फरीदाबाद, 31 जनवरी। हरियाणा के फरीदाबाद में 39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला आज से शुरू हो गया है। इस मेले का उद्घाटन भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने किया। यह मेला 31 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक चलेगा। मेले की थीम है ‘लोकल टू ग्लोबल – आत्मनिर्भर भारत की पहचान’। यह थीम स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का मजबूत संदेश देती है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूरजकुंड शिल्प मेला भारत की आत्मा है। यह कारीगरों के सम्मान का बड़ा प्रतीक बन चुका है। यह मेला ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूती देता है। स्थानीय शिल्प, कला और कारीगरों को दुनिया के सामने लाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन को यह मेला जमीन पर उतार रहा है। हर कारीगर को सम्मान और बाजार दोनों मिलें, यही इसका मकसद है।
उद्घाटन समारोह में मौजूद बड़े गणमान्य व्यक्ति
उद्घाटन के मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर, हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री श्री विपुल गोयल, विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री श्री राजेश नगर, खेल राज्य मंत्री श्री गौराव गौतम और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री मोहन लाल कौशिक भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने उपराष्ट्रपति का खास तौर पर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस मेले में आने से देश-विदेश के शिल्पकारों को नई प्रेरणा मिलती है। यह भारत में ही नहीं, पूरे विश्व में अपनी खास पहचान रखता है।

50 से ज्यादा देशों की भागीदारी, 700 से अधिक विदेशी मेहमान
इस बार मेले में 50 से अधिक देशों के 700 से ज्यादा विदेशी प्रतिनिधि और डेलीगेट्स हिस्सा ले रहे हैं। पार्टनर नेशन के रूप में मिस्र (इजिप्ट) की खास भागीदारी है। यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करेगा। सहयोगी राज्य उत्तर प्रदेश और मेघालय हैं। इनकी वजह से मेले में विविधता और भी बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री ने विदेशी मेहमानों का हरियाणा की धरती पर दिल से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड मेला प्राचीनता और आधुनिकता का खूबसूरत संगम है। पिछले 38 सालों से यह भारतीय लोक कला और संस्कृति को जिंदा रख रहा है। आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ पैसे की आजादी नहीं है। इसमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना, विरासत को संभालना और दुनिया के सामने गर्व से पेश करना भी शामिल है। यहां मिट्टी के बर्तन से लेकर हाथ से बुने कपड़े तक, हर चीज में भारत की आत्मा बसती है। मेले के असली हीरो हमारे शिल्पकार हैं।
‘अतुल्य भारत’ की झलक दिखाई दे रही है मेले में
इस बार देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से शिल्पकार आए हैं। पूर्वोत्तर की बांस की कारीगरी, दक्षिण की सिल्क साड़ियां, पश्चिम की रंग-बिरंगी कढ़ाई और उत्तर की लकड़ी की नक्काशी – सब कुछ यहां देखने को मिल रहा है। पूरा ‘अतुल्य भारत’ सूरजकुंड में समा गया है। मिस्र की भागीदारी से यह मेला सचमुच अंतरराष्ट्रीय बन गया है। सांस्कृतिक आदान-प्रदान से देशों के बीच की दूरी कम होती है और दिल जुड़ते हैं।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। पर्यटन रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत है। सूरजकुंड मेला इसका जीता-जागता सबूत है। अगले 15 दिनों में लाखों पर्यटक यहां आएंगे। इससे शिल्पकारों को बाजार मिलेगा। साथ ही टैक्सी चालक, होटल वाले, छोटे दुकानदारों को भी कमाई होगी। जब कोई पर्यटक यहां से कोई चीज खरीदता है, तो वह सिर्फ सामान नहीं लेता, बल्कि एक कारीगर की मेहनत का सम्मान करता है। ‘वोकल फॉर लोकल’ का मंत्र इसी तरह साकार होता है।

सरकार की कई योजनाएं शिल्पकारों के लिए
राज्य सरकार शिल्पकला को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। जिला स्तर पर सरस मेले लगाए जाते हैं। दीपावली मेले का भी आयोजन होता है। कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव और सरस्वती महोत्सव के दौरान भी भव्य सरस मेले होते हैं। माटी कला को बढ़ावा देने के लिए ‘माटी कला बोर्ड’ बनाया गया है। श्री विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय में परंपरागत शिल्पों की ट्रेनिंग दी जाती है।
आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह
मुख्यमंत्री ने शिल्पकारों से कहा कि वे अपनी कला को और बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करें। आज ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से दूर बैठा शिल्पकार भी दुनिया भर में सामान बेच सकता है। डिजाइनिंग में भी नई तकनीक मदद कर सकती है। सभ्यताएं मिलने-जुलने और सहयोग से ही मजबूत होती हैं। इसलिए दूसरे देशों की भागीदारी बहुत जरूरी है। उम्मीद है कि मेला और बड़ा होगा और ज्यादा देश जुड़ेंगे।
विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा का बयान
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि यह मेले की नई ऊंचाइयां छू रहा है। 1987 से शुरू हुआ यह मेला आज भारतीय सांस्कृतिक विरासत की मजबूत पहचान है। ‘लोकल टू ग्लोबल’ विजन को साकार कर रहा है। पिछले साल 44 देशों ने हिस्सा लिया था, इस बार 50 से ज्यादा। मिस्र की भागीदारी सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करेगी। शिल्पकारों को कला दिखाने के साथ ज्यादा कमाई और अंतरराष्ट्रीय नाम मिलेगा। हरियाणा में राखीगढ़ी जैसी 7000 साल पुरानी सभ्यता है, जो प्रदेश की पहचान बढ़ाती है।
उद्घाटन में विधायकगण, वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे। यह मेला कला, संस्कृति और आत्मनिर्भरता का अनोखा उत्सव है। हर कोई यहां आकर भारत की विविधता और सुंदरता का आनंद ले सकता है।
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