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भारतीय रेलवे का मेगा प्लान:100 नई रेल परियोजनाएं स्वीकृत, देश के अंतिम छोर तक पहुंचेगी ट्रेन, जानें डिटेल्स

भारतीय रेलवे देश के हर कोने को जोड़ने का काम तेजी से कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में रेल मंत्रालय ने 100 परियोजनाओं को हरी झंडी दी है। इनमें कुल 1.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और 6,000 किलोमीटर से ज्यादा रेल लाइनें बिछाई या अपग्रेड की जाएंगी।

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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में 100 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें 1.53 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इन परियोजनाओं से देशभर में 6,000 किलोमीटर से अधिक रेल नेटवर्क का विस्तार होगा। यह काम पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत हो रहा है, जिसमें नई लाइनें, दोहरीकरण और मल्टी-ट्रैकिंग शामिल हैं।

इससे दूरदराज के इलाकों तक कनेक्टिविटी बढ़ेगी, यात्रा का समय कम होगा और माल ढुलाई सुधरेगी। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में परियोजनाओं में 56 प्रतिशत, रूट कवरेज में 114 प्रतिशत से अधिक और निवेश में 110 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। यह विस्तार पूरे देश को जोड़ने और समावेशी विकास में मदद करेगा।

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भारतीय रेलवे का बड़ा विस्तार प्लान: 6000 किमी नई लाइनें मंजूर

भारतीय रेलवे देश के हर कोने को जोड़ने का काम तेजी से कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में रेल मंत्रालय ने 100 परियोजनाओं को हरी झंडी दी है। इनमें कुल 1.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और 6,000 किलोमीटर से ज्यादा रेल लाइनें बिछाई या अपग्रेड की जाएंगी। यह फैसला पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत लिया गया है, जो देश में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर जोर देता है।

पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में 64 परियोजनाओं को मंजूरी मिली थी, जिनकी लागत 72,869 करोड़ रुपये थी और लंबाई 2,800 किलोमीटर से अधिक थी। इस बार परियोजना स्वीकृतियों में 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। रूट कवरेज में 114 प्रतिशत से ज्यादा उछाल आया है, जबकि वित्तीय निवेश में 110 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

परियोजनाओं का स्वरूप और उद्देश्य

इन 100 परियोजनाओं में नई रेल लाइनें, दोहरीकरण, मल्टी-ट्रैकिंग, बाईपास लाइनें, फ्लाईओवर और कॉर्ड लाइनें शामिल हैं। मुख्य लक्ष्य है भीड़भाड़ वाले रूटों पर दबाव कम करना, ट्रेनों की समयबद्धता बढ़ाना और यात्रियों का अनुभव बेहतर बनाना। साथ ही उन इलाकों तक पहुंच बनाना जहां अभी रेल सुविधा सीमित है।

ये काम पूरे भारत में फैले हैं, ताकि विकास संतुलित रहे। विशेष ध्यान उन राज्यों पर है जहां जनसंख्या ज्यादा है और आर्थिक गतिविधियां तेज हैं। इससे यात्री सेवाएं और माल ढुलाई दोनों सुधरेंगी।

प्रमुख राज्यों में फोकस: महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश

महाराष्ट्र में 17 परियोजनाएं, बिहार में 11, झारखंड में 10 और मध्य प्रदेश में 9 परियोजनाएं मंजूर हुई हैं। ये राज्य माल ढुलाई गलियारों, औद्योगिक कनेक्टिविटी और यात्री आवागमन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

इन परियोजनाओं से इन राज्यों में माल गलियारे मजबूत होंगे, फैक्टरियों से जुड़ाव बढ़ेगा और लोगों की यात्रा आसान होगी। ये क्षेत्र देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की रीढ़ माने जाते हैं, इसलिए यहां बेहतर कनेक्टिविटी से पूरे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचेगा।

दूरदराज और वंचित क्षेत्रों में कनेक्टिविटी

परियोजनाओं का एक बड़ा हिस्सा जनजातीय और दूर-दराज के इलाकों पर केंद्रित है। उदाहरण के लिए, छत्तीसगढ़ में रावघाट-जगदलपुर लाइन जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। झारखंड और ओडिशा में भी कई गलियारे बनाए जाएंगे।

इनसे स्थानीय लोगों को बाजार, अस्पताल, स्कूल और नौकरियों तक आसानी से पहुंच मिलेगी। इससे वंचित आबादी को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में लाने में मदद मिलेगी। रेलवे का यह प्रयास समावेशी विकास को बढ़ावा दे रहा है।

प्रमुख परियोजनाएं और उनका निवेश

कई बड़ी परियोजनाएं हाई डेंसिटी नेटवर्क को मजबूत करेंगी। इनमें शामिल हैं:

  • कसारा-मनमाड तीसरी और चौथी लाइन (131 किमी) – लगभग 10,150 करोड़ रुपये
  • खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा पांचवीं और छठी लाइन (278 किमी) – 8,740 करोड़ रुपये से अधिक
  • इटारसी-नागपुर चौथी लाइन (297 किमी) – 5,450 करोड़ रुपये से अधिक
  • सिकंदराबाद (सनतनगर)-वाडी तीसरी और चौथी लाइन (173 किमी) – 5,000 करोड़ रुपये से अधिक

ये चार परियोजनाएं ही करीब 28,000 करोड़ रुपये की हैं। इनका फोकस ट्रंक रूटों पर भीड़ कम करने और क्षमता बढ़ाने पर है। कुल मिलाकर 35 से ज्यादा परियोजनाएं 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली हैं।

मिशन 3000 मीट्रिक टन और आर्थिक प्रभाव

ये परियोजनाएं ‘मिशन 3000 मीट्रिक टन’ के अनुरूप हैं, जिसका लक्ष्य माल ढुलाई क्षमता को काफी बढ़ाना है। ऊर्जा कॉरिडोर पर विशेष ध्यान है, ताकि कोयला और खनिजों की आवाजाही तेज हो और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बने।

रेल सागर कॉरिडोर से बंदरगाहों से जुड़ाव बेहतर होगा, जिससे तटीय व्यापार बढ़ेगा। कुल मिलाकर, नेटवर्क की दक्षता बढ़ेगी और लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी।

इस बड़े निवेश से स्टील और सीमेंट जैसे उद्योगों में मांग बढ़ेगी। निर्माण कार्यों से बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होगा। यात्रा समय कम होने और सेवाओं में सुधार से यात्री सुविधा बढ़ेगी।

राष्ट्रीय एकीकरण और भविष्य की तैयारी

भारतीय रेलवे इन परियोजनाओं के जरिए पूरे देश को एक सूत्र में पिरो रही है। अंतिम छोर तक पहुंच बनाकर सबसे गरीब और वंचित इलाकों की सेवा की जा रही है। यह काम केवल बुनियादी ढांचा बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन लाने में भी योगदान देगा।

जैसे-जैसे ये परियोजनाएं पूरी होंगी, रेलवे की क्षमता बढ़ेगी, सेवा बेहतर होगी और देश की आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी। यह विस्तार भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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