उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में महिला सशक्तिकरण और बेटियों के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए एक नया मॉडल सामने आया है, जिसे बागपत मॉडल के नाम से जाना जा रहा है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल की अगुवाई में शुरू की गई “नव देवियों की शक्ति” पहल के तहत 9 योजनाएं लागू की गई हैं। ये योजनाएं बेटियों के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता पर केंद्रित हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को साकार करने वाली इस पहल की खास बात प्रशासन और खाप पंचायतों की साझेदारी है, जो उत्तर प्रदेश में अपनी तरह का पहला प्रयोग माना जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बेटियों को सिर्फ सुरक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें समान अवसर, सामाजिक स्वीकृति और आर्थिक मजबूती दिलाना है। 11 जनवरी 2026 को जारी खबरों के अनुसार, यह मॉडल अब प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।
बागपत में सोच का बदलाव कैसे आया
बागपत जिले में पहले जहां बेटियों को बोझ समझा जाता था, वहां अब परिवार उन्हें घर की शान मानने लगा है। एक छोटी बेटी के नाम की नेम प्लेट घर की दीवार पर लगना अब आम बात हो गई है। यह बदलाव प्रशासन की मेहनत और समाज की भागीदारी से आया है। नव देवियों की शक्ति के नौ मंत्रों ने यहां की सोच को नई दिशा दी है, जिससे बेटियां अब परिवार की पहचान और गौरव का हिस्सा बन रही हैं।
नव देवियों की शक्ति की 9 प्रमुख योजनाएं
ये योजनाएं स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी हैं। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने इन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने का काम किया है।
- निरा मुहिम : इस योजना के तहत बालिकाओं और महिलाओं को मुफ्त कॉटन रियूजेबल सेनेट्री पैड दिए जा रहे हैं। ये पैड दो से ढाई साल तक इस्तेमाल हो सकते हैं और पूरी तरह रीसाइकिल योग्य हैं। इससे महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर हो रहा है और प्लास्टिक कचरे में कमी आ रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी फायदा मिल रहा है।
- बेटी का नाम घर की शान अभियान : घरों के बाहर बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगाई जा रही है। ग्राम प्रधान, कर्मचारी, मीडिया और आम लोग इसमें शामिल हैं। इसका मकसद पितृसत्तात्मक सोच को बदलना और यह संदेश देना है कि बेटी बोझ नहीं, बल्कि परिवार की पहचान है।
- मेरी बेटी मेरी कुलदीपक : उत्तर प्रदेश में अपनी तरह का यह पहला अभियान है। जिन परिवारों में एक या दो बेटियां हैं, उन्हें सम्मानित किया जा रहा है। बेटियों को उपहार देकर यह दिखाया जा रहा है कि अच्छे संस्कार और अवसर मिलने पर बेटियां समाज को रोशन करती हैं।
- कन्या जन्मोत्सव : नवजात बेटी के जन्म पर अस्पताल में ही जन्म प्रमाण पत्र, बेबी किट, सहजन का पौधा और बेबी स्वैडल दिया जाता है। साथ ही सुमंगला योजना समेत सभी पात्र सरकारी योजनाओं में उसका नामांकन तुरंत हो जाता है, ताकि परिवार को बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें।
- बुनकर महिलाएं : हुनर से आत्मनिर्भरता : बुनकर महिलाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इससे उनके पारंपरिक हुनर को नया बाजार मिल रहा है और वे आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। बागपत में इससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।
- सांस अभियान : नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे नवजात मृत्यु दर में कमी लाई जा रही है और बच्चों का इलाज बेहतर हो रहा है।
- कार्यस्थल पर महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा : महिलाओं को कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से बचाने के लिए कार्यशालाएं चलाई जा रही हैं। बागपत में सार्वजनिक स्थलों पर ‘आंचल’ स्तनपान कक्ष शुरू किए गए हैं। बड़ौत बस डिपो से शुरू हुई यह सुविधा कामकाजी और पढ़ने वाली महिलाओं को गरिमा के साथ सुविधा देती है।
- किशोरी का पिटारा : किशोरियों के संवेदनशील सवालों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए यह नई पहल है। किशोरियां अपने सवाल कागज पर लिखकर एक बॉक्स में डालती हैं। प्रशिक्षित काउंसलर वैज्ञानिक तरीके से इनका जवाब देते हैं, ताकि वे बिना संकोच के बात कर सकें।
- हर बेटी का सम्मान : खाप पंचायतों के साथ सामाजिक क्रांति : मिशन शक्ति 5.0 के तहत खाप पंचायतों के प्रमुखों से संवाद किया गया। उन्होंने दहेज, ऑनर किलिंग और भ्रूण हत्या के खिलाफ संकल्प लिया। कई अल्ट्रासाउंड केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए और अवैध मशीनें जब्त की गईं। जिलाधिकारी अस्मिता लाल का कहना है कि बेटियां समाज की असली ताकत हैं और बागपत अब प्रगति का प्रतीक बनेगा।
बागपत मॉडल की खासियत और प्रभाव
यह पहल प्रशासन और समाज की साझेदारी का बेहतरीन उदाहरण है। खाप पंचायतों का समर्थन मिलने से कुप्रथाओं पर रोक लगाना आसान हुआ है। बागपत अब महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल बन रहा है। ये योजनाएं न सिर्फ बेटियों के भविष्य को सुरक्षित कर रही हैं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
बागपत मॉडल का उद्देश्य बेटियों को केवल संरक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें समान अवसर, सामाजिक स्वीकृति और आत्मनिर्भरता दिलाना है। ‘नव देवियों की शक्ति’ के नौ मंत्र स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और गरिमा से जुड़े हैं। यह पहल प्रशासन और समाज की साझेदारी से आगे बढ़ रही है, जिसमें खाप पंचायतों की भागीदारी इसे एक मजबूत सामाजिक आंदोलन बनाती है। हमारा संकल्प है कि बेटी को सम्मान, सुरक्षा, पहचान और अवसर, चारो ही स्तरों पर पूरा अधिकार मिले। – अस्मिता लाल, डीएम बागपत
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