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Wednesday, February 11, 2026

अस्सी घाट पर गंगा संस्कृति यात्रा में कलाकारों ने दर्शकों का दिल जीता

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वाराणसी/टीम डिजिटल:उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज ( North Central Zone Cultural Centre, Prayagraj ) की ओर से वाराणसी के अस्सी घाट पर आयोजित दो दिवसीय ‘गंगा संस्कृति यात्रा’ का भव्य समापन हुआ। दो दिनों में कुल 106 कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया। सांस्कृतिक रंगों से सजी इस यात्रा ने दर्शकों को आध्यात्मिक और पारंपरिक विरासत की भावपूर्ण अनुभूति कराई।
कार्यक्रम का शुभारम्भ कैंट विधायक वाराणसी कैंट सौरभ श्रीवास्तव, निदेशक एनसीजेडसीसी आशिस गिरि, प्रभारी कार्यक्रम एनसीजेडसीसी एम.एम. मणि एवं मुख्य विकास अधिकारी वाराणसी हिमांशु नागपाल (आईएएस) ने दीप प्रज्वलन करके किया। कार्यक्रम की प्रस्तुतियों में प्रथम प्रस्तुति युवा संगीत नाटक अकादमी अवॉर्डी भोजपुरी की सुप्रसिद्ध गायिका चंदन तिवारी ने दिया। उन्होंने मारकंडे दास, भिखारी ठाकुर सहित विद्यापति की लिखी मां गंगा की रचनाओं के साथ श्रोताओं को भोजपुरी गीतों की यात्रा कराई। उन्होंने देशभक्ति गीत भी गाए। ईशान के सूफी भजनों ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया तो वहीं राहुल बनर्जी के दल ने ओडिसी नृत्य और गौरी कला मंडप समूह ने उत्तर प्रदेश के लोकनृत्य की प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया। वहीं दूसरे दिन समापन दिवस पर कार्यक्रम की शुरुआत स्मृति शाही एवं उनके दल द्वारा प्रस्तुत गंगा अवतरण पर आधारित कथक नृत्य नाटिका से हुई।

-दो दिनों में 106 कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया 

इसके बाद प्रियंवदा तिवारी एवं उनके दल ने पारंपरिक लोक नृत्य की जीवंत छटा बिखेरी, जिसे दर्शकों ने तालियों की गूंज से सराहा। वहीं लोकप्रिय गायिका सुचिता पांडेय ने “लगन तुमसे लगा बैठे”, “सांवरी सूरत पे मोहन”, “मेरे सर पर रख दो बाबा” जैसे भक्तिमय भजनों से वातावरण को भाव विभोर कर दिया। श्रुति सिंह चौहान ने सूफी भजनों तो अनुराधा सिंह ने अपने मधुर गीतों के साथ कार्यक्रम को सुंदर विराम दिया।

दोनों दिनों का मंच संचालन कवि एवं लेखक शरद मिश्रा और दूरदर्शन की ललिता शर्मा ने किया। शरद मिश्र ने अपने संचालन के क्रम में कहा कि गंगा संस्कृति यात्रा एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजन
है, जिसका उद्देश्य गंगा नदी के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को उजागर करना है। इसका आयोजन गंगा नदी के संरक्षण, स्वच्छता और इसके सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। समापन अवसर पर केंद्र के निदेशक आशिस गिरी एवं कार्यक्रम प्रभारी एम.एम. मणि ने सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शक एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे, जिन्होंने कलाकारों के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की।

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