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Tuesday, January 20, 2026

‘पापा मुझे बचा लो… मैं मरना नहीं चाहता’, नोएडा में पिता की आंखों के सामने इंजीनियर बेटे की डूबकर मौत

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नोएडा के सेक्टर 150 में घने कोहरे के कारण एक 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार अनियंत्रित होकर पानी से भरे निर्माणाधीन बेसमेंट में गिर गई, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई। घटना के दौरान युवराज ने पिता राजकुमार मेहता को फोन कर बार-बार मदद मांगी और “पापा मुझे बचा लो” कहते रहे।

पिता मौके पर पहुंचे, लेकिन घने कोहरे, अंधेरे और बचाव संसाधनों की कमी के चलते युवराज को बचाया नहीं जा सका। परिवार ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। यह हादसा शुक्रवार रात करीब 12 बजे हुआ, जो सड़क सुरक्षा और निर्माण स्थलों पर लापरवाही के मुद्दे को फिर उजागर करता है।

हादसे का विवरण

शुक्रवार रात युवराज मेहता गुरुग्राम से अपनी ग्रैंड विटारा कार से घर लौट रहे थे। वे नोएडा के सेक्टर 150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में रहते थे। एटीएस ले ग्रैंडियोज के पास टी-पॉइंट पर घने कोहरे की वजह से विजिबिलिटी बहुत कम थी। कार तेज रफ्तार में थी और नियंत्रण खोकर नाले की टूटी दीवार तोड़ते हुए पास के निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में जा गिरी, जहां 30 से 70 फीट तक गहरा पानी भरा हुआ था।

युवराज तैरना नहीं जानते थे। उन्होंने कार से बाहर निकलकर छत पर चढ़कर खुद को संभाला। उन्होंने फोन की फ्लैशलाइट जलाकर और चिल्लाकर मदद मांगी। करीब दो घंटे तक वे इसी हालत में रहे और पिता को बार-बार फोन कर बताया कि पानी बहुत ठंडा है और वे डूब रहे हैं।

पिता का दर्द और प्रयास

युवराज के पिता राजकुमार मेहता, जो भारतीय स्टेट बैंक से रिटायर्ड निदेशक हैं, बेटे के फोन और मैसेज मिलते ही मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस, दमकल और आपदा प्रबंधन टीमों को सूचना दी। टीमें 15 मिनट में पहुंचीं, लेकिन घने कोहरे, अंधेरे और ठंडे पानी के कारण बचाव मुश्किल हो गया। राजकुमार मेहता ने बताया कि उन्होंने पूरी ताकत लगा दी, लेकिन बेटे को बचाने में नाकाम रहे। युवराज लगातार “पापा मुझे बचा लो” और “मैं मरना नहीं चाहता” कहते रहे। पिता की आंखों के सामने ही उनका बेटा तड़प-तड़प कर डूब गया।

बचाव अभियान और चुनौतियां

पुलिस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव कार्य करीब 4-5 घंटे चला। एक फ्लिपकार्ट डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने बहादुरी दिखाते हुए पानी में कूदकर मदद की कोशिश की, लेकिन तब तक युवराज की मौत हो चुकी थी। सुबह करीब 4-6 बजे शरीर निकाला गया और अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

परिवार का कहना है कि बचाव में देरी हुई क्योंकि टीमों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे और ठंडे पानी में उतरने से हिचकिचाहट थी।

परिवार की पृष्ठभूमि और आरोप

युवराज मूल रूप से बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले थे। वे डनहमबी इंडिया कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। उनकी मां का दो साल पहले निधन हो चुका था और बहन ब्रिटेन में रहती हैं। युवराज ने पढ़ाई और करियर बनाने में कड़ी मेहनत की थी। वे परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे।

पिता राजकुमार मेहता ने नोएडा प्राधिकरण और बिल्डरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि निर्माण स्थल पर कोई बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, साइन बोर्ड या लाइटिंग नहीं थी। सेक्टर 150 के निवासियों ने पहले भी कई बार यह शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस आधार पर नॉलेज पार्क पुलिस ने दो बिल्डर कंपनियों – एमजे विशटाउन प्लानर लिमिटेड और लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड – के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच जारी है।

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