झांसी, उत्तर प्रदेश। बुंदेलखंड की मिट्टी अब महिला उद्यमिता की नई मिसाल पेश कर रही है। झांसी जिले की एक महिला उद्यमी प्रवेश कुमारी ने गो सेवा को अपना व्यवसाय बनाकर न केवल खुद को आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार और आत्मनिर्भरता का रास्ता दिखाया है। उन्होंने सौर ऊर्जा से चलने वाली उच्च गुणवत्ता वाले पशु चारे की यूनिट शुरू की है, जिससे वे हर महीने करीब 25,000 रुपये कमा रही हैं। यह सफलता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ विजन से जुड़ी हुई है।
बुंदेलखंड में महिला उद्यमिता की नई पहचान
बुंदेलखंड की धरती हमेशा से बहादुरी के लिए जानी जाती है, लेकिन अब यहां महिला उद्यमिता भी तेजी से उभर रही है। झांसी की प्रवेश कुमारी ने पशु चारा बनाने की छोटी सी शुरुआत की, जो आज एक सफल स्टार्टअप बन चुकी है। यह यूनिट न केवल स्थानीय डेयरी किसानों को सस्ता और पौष्टिक चारा उपलब्ध करा रही है, बल्कि गांव की महिलाओं को सामूहिक रूप से काम करने का मौका भी दे रही है। मुख्यमंत्री योगी के आत्मनिर्भरता के सपने को जमीन पर उतारने में ऐसी कहानियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
सौर ऊर्जा से चलती यूनिट: बिजली खर्च शून्य
इस यूनिट की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल है। योगी सरकार और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स (डीए) के सहयोग से स्थापित यह इकाई 18 किलोवाट की सौर ऊर्जा प्रणाली पर चलती है। इससे बिजली का खर्च बिल्कुल शून्य हो जाता है, जिसके कारण चारे की उत्पादन लागत बहुत कम रहती है। सस्ता और पौष्टिक चारा मिलने से स्थानीय पशुपालकों के जानवरों का स्वास्थ्य बेहतर होता है और दूध उत्पादन में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
रोजगार सृजन और सामूहिक भागीदारी
प्रवेश कुमारी की इस पहल से गांव में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। उनकी यूनिट ने सामाजिक संरचना को भी बदला है। अब गांव की कई महिलाएं स्थायी आय कमा रही हैं और परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। यह नया स्टार्टअप गांवों में सामूहिक भागीदारी की प्रथा को बढ़ावा दे रहा है, जहां महिलाएं मिलकर काम करती हैं और एक-दूसरे का सहारा बनती हैं।
पूरी जिम्मेदारी खुद संभालती हैं प्रवेश
प्रवेश कुमारी सिर्फ उद्यमी नहीं, बल्कि एक कुशल मैनेजर भी हैं। वे कच्चे माल की खरीददारी से लेकर उत्पादन योजना, गुणवत्ता नियंत्रण और वित्तीय खातों तक सब कुछ खुद देखती हैं। आधुनिक मशीनरी और मानकीकृत तकनीकों का इस्तेमाल करके वे पौष्टिक चारा तैयार करती हैं, जो स्थानीय बाजार की मांग के अनुसार उपलब्ध होता है। उनकी मेहनत और वित्तीय अनुशासन के कारण उनकी यूनिट ‘गोमाता कैटल फीड’ को कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
छोटी शुरुआत से बड़ा मुकाम
शुरुआत बहुत छोटे स्तर से हुई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के मार्गदर्शन ने इसे एक पूर्ण व्यवसाय में बदल दिया। आज यह यूनिट न केवल प्रवेश कुमारी के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
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