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Wednesday, March 11, 2026

‘मम्मी आखिरी बार देख लो…’, फरीदाबाद की 23 साल की पायलट दीपिका अधाना ने UAE से 169 भारतीयों को बचाया

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फरीदाबाद/खुशबू पाण्डेय। हरियाणा के फरीदाबाद की 23 वर्षीय पायलट दीपिका अधाना ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण रेस्क्यू मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। एअर इंडिया एक्सप्रेस की एक विशेष फ्लाइट में उन्होंने पूरी तरह महिला क्रू के साथ UAE के रास अल खैमाह एयरपोर्ट से 169 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित दिल्ली लाकर उतारा।

इस दौरान दीपिका ने परिवार से कहा, “मम्मी-चाचू आखिरी बार देख लो, शायद फिर न दिखूं”, लेकिन परिवार ने उनका हौसला बढ़ाया। यह मिशन 6 मार्च को अचानक मिले आदेश पर हुआ, जहां पूरी क्रू महिलाओं की थी और कुछ समय के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूटने जैसी चुनौती भी आई, लेकिन सब सुरक्षित रहा। दीपिका की यह बहादुरी कम उम्र में ही साहस और जिम्मेदारी की मिसाल बन गई है।

जंग जैसे हालात में अचानक मिला रेस्क्यू मिशन का आदेश

दीपिका अधाना ने बताया कि 6 मार्च की सुबह करीब 10:15 बजे उन्हें UAE जाने का अचानक आदेश मिला। मूल रूप से इस फ्लाइट में उनकी एक सहयोगी पायलट जाने वाली थीं, लेकिन उड़ान से महज दो घंटे पहले उन्हें सूचना दी गई कि अब वे इस रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा बनेंगी। बिना देर किए उन्होंने अपनी टीम के साथ तैयारी की और मिशन पर निकल पड़ीं।

यह फ्लाइट एअर इंडिया एक्सप्रेस की थी, जिसमें कुल छह सदस्य पूरी तरह महिलाएं थीं। इनमें कैप्टन जसविंदर कौर, पायलट दीपिका अधाना और चार महिला केबिन क्रू मेंबर शामिल थीं। युद्ध जैसी स्थिति के कारण सबके मन में थोड़ी घबराहट थी, लेकिन अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सुरक्षा के सभी इंतजाम पूरे हैं। इसी भरोसे पर टीम ने सामान्य उड़ान की तरह ही काम किया।

'मम्मी आखिरी बार देख लो...', फरीदाबाद की 23 साल की पायलट दीपिका अधाना ने UAE से 169 भारतीयों को बचाया
‘मम्मी आखिरी बार देख लो…’, फरीदाबाद की 23 साल की पायलट दीपिका अधाना ने UAE से 169 भारतीयों को बचाया

UAE के रास अल खैमाह एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग और यात्रियों को बोर्डिंग

फ्लाइट भारत से उड़ान भरकर दोपहर करीब 2 बजे रास अल खैमाह एयरपोर्ट पर पहुंची। दीपिका ने बताया कि एयरपोर्ट पर लोग सामान्य दिनों से कम थे, लेकिन कोई अफरा-तफरी नहीं दिखी। पहले से ही रेस्क्यू के लिए तैयारियां की गई थीं। करीब एक घंटे में 169 भारतीय यात्रियों को विमान में सवार किया गया।

इसके बाद दोपहर साढ़े तीन बजे के आसपास फ्लाइट दिल्ली के लिए रवाना हुई। वापसी के दौरान एक पल ऐसा आया जब एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क कुछ समय के लिए टूट गया, जिससे चिंता हुई। लेकिन जल्द ही नेटवर्क ठीक हो गया और फ्लाइट बिना किसी समस्या के अपनी यात्रा जारी रख सकी।

दिल्ली पहुंचकर यात्रियों की राहत और धन्यवाद

विमान जब दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुआ, तो यात्रियों के चेहरों पर राहत साफ नजर आ रही थी। कई यात्रियों ने उतरते समय क्रू मेंबर्स को धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी वजह से वे सुरक्षित घर लौट सके। यह मिशन न सिर्फ एक सफल ऑपरेशन था, बल्कि कठिन परिस्थितियों में महिलाओं की क्षमता को भी दिखाता है।

दीपिका अधाना का परिवार और बचपन का सफर

दीपिका अधाना फरीदाबाद के तिगांव क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनके पिता योगेश अधाना आर्किटेक्ट हैं, जबकि मां बबली अधाना गृहिणी हैं। उनका बड़ा भाई मुंबई में बैंकिंग सेक्टर में नौकरी करता है। दीपिका ने बताया कि उनके स्वर्गीय दादा अमृत सिंह अधाना की इच्छा थी कि वे पायलट बनें। दादा के इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने यह रास्ता चुना। परिवार ने हर कदम पर उनका साथ दिया।

उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई बल्लभगढ़ के सेक्टर 3 स्थित टैगोर स्कूल से की। 2020 में 12वीं पास करने के बाद दिल्ली में कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) की तैयारी शुरू की। कोरोना महामारी के कारण एक साल घर से पढ़ाई करनी पड़ी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2021 में CPL मिल गया।

'मम्मी आखिरी बार देख लो...', फरीदाबाद की 23 साल की पायलट दीपिका अधाना ने UAE से 169 भारतीयों को बचाया
‘मम्मी आखिरी बार देख लो…’, फरीदाबाद की 23 साल की पायलट दीपिका अधाना ने UAE से 169 भारतीयों को बचाया

ट्रेनिंग और एअर इंडिया एक्सप्रेस में शामिल होना

2022 में दीपिका मध्य प्रदेश के रीवा स्थित फाल्कन एविएशन एकेडमी गईं, जहां उन्होंने करीब 200 घंटे की उड़ान पूरी की। 2023 में टाइप रेटिंग के लिए ग्रीस और इस्तांबुल गईं, जहां एयरबस A320 की ट्रेनिंग ली। टाइप रेटिंग बड़े जेट विमानों के लिए जरूरी होती है, क्योंकि CPL छोटे विमानों पर होती है, लेकिन एयरलाइंस में बड़े विमान उड़ाने के लिए यह जरूरी है।

सितंबर 2023 में एअर इंडिया एक्सप्रेस के रिटेन और इंटरव्यू पास किए। अप्रैल 2024 में जॉइनिंग मिली। आज वे इसी एयरलाइंस में पायलट के तौर पर काम कर रही हैं।

यह रेस्क्यू मिशन उनके करियर का एक बड़ा पड़ाव साबित हुआ। कम उम्र में उन्होंने साबित किया कि दृढ़ इच्छाशक्ति से बड़ी जिम्मेदारियां निभाई जा सकती हैं। इस घटना ने न सिर्फ उन्हें प्रेरणा स्रोत बनाया, बल्कि देश के लिए महिलाओं की भूमिका को मजबूत किया।

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