लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लखपति दीदी योजना के तहत महिलाएं अब आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। कई महिलाएं हर महीने लाख रुपये तक कमा रही हैं, जबकि 33 लाख से ज्यादा महिलाएं इस लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं। योगी सरकार की महिला सशक्तिकरण नीतियों से स्वयं सहायता समूहों (SHG) के जरिए हजारों परिवारों की स्थिति बदली है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 18 लाख से अधिक महिलाएं पहले ही लखपति दीदी बन चुकी हैं, और कुल 99 लाख से ज्यादा महिलाएं SHG से जुड़ी हुई हैं।
लखपति दीदी योजना से महिलाओं की कमाई बढ़ी
लखपति दीदी योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आसान और ब्याज मुक्त ऋण मिलता है। इससे वे छोटे-मोटे कारोबार शुरू कर पाती हैं। कई महिलाएं अब हर महीने एक लाख रुपये तक कमा रही हैं। उदाहरण के तौर पर आजमगढ़ की हुस्नआरा खातून तैबा SHG की सदस्य हैं। उन्होंने रेशमी साड़ी बनाने का काम शुरू किया। योजना से 1 लाख 15 हजार रुपये की मदद मिलने के बाद उनका कारोबार 12 गुना बढ़ गया। अब वे महीने में करीब एक लाख रुपये कमाती हैं। उनका परिवार अब सम्मान और आत्मविश्वास से जी रहा है।
सफलता की मिसाल: शशिकला राजभर और सरोज मौर्या
आजमगढ़ की शशिकला राजभर ने SHG से ऋण लेकर ‘अदिति फास्ट फूड’ स्टॉल शुरू किया। आज वे रोजाना लगभग 2000 रुपये का कारोबार करती हैं। पहले वे नौकरी की तलाश में थीं, लेकिन अब दूसरों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। इसी तरह सरोज मौर्या पढ़ाई के साथ BC सखी के रूप में काम करती हैं। वे गांवों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाती हैं, जैसे जमा-निकासी, पेंशन और डिजिटल पेमेंट। पहले ग्रामीण महिलाएं बैंक जाने से डरती थीं, लेकिन अब घर के पास ही सब सुविधाएं मिलती हैं।
वित्तीय लेनदेन में बड़ा योगदान
प्रदेश की BC सखियों ने अब तक करीब 40 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय लेनदेन किया है। इससे उन्हें 107 करोड़ रुपये से ज्यादा का लाभांश मिला है। यह दिखाता है कि महिलाएं अब आर्थिक गतिविधियों का मुख्य हिस्सा बन चुकी हैं। सरकार ने SHG को मजबूत बनाने पर जोर दिया है, जिससे महिलाओं को प्रशिक्षण, पूंजी और बाजार से जोड़ा जा रहा है।
स्वयं सहायता समूहों का विस्तार
उत्तर प्रदेश में 9 लाख से ज्यादा SHG बनाए गए हैं। इनमें 63,519 ग्राम संगठन और 3272 संकुल स्तरीय संघ सक्रिय हैं। कुल 99 लाख से अधिक महिलाएं इनसे जुड़ी हैं। लखपति दीदी योजना के तहत 18 लाख से ज्यादा महिलाएं सालाना एक लाख रुपये से ज्यादा कमाने वाली श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य और ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, जैसे एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने की योजना चल रही है।
पूंजी और प्रशिक्षण से मिलता बल
योजना के तहत महिलाओं को लघु उद्योग या स्वरोजगार के लिए चरणबद्ध तरीके से पूंजी दी जाती है। यह ब्याज मुक्त होती है, जिससे छोटे कारोबार आसानी से शुरू हो जाते हैं। पिछले नौ सालों में सरकार ने महिला सशक्तिकरण पर लगातार काम किया है। इससे न सिर्फ कमाई बढ़ी है, बल्कि परिवारों में महिलाओं की भूमिका मजबूत हुई है। वे अब परिवार का सहारा बन रही हैं।
यह बदलाव समाज की संरचना को बेहतर बना रहा है। महिलाएं आर्थिक फैसले खुद ले रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं।
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