नई दिल्ली/खुशबू पांडेय। वरिष्ठ रेल अधिकारी राजेश कुमार पांडे ने उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक का पदभार संभाला। भारतीय रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग सेवा (IRSSE) के 1989 बैच के अधिकारी श्री पांडे ने 18 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के मूल निवासी श्री पांडे रेलवे बोर्ड में अपर सदस्य (सिग्नल) के पद से इस जिम्मेदारी पर आए हैं। वे सुरक्षा, बुनियादी ढांचा और यात्री सुविधाओं को मजबूत करने लिए जाने जाते हैं।
शैक्षणिक योग्यता और करियर की शुरुआत
श्री राजेश कुमार पांडे ने गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स में बी.ई. किया और उसके बाद आईआईटी दिल्ली से एम.टेक की डिग्री हासिल की। उन्होंने अपना रेलवे करियर बरौनी में सहायक सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर के रूप में शुरू किया था। उसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।
मुख्य पद और योगदान
श्री पांडे ने रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) में निरीक्षण निदेशक के तौर पर गुणवत्ता आश्वासन में सुधार किए। पूर्व मध्य रेलवे में समस्तीपुर मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक और पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल में मंडल रेल प्रबंधक (DRM) रहे। पश्चिम रेलवे में उन्होंने मुंबई उपनगरीय सेक्शन में ‘एक्सल काउंटर’ लगवाने का नेतृत्व किया, जिससे मानसून में ट्रेन सेवाएं बेहतर चलीं।
DRM के दौरान उन्होंने ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई। वे स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा सिस्टम ‘कवच’ के विकास और लागू करने में भी प्रमुख रहे। हाल ही में रेलवे बोर्ड में अपर सदस्य (सिग्नल) के रूप में उन्होंने 400 किलोमीटर रेल खंड पर ‘कवच’ की सफल स्थापना की निगरानी की, जिससे रेल सुरक्षा में बड़ा सुधार हुआ।
उत्तर रेलवे के लिए विजन
नए महाप्रबंधक ने उत्तर रेलवे को आधुनिक बनाने और यात्री अनुभव बेहतर करने के लिए साफ लक्ष्य तय किए हैं। इनमें सबसे ऊपर सुरक्षा को रखा गया है – परिचालन में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करना। समयपालन यानी ट्रेनों की पंचुअलिटी सुनिश्चित करना, बुनियादी ढांचे का तेज विकास लेकिन गुणवत्ता पर पूरा ध्यान देना, और ग्राहक अनुभव के साथ-साथ कर्मचारियों के कल्याण को बढ़ावा देना। उनका मार्गदर्शक सिद्धांत है – “राष्ट्र प्रथम, ग्राहक प्रथम, सर्वथा प्रथम”।
श्री पांडे का यह नियुक्ति भारतीय रेलवे में 1989 बैच के कई अधिकारियों के महाप्रबंधक बनने की कड़ी में आता है, जो रेलवे में नई पीढ़ी के नेतृत्व का संकेत है। उत्तर रेलवे देश की राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े शहरों को जोड़ता है, इसलिए इस जोन का बेहतर प्रबंधन यात्रियों और माल ढुलाई के लिए बहुत अहम है।
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