नई दिल्ली/खुशबू पांडेय। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में 18 मार्च 2026 को सुबह एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने एक पूरे परिवार को तबाह कर दिया। इस हादसे में राजेंद्र कश्यप के परिवार के 9 सदस्यों की मौत हो गई, जिसमें तीन बच्चियां भी शामिल हैं।
आग की लपटों में फंसे लोगों में से कुछ ने ऊपरी मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जान बचाई, लेकिन मां-बेटी समेत कई लोग जिंदा जल गए। हादसे के बाद फायर ब्रिगेड के हाइड्रोलिक लैडर सिस्टम और रेस्क्यू में देरी पर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक दलों के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।
हादसे का पूरा विवरण
पालम के साध नगर, राम चौक मार्केट के पास स्थित चार मंजिला इमारत में आग सुबह करीब 7 बजे लगी। इमारत के निचले मंजिलों पर कपड़े और कॉस्मेटिक्स का शोरूम था, जबकि ऊपरी मंजिलों पर राजेंद्र कश्यप और उनका परिवार रहता था। आग की वजह शॉर्ट सर्किट या वॉटर मोटर से जुड़ी बताई जा रही है, लेकिन जांच जारी है। आग तेजी से फैली क्योंकि इमारत में प्लास्टिक, कॉस्मेटिक सामान और सीढ़ियों पर सामान रखा हुआ था, जिससे धुआं और लपटें ऊपर पहुंच गईं।
परिवार के मुखिया राजेंद्र कश्यप (70) उस समय गोवा में काम के सिलसिले में बाहर थे। वे हादसे के बाद लौटे और सदमे में भर गए।
मां-बेटी की दर्दनाक कहानी
70 वर्षीय लाडो कश्यप दूसरी मंजिल पर अपनी बेटी हिमांशी (22) के साथ थीं। लाडो बुजुर्ग होने के कारण तेजी से नहीं चल पा रही थीं। हिमांशी ने मां को बचाने के लिए उनका साथ नहीं छोड़ा। दोनों बाथरूम में शरण लेने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी तेज फैल गई कि दोनों की जली हुई लाशें एक साथ मिलीं। हिमांशी की पहचान उनकी अंगूठी से हुई। पड़ोसियों और रिश्तेदारों के अनुसार, हिमांशी ने आखिरी समय तक मां के साथ रहकर उन्हें बचाने की कोशिश की। यह दृश्य बेहद हृदयविदारक है।

मृतकों की सूची
मरने वालों में शामिल हैं:
- लाडो कश्यप (70 वर्ष, परिवार की बुजुर्ग महिला)
- हिमांशी कश्यप (22 वर्ष, बेटी)
- कमल कश्यप (39 वर्ष, बेटा)
- आशु कश्यप (35 वर्ष, कमल की पत्नी)
- निहारिका (15 वर्ष), इवानी (6 वर्ष) और जैसिका (3 वर्ष) – कमल की तीन बेटियां
- प्रवेश कश्यप (33 वर्ष, बेटा)
- दीपिका कश्यप (28 वर्ष, प्रवेश की पत्नी)
ये मौतें जिंदा जलने और धुएं से दम घुटने से हुईं। तीन पीढ़ियों के लोग इस हादसे में शामिल थे।
बचाव प्रयास और छलांग
कुछ परिवारजन तीसरी मंजिल पर मदद की गुहार लगा रहे थे। अनिल और सचिन नाम के दो भाइयों ने छलांग लगाई। अनिल ने अपनी छोटी बेटी को नीचे फेंका और खुद कूदा। दोनों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। एक बच्ची को फ्रैक्चर हुआ है। अन्य सदस्य भी घायल हैं।
फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन शुरुआती हाइड्रोलिक लैडर छोटी पड़ गई। एक फायरमैन ने बताया कि धुआं इतना ज्यादा था कि ऊपर वाले लोग दिखाई नहीं दे रहे थे। दूसरे लैडर को बुलाने में समय लगा।

जांच और राजनीतिक विवाद
हादसे के बाद न्यायिक जांच शुरू हो गई है। हाइड्रोलिक लैडर न खुलने, रेस्क्यू में देरी और इमारत में सुरक्षा मानकों की कमी पर सवाल हैं। फायर ब्रिगेड पर लापरवाही के आरोप लगे हैं।
राजनीतिक रूप से आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) आमने-सामने आ गए। AAP नेताओं ने सिस्टम की नाकामी बताई, जबकि BJP ने जवाबी आरोप लगाए। पीड़ित परिवार के सामने AAP नेता सौरभ भारद्वाज और BJP विधायक कुलदीप सोलंकी के बीच बहस और धक्कामुक्की हुई। अरविंद केजरीवाल भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे।
सबक और सावधानियां
यह हादसा इमारतों में फायर सेफ्टी, इमरजेंसी एग्जिट और दमकल सुविधाओं की कमी को उजागर करता है। दिल्ली में ऐसे हादसे पहले भी हो चुके हैं, लेकिन सुधार की गति धीमी है। लोगों को घर में प्लास्टिक और ज्वलनशील सामान कम रखने, फायर अलार्म लगाने और इमरजेंसी प्लान बनाने की सलाह दी जाती है।
यह घटना न केवल एक परिवार की जिंदगी छीन ले गई, बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर रही है कि ऐसी त्रासदियों को कैसे रोका जा सकता है।
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