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Saturday, January 17, 2026

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- ‘प्रगति’ नए भारत की कार्यसंस्कृति का प्रतीक

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लखनऊ। लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘प्रगति’ मॉडल की तारीफ की। उन्होंने बताया कि यह मॉडल सिर्फ बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति का मजबूत उदाहरण है। प्रगति के जरिए इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी का मेल ठोस नतीजे दे रहा है।

उत्तर प्रदेश को बॉटलनेक स्टेट से ब्रेकथ्रू स्टेट बनाने में इस मॉडल ने बड़ी भूमिका निभाई है। राज्य में 10.48 लाख करोड़ रुपये की 330 परियोजनाएं चल रही हैं, जो देश का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो है। इनमें से 39 प्रतिशत प्रोजेक्ट्स पूरे हो चुके हैं और बाकी समय पर आगे बढ़ रहे हैं। सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना की, जिन्होंने गुजरात से इसकी शुरुआत की थी।

प्रगति मॉडल की शुरुआत और विकास

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रगति मॉडल की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी थी। साल 2003 में गुजरात में ‘स्वागत’ नाम से यह शुरू हुआ, जो स्टेट वाइड अटेंशन ऑन ग्रीवांसेज बाई एप्लिकेशन ऑफ टेक्नोलॉजी का शॉर्ट फॉर्म है। इसका मकसद नागरिकों की शिकायतों को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ सुलझाना था। बाद में 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया गया और इसका नाम ‘प्रगति’ रखा गया, जो प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन का मतलब है।

यह मॉडल मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, सामाजिक योजनाओं और सिस्टम सुधारों में टीम इंडिया अप्रोच को बढ़ावा देता है। सीएम ने कहा कि प्रगति सिर्फ रिव्यू का तरीका नहीं है, बल्कि गवर्नेंस में बड़ा सुधार है। इससे शासन फाइलों से निकलकर फील्ड में नतीजे देने लगा है। निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हुई है, समय और पैसे की बर्बादी रुकी है। केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बेहतर हुआ है और हर किसी की जिम्मेदारी साफ हो गई है।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति का प्रभाव

राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति मॉडल ने बड़ा असर दिखाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके जरिए 86 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को गति मिली है। प्रधानमंत्री खुद 377 प्रमुख प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करते हैं। कुल 3162 मुद्दों में से 2958 का समाधान हो चुका है, जो शासन की विश्वसनीयता को दिखाता है। प्रगति ने डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को मजबूत किया है। अंतर-मंत्रालयीय और अंतर-विभागीय समन्वय से जटिल समस्याओं का समय पर हल निकलता है।

सीएम योगी ने कहा कि जब इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी साथ आते हैं, तो नतीजे अपने आप मिलते हैं। यह मॉडल नए भारत की कार्यसंस्कृति का प्रतीक बन गया है। पहले जहां प्रोजेक्ट्स अटक जाते थे, अब वे समय पर पूरे हो रहे हैं। इससे देश की विकास गति तेज हुई है और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

उत्तर प्रदेश में प्रगति मॉडल का गेम-चेंजर रोल

उत्तर प्रदेश के लिए प्रगति मॉडल गेम-चेंजर साबित हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आज देश का प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन बन गया है। एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, ज्यादा शहरों में मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी, पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे जैसे प्रोजेक्ट्स समय पर आगे बढ़ रहे हैं। इन सबके पीछे प्रगति का निरंतर समीक्षा और समस्या समाधान का प्लेटफॉर्म है।

राज्य में इंटर-एजेंसी बाधाएं खत्म हो गई हैं। अनुमतियां और मंजूरियां तेजी से मिल रही हैं। पहले जहां सालों लगते थे, अब महीनों या दिनों में काम हो जाता है। इससे निवेशक राज्य की ओर आकर्षित हो रहे हैं। सीएम ने कहा कि अगर देरी होती है तो निवेशक दूसरे राज्यों में चले जाते हैं, लेकिन प्रगति ने इस समस्या को सुलझा दिया है। उत्तर प्रदेश बॉटलनेक स्टेट से ब्रेकथ्रू स्टेट बन चुका है। सरकार अब सिर्फ फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि एक्सेलेरेटर की भूमिका निभा रही है।

उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो के आंकड़े

मुख्यमंत्री ने आंकड़ों से साबित किया कि उत्तर प्रदेश का इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो देश में सबसे बड़ा है। राज्य के पास 10.48 लाख करोड़ रुपये की 330 परियोजनाएं हैं। इनमें परिवहन, ऊर्जा, शहरी विकास, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। इनमें से 2.37 लाख करोड़ रुपये की 128 परियोजनाएं (39 प्रतिशत) पूरी होकर चालू हो चुकी हैं। वहीं, 8.11 लाख करोड़ रुपये की 202 परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से प्रगति पर हैं।

प्रगति के अंतर्गत राज्य में 4.19 लाख करोड़ रुपये की 65 बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें से 26 पूरी होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 39 निर्माण के अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ रही हैं। सीएम ने कहा कि गुणवत्ता और समयबद्धता पर फोकस है। सभी अड़चनों का समाधान करके प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा किया जा रहा है। रेलवे, हाईवे और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में राज्य अग्रणी बन गया है।

प्रगति पोर्टल से समस्याओं का समाधान

प्रगति पोर्टल ने उत्तर प्रदेश में इंटर-एजेंसी बाधाओं को प्रभावी तरीके से सुलझाया है। राजस्व, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन, नगर विकास, पंचायती राज जैसे विभाग एक ही प्लेटफॉर्म पर बैठकर समय पर समाधान करते हैं। इससे हाईवे, रेलवे, पावर और टेलीकॉम प्रोजेक्ट्स में तेज प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुशासन का प्रभावी मॉडल है।

राज्य में कुल 515 मुद्दों में से 494 (96 प्रतिशत) का समाधान हो चुका है। प्रगति के अंतर्गत 287 मुद्दों में से 278 (97 प्रतिशत) सुलझाए गए हैं। यह उच्च समाधान दर प्रशासन की तत्परता, स्पष्ट जिम्मेदारी और निर्णायक नेतृत्व को दिखाती है। सीएम ने कहा कि टीम इंडिया स्पिरिट मजबूत हुई है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से अब समस्या पर नहीं, बल्कि समाधान पर बात होती है।

प्रगति से विकास और रोजगार सृजन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रगति मॉडल ने उत्तर प्रदेश को विकास के नए रास्ते पर ले जाने में मदद की है। समयबद्ध परियोजनाएं न सिर्फ विकास की गति तेज करती हैं, बल्कि रोजगार भी पैदा करती हैं। पहले जहां प्रोजेक्ट्स स्वीकृत होकर अटक जाते थे, अब हर प्रोजेक्ट के शिलान्यास के साथ उसकी पूर्णता की समय-सीमा तय होती है। नियमित समीक्षा से सब कुछ ट्रैक पर रहता है।

सीएम ने प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रगति जैसे तकनीक-आधारित प्लेटफॉर्म से राज्य की छवि बदली है। अब उत्तर प्रदेश निवेशकों का पसंदीदा जगह बन गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर के मजबूत होने से अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिला है। स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में भी सुधार दिख रहा है।

प्रगति मॉडल का भविष्य और महत्व

प्रगति मॉडल का महत्व बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नई कार्यसंस्कृति का प्रतीक है, जहां हर काम पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से होता है। उत्तर प्रदेश में इसके जरिए और ज्यादा प्रोजेक्ट्स को गति दी जाएगी। राज्य सरकार का फोकस है कि सभी परियोजनाएं समय पर पूरी हों और लोगों को फायदा पहुंचे। इससे देश की विकास यात्रा और तेज होगी।

सीएम ने जोर दिया कि प्रगति ने साबित किया है कि अच्छी मंशा, तकनीक और जिम्मेदारी से बड़े बदलाव आ सकते हैं। उत्तर प्रदेश का उदाहरण दूसरे राज्यों के लिए प्रेरणा है। आने वाले समय में यह मॉडल और मजबूत होगा और नए भारत के निर्माण में योगदान देगा।

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