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Wednesday, January 26, 2022
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स्कूली बच्चों ने बताया, हैप्पीनेस करिकुलम से बदली छात्रों की ज़िंदगी

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-हैप्पीनेस करिकुलम की तीसरी सालगिरह पर बच्चों ने मनीष सिसोदिया से साझा किया अनुभव
—माइंडफुलनेस और अन्य हैप्पीनेस एक्टिविटीज़ ने बच्चों को तनावमुक्त कर खुश रहना सिखाया

Indradev shukla

नई दिल्ली /मोक्षिता:दिल्ली के सरकारी स्कूल अपनी गुणवत्ता को लेकर आज देश भर में मिसाल बनकर उभरे हैं। स्कूलों में बच्चों को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने के लिए दिल्ली सरकार की ओर से हैप्पीनेस करिकुलम की शुरुआत की गई। शुक्रवार को हैप्पीनेस करिकुलम की तीसरे वर्षगांठ पर ‘हैप्पीनेस उत्सव 2021’ आयोजित किया गया। उत्सव में स्कूली बच्चों ने अपने जीवन में हैप्पीनेस क्लास से हुए सकारात्मक बदलावों को साझा किया। इस चर्चा में उनके टीचर्स और पेरेंट्स नें भी भाग लिया। वीकेएसएसवी, कालका जी स्कूल की कक्षा 7वीं की छात्रा स्पर्श अग्रवाल ने हैप्पीनेस क्लास को लेकर हुए अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि हैप्पीनेस क्लास से उन्होंने सीखा की कभी भी मुश्किलों से हार कर कोशिश करना नहीं छोड़ना चाहिए।

Indradev shukla

स्पर्श की माँ ने बताया कि जबसे हैप्पीनेस की क्लास शुरू हुई है वो और स्पर्श आपस में बहुत ज़्यादा नजदीक आ चुके है और साथ मिलकर माइंडफुलनेस की एक्टिविटी करते है जिससे अब उन्हें तनाव नहीं होता है। SCSDSV, रोहिणी सेक्टर-9 में क्लास 7वीं में पढ़ने वाले छात्र रक्षित ने हैप्पीनेस क्लास से अपने जीवन में आए बदलावों को बताते है कहा कि वे मोबाइल गेम्स खेलने के आदि हो चुके थे जिससें उनकी आँखों में दर्द रहने लगा साथ ही वो बहुत ज़्यादा चिड़चिड़े हो गए लेकिन माइंडफुलनेस के अभ्यास और हैप्पीनेस की बाकी गतिविधियों के अभ्यास से अब वो तनावमुक्त रहने लगे है और उनका पढ़ाई में भी मन लगने लगा है। बच्चन प्रसाद एसकेवी, देवली में कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली गुरमीत का कहना है कि वे लॉकडाउन के पहले से ही हैप्पीनेस की क्लास में सीखे हुए एक्टिविटीज़ का अभ्यास अपने घर के बाकी सदस्यों को भी करवाती है जिससें घर में कोरोना के मुश्किल समय में भी खुशी का माहौल बना रहा। गुरमीत की माँ ने बताया कि गुरमीत पहले काफी डरी सहमी रहती थी लेकिन हैप्पीनेस क्लास लेने के बाद से अब गुरमीत में काफी आत्मविश्वास आया है। गुरमीत के स्कूल की प्रधानाचार्या का कहना है कि उनके स्कूल में हैप्पीनेस क्लास शुरू होने के बाद से बच्चे रेगुलर हो गए व उनमें स्वानुशासन भी आया। सर्वोदय को-एड स्कूल, मोठ मस्जिद में कक्षा 7 में पढ़ने वाले जय सैनी ने बताया कि उन्हें सामाजिक अध्यन्न पढ़ना अच्छा नहीं लगता था लेकिन हैप्पीनेस क्लासों में पढ़ाई जाने वाली कहानियों से प्रेरणा लेकर जय ने सामाजिक अध्यन्न के हर चैप्टर को खुद की कहानी में ढाल कर पढ़ना शुरू कर दिया। और सामाजिक अध्यन्न में बेहतर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। SDSV सेक्टर-9 रोहिणी में कक्षा 9 में पढ़ने वाली प्राची ने बताया कि उन्हें पहले बहुत ज़्यादा गुस्सा आया करता था लेकिन हैप्पीनेस की क्लास और माइंडफुलनेस से उन्होंने अपने गुस्से पर काबू करने पा लिया है।

बच्चे हैप्पीनेस को अपने जीवन में पूरी तरह अपना लेंगे

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि ये बहुत खुशी की बात है कि हैप्पीनेस से लोगों की ज़िंदगी में बदलाव आया है। हैप्पीनेस की क्लास से जब केवल 2-3 साल में बच्चों में इतना बदलाव आया है। तो आने वाले 10 सालों में बच्चे हैप्पीनेस को अपने जीवन में पूरी तरह अपना लेंगे और ये उनकी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी परंपरा रही है मन पर काम करने की। हैप्पीनेस करिकुलम के माध्यम से बच्चे हमारी ध्यान की परंपरा वापिस कम्युनिटी तक लेकर आए है। लाखों बच्चों ने कोरोना के दौरान हैप्पीनेस क्लास में सीखे गए माइंडफुलनेस और अन्य गतिविधियों का अपने घर-परिवार में अभिभावकों और भाई-बहनों के साथ अभ्यास किया है। जिसमें लोगों को इतनी मुश्किल के दौरान भी खुश रहना और तनावमुक्त रहना सिखाया है। हैप्पीनेस उत्सव के दूसरे भाग में उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोशल- इमोशनल लर्निंग पर अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोर्ट्स के पैनल के साथ लाइव इंटरेक्शन किया। इसमें इंटरफेथ फोरम एजुकेशन वर्किंग ग्रुप की को-चेयर डॉ.शेर्तों गिल, जीनीयस अकैडमी नेपाल के सीईओ कमल सिलवाल, चिल्ड्रन फर्स्ट संस्था के को फाउंडर डॉक्टर अमित सेन शामिल थे।

शिक्षा पूरी तरह से टेस्टिंग और कॉस्ट-बेनिफिट पर आधारित हो चुकी

इंटरफेथ फोरम एजुकेशन वर्किंग ग्रुप की को-चेयर डॉ.शेर्तों गिल ने कहा कि आज शिक्षा पूरी तरह से टेस्टिंग और कॉस्ट-बेनिफिट पर आधारित हो चुकी है। हम बच्चों को स्किल्स दे रहे है ताकि वो बेहतर जॉब कर सके। लेकिन हम असल में शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य से दूर जा रहे है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य लोगों को वेल-बीइंग सीखना,आत्म-विश्लेषण करना, खुश रहना है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में शिक्षा को लेकर एक ऐसा इको-सिस्टम स्थापित किया जा रहा है जो शिक्षा के वास्तविक उद्देश्यों को पूरा कर रहा है। जीनीयस अकैडमी नेपाल के सीईओ कमल सिलवाल ने कहा कि आज के शिक्षा प्रणाली में आत्म-विश्लेषण को शामिल करना बहुत महत्वपूर्ण है। पहले स्वयं को समझना ज़्यादा महत्वपूर्ण है उसके बाद ही हम दूसरों को समझ सकते है।

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