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Tuesday, March 3, 2026

CM Yogi की अनोखी पहल, दिव्यांग सफाईकर्मी की पुत्री का कराया अन्नप्राशन, छलके आंसू

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गोरखपुर /अदिति सिंह। यूपी के CM योगी आदित्यनाथ  (Yogi Adityanath) ने सोमवार को एक अनोखा काम कर दिया। मुख्यमंत्री ने दिव्यांग सफाईकर्मी विवेक और उनकी पत्नी संध्या की मन्नत पूरी कर दी। उन्हें पूरी दुनिया की खुशी दे दी। सीएम योगी ने सोमवार सुबह मंदिर परिसर में विवेक की सात माह की बिटिया का अन्नप्राशन कराया। आशीर्वाद दिया तो विवेक की आंखें खुशी से छलक उठीं। विवेक का कहना है कि बिटिया का अन्नप्राशन मुख्यमंत्री के हाथों होना हमारे लिए बड़े सौभाग्य की बात है।


पैर से दिव्यांग विवेक शर्मा नगर निगम में आउटसोर्सिंग सफाईकर्मी हैं। उनकी ड्यूटी छिड़काव कार्य की है। वह मंदिर परिसर में ही बने कर्मचारी आवास में पत्नी संध्या व अन्य परिजनों के साथ रहते हैं। उनके दो बच्चे हैं। तीन साल का बेटा और सात माह की बिटिया।

—पूरी हुई मन्नत, सीएम ने बिटिया को अपने हाथों से खिलाई खीर
—मुख्यमंत्री ने बच्ची के मुंह में पहले से लगे निप्पल को निकाला
—अपने हाथों से खीर खिलाकर अन्नप्राशन कराया और आशीर्वाद दिया।
—पैर से दिव्यांग विवेक शर्मा नगर निगम में आउटसोर्सिंग सफाईकर्मी

बिटिया से पहले भी एक और बच्चा हुआ था लेकिन वह असमय साथ छोड़ गया। बकौल विवेक बिटिया के जन्म के ही दिन उन्होंने गुरु गोरखनाथ से मन्नत मांगी थी कि बच्ची का अन्नप्राशन गोरक्षपीठाधीश्वर के हाथों हो। और, उनकी यह मन्नत सोमवार को पूरी हो गई।
सोमवार सुबह मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जब जनता दर्शन में लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। एक-एक कर लोगों से मिलते हुए उनकी नजर कुर्सी पर बच्ची को गोद में लिए बैठे दिव्यांग विवेक पर पड़ी। मंदिर परिसर में सेवारत होने से सीएम उसे पहचानते हैं। पूछ पड़े, क्या समस्या है। विवेक ने बच्ची को गोद में लिए ही हाथ जोड़ लिए। उन्हें अपनी मन्नत वाली बात बताई तो मुख्यमंत्री मुस्कुराने लगे। फौरन बिटिया को होड़ में लेकर दुलारने लगे। उधर विवेक घर से खीर बनवाकर लाए थे। मुख्यमंत्री ने बच्ची के मुंह में पहले से लगे निप्पल को निकाला, अपने हाथों से खीर खिलाकर अन्नप्राशन कराया और आशीर्वाद दिया। विवेक का कहना है कि ‘महाराज जी’ के हाथों बिटिया का अन्नप्राशन होने की खुशी में वह इतने विह्वल हो गए कि एक ख्वाहिश बताना भूल गए। उनके मुताबिक वह बिटिया का नामकरण भी महाराज जी से ही कराना चाहते हैं। आज उन्हें बता दिए होते तो आज ही नामकरण भी हो जाता।

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