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9 साल दर्द झेलने के बाद बाल विवाह की बेड़ियों से आजाद हुई खुशबू, सारथी ट्रस्ट की डॉ कृति भारती ने बनाया अनूठा रिकॉर्ड 

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जोधपुर/खुशबू पांडेय। 12 साल की उम्र में बाल विवाह की शिकार हुई जोधपुर की 21 वर्षीय खुशबू को सारथी ट्रस्ट की डॉ. कृति भारती की मदद से न्याय मिला है। पारिवारिक न्यायालय ने उनके बाल विवाह को निरस्त कर दिया, जिससे खुशबू को 9 साल बाद आजादी मिली। यह डॉ. कृति भारती द्वारा निरस्त किया गया 54वां बाल विवाह मामला है, जो बाल विवाह के खिलाफ उनकी लंबी मुहिम का हिस्सा है।

बाल विवाह की कुरीति से मिली मुक्ति

जोधपुर जिले के एक ग्रामीण इलाके में वर्ष 2016 में समाज के दबाव में महज 12 साल की उम्र में खुशबू का बाल विवाह कर दिया गया था। उस समय वह नाबालिग थी। कुछ साल बाद ससुराल पक्ष ने गौना करवाने का दबाव बनाया, जिससे खुशबू गहरे अवसाद में चली गई।

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इस दौरान उसे सारथी ट्रस्ट की मुहिम की जानकारी हुई। ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी और पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ. कृति भारती ने खुशबू को कानूनी सहायता और मानसिक समर्थन दिया। लगभग डेढ़ साल पहले खुशबू ने डॉ. कृति की मदद से जोधपुर के पारिवारिक न्यायालय संख्या-2 में बाल विवाह निरस्त करने की याचिका दायर की।

कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

पारिवारिक न्यायालय में डॉ. कृति भारती ने खुशबू की ओर से पैरवी की। उन्होंने खुशबू की उम्र के दस्तावेज और अन्य सबूत पेश किए। तथाकथित पति पक्ष ने दावा किया कि विवाह बालिग अवस्था में हुआ था, लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। न्यायाधीश वरुण तलवार ने खुशबू के बाल विवाह को तुरंत निरस्त कर दिया।

9 साल दर्द झेलने के बाद बाल विवाह की बेड़ियों से आजाद हुई खुशबू, सारथी ट्रस्ट की डॉ कृति भारती ने बनाया अनूठा रिकॉर्ड 
9 साल दर्द झेलने के बाद बाल विवाह की बेड़ियों से आजाद हुई खुशबू, सारथी ट्रस्ट की डॉ कृति भारती ने बनाया अनूठा रिकॉर्ड

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बाल विवाह एक गंभीर अपराध है, जो बच्चों के वर्तमान और भविष्य को अंधकारमय बना देता है। न्यायाधीश ने समाज से इस कुरीति को खत्म करने की अपील की और डॉ. कृति की मुहिम की सराहना की। फैसले के बाद खुशबू और उसके परिवार के चेहरे पर राहत और खुशी के आंसू छलक पड़े।

डॉ. कृति भारती की साहसिक मुहिम

डॉ. कृति भारती ने देश में पहला बाल विवाह निरस्त करवाने का रिकॉर्ड बनाया था। अब तक उन्होंने 54 बाल विवाह निरस्त कराए हैं और 2200 से अधिक बाल विवाह रोकने में सफल रही हैं। उनकी यह पहल एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है।

सीबीएसई ने उनकी मुहिम को कक्षा 11 के पाठ्यक्रम में शामिल किया है। डॉ. कृति को मारवाड़-मेवाड़ रत्न, टेफ्ड मैगजीन की वर्ल्ड टॉप टेन एक्टिविस्ट सूची और बीबीसी की 100 प्रभावशाली महिलाओं की सूची सहित कई सम्मान मिल चुके हैं। सारथी ट्रस्ट बाल विवाह रोकथाम, बच्चों और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करता है।

खुशबू और डॉ. कृति के शब्द

खुशबू ने कहा, “मैंने कभी बाल विवाह को स्वीकार नहीं किया। डॉ. कृति दीदी की मदद से हिम्मत जुटाई और आज मैं आजाद हूं। अब मैं अपने सपनों के साथ आगे बढ़ूंगी और अपना भविष्य संवारूंगी।”

डॉ. कृति भारती ने कहा, “खुशबू की यह जीत सिर्फ उसकी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए संदेश है। हर बच्ची को उसके अधिकार मिलने चाहिए। हम अब खुशबू के बेहतर पुनर्वास के लिए प्रयास कर रहे हैं।”

यह मामला बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है। समाज में जागरूकता फैलाने और कानूनी कार्रवाई से ऐसी कुरीतियों को रोकना संभव है।

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