दिल्ली में जनकपुरी इलाके में खुले गड्ढे में गिरकर एक युवक की मौत हो गई है। मृतक की पहचान कमल के रूप में हुई है, जो कैलाशपुरी का निवासी था। वह रोहिणी से अपने दफ्तर से बाइक पर घर लौट रहा था, लेकिन रात में लापता हो गया। परिजनों ने पूरी रात कई थानों में चक्कर लगाए, लेकिन गुमशुदगी की शिकायत तुरंत दर्ज नहीं हुई। सुबह पुलिस की सूचना पर गड्ढे में उसका शव बाइक के साथ मिला।
परिवार दिल्ली जल बोर्ड की लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहा है, जबकि पुलिस ने कहा है कि रात भर मदद की गई और जांच चल रही है। यह घटना नोएडा में हाल ही हुई युवराज की मौत से मिलती-जुलती है, जिससे सड़क सुरक्षा और विभागीय समन्वय पर सवाल उठ रहे हैं।
दिल्ली में मौत का गड्ढा: कमल की दर्दनाक कहानी
दिल्ली के पश्चिमी हिस्से में जनकपुरी इलाके में एक ऐसा हादसा हुआ है, जिसने परिवार को सदमा पहुंचा दिया है। 25 वर्षीय कमल, जो कैलाशपुरी, पालम इलाके का रहने वाला था, सोमवार देर रात रोहिणी से घर लौट रहा था। वह एक बैंक के कॉल सेंटर में काम करता था और पिछले तीन साल से रोज इसी रूट से आता-जाता था।
तय समय पर घर नहीं पहुंचा कमल
कमल की आखिरी बातचीत रात करीब 11 बजकर 53 मिनट पर हुई थी। उसने परिवार को बताया कि वह डिस्ट्रिक्ट सेंटर पहुंच चुका है और 15 मिनट में घर पहुंच जाएगा। लेकिन समय बीतता गया, फोन नहीं उठा और कमल घर नहीं पहुंचा। परिवार चिंतित हो गया और तलाश शुरू कर दी। उन्होंने खुद रास्तों, चौराहों और आसपास के इलाकों में ढूंढा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
रात भर थानों के चक्कर लगाते रहे परिजन
परिजनों ने रात में ही जनकपुरी थाने पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज कराने की कोशिश की। उनका आरोप है कि पुलिस ने कहा कि 24 घंटे पूरे होने पर ही शिकायत दर्ज होती है। उन्होंने मोबाइल लोकेशन ट्रैक करने का आग्रह किया। पुलिस ने लोकेशन निकाली और बताया कि फोन 200 मीटर के दायरे में एक पार्क के पास है। दो पुलिसकर्मी मौके पर भेजे गए, लेकिन कुछ नहीं मिला।
परिजनों का कहना है कि इसके बाद पुलिस ने रात में सर्च नहीं करने की बात कही और सुबह आने को कहा। उन्होंने जनकपुरी, सागरपुर, विकासपुरी, रोहिणी सेक्टर-10, डाबड़ी समेत कई थानों में गुहार लगाई, लेकिन औपचारिक शिकायत कहीं दर्ज नहीं हुई। एक थाने में उन्हें कहा गया कि ऐसे मामले रोज होते हैं और सिर्फ जानकारी व्हाट्सएप ग्रुप में डाली गई।
सुबह मिली पुलिस की कॉल, सामने आया सच
सुबह करीब 7:30 बजे परिवार को पुलिस का फोन आया। मौके पर पहुंचने पर कमल अपनी बाइक के साथ एक गहरे खुले गड्ढे में मिला। गड्ढा दिल्ली जल बोर्ड के काम से जुड़ा था। रात के अंधेरे में बाइक सवार होने के कारण गड्ढा नजर नहीं आया और हादसा हो गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि वहां रोशनी नहीं थी, न चेतावनी बोर्ड था और न ही बैरिकेडिंग।
परिवार का आरोप: जल बोर्ड की लापरवाही जिम्मेदार
परिजन कहते हैं कि अगर गड्ढा ठीक से सुरक्षित होता तो यह हादसा नहीं होता। उन्होंने सवाल उठाया कि काम किस विभाग का था और बिना समन्वय के सड़क क्यों खोदी गई। कुछ परिजनों ने आशंका जताई कि यह दुर्घटना नहीं, बल्कि हत्या भी हो सकती है, लेकिन पुलिस ने कहा कि सभी पहलुओं की जांच हो रही है।
पुलिस का पक्ष: रात भर परिवार के साथ थे
दिल्ली पुलिस ने कहा कि परिजनों के संपर्क में आने पर तुरंत कार्रवाई की गई। रात 12:30 बजे विकासपुरी थाने में जानकारी मिली, फोटो ली गई और एक्सीडेंट कॉल्स चेक किए गए। जनकपुरी थाने में सब-इंस्पेक्टर ने मोबाइल टावर लोकेशन निकाली। दो घंटे तक सर्च चली। व्हाट्सएप ग्रुप्स पर जानकारी शेयर की गई। सुबह 8:03 बजे स्थानीय व्यक्ति की PCR कॉल पर टीम तीन मिनट में मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड बुलाई गई और 8:30 बजे शव निकाला गया। पुलिस ने कहा कि जांच में सभी तथ्यों की पड़ताल हो रही है।
नोएडा घटना से समानता, सवाल बने हुए
यह मामला नोएडा में युवराज की मौत से मिलता-जुलता है, जहां भी खुले गड्ढे ने जान ली थी। दोनों घटनाओं ने सड़क पर सुरक्षा इंतजामों की कमी को उजागर किया है। दिल्ली में सड़कों पर ऐसे गड्ढे आम हैं, लेकिन विभागों की लापरवाही से जानें जा रही हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग
परिजन विभागीय लापरवाही पर सख्त कार्रवाई चाहते हैं। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है। यह घटना दिल्ली में सड़क सुरक्षा और पुलिस की त्वरित कार्रवाई पर बहस छेड़ रही है।

