत के पीछे शिरोमणी कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी भी शामिल है। यह कमेटी पर पुलिस के सहारे कब्जा करने की सुनियोजित साजिश थी। इसलिए जत्थेदारों की अनुपस्थिति को भी सुनिश्चित किया गया था, क्योंकि जत्थेदारों की उपस्थिति में नाजायज तरीके से कब्जा करना संभव नहीं था। इसलिए हम श्री अकाल तख्त साहिब पर इस मामले पर शिकायत लेकर जाएंगे।

अध्यक्ष पद के उम्मीदवार को वोट डालने से रोका : मंजीत ​जीके

जागो पार्टी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके जीके ने कहा कि यह पहली बार हुआ है कि अध्यक्ष पद के उम्मीदवार को वोट डालने से पहले पुलिस उठा कर ले गई हों। परमजीत सिंह सरना हमारे उम्मीदवार थे,पर पुलिस ने हम सभी को अवैध ‌हिरासत में लेकर वोट डालने से वंचित कर दिया। जब सुखबीर सिंह कालड़ा के वोट पर गतिरोध हुआ तो डायरेक्टर नरिंदर सिंह को तुरंत मीटिंग स्थगित करनी चाहिए थी। 2017 में भी अस्थाई सभापति के चुनाव पर विवाद के चलते पूर्व डायरेक्टर शूरवीर सिंह ने मीटिंग स्थगित की थी।‌ इन्होंने बिना गुरु ग्रंथ साहिब जी की मौजूदगी में पदाधिकारियों का चुनाव करके यह साबित कर दिया है कि इन्हें गुरु साहिब का आशीर्वाद प्राप्त नहीं है।

श्री दरबार साहिब में पुलिस भेजने की याद ताजा कर दी : मारवाह

केन्द्रीय सिंह सभा के अध्यक्ष तरविंदर सिंह मारवाह ने दावा किया कि पुलिस को गुरु ग्रंथ साहिब जी की हुजूरी में जाने का आदेश कोई पुलिस अधिकारी तो दूर सुप्रीम कोर्ट भी नहीं देंगी। लेकिन बेशर्मों की तरह दिल्ली कमेटी सदस्यों ने हस्ताक्षर करके जैसे पुलिस बुलाई हैं, इन्होंने ‌श्री दरबार साहिब में पुलिस भेजने की याद ताजा कर दी है। क्योंकि पुलिस के पास ऐसे गुरु दरबार में बिना सिर झुकाए, बिना मात्था टेके दखलअंदाजी करने की कोई मंजूरी नहीं है। इस मौके पर बड़ी संख्या में कमेटी सदस्य मौजूद थे।

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