प्रयागराज में 3 जनवरी 2026 को पौष पूर्णिमा के साथ माघ मेला 2026 की शुरुआत हो गई। त्रिवेणी संगम पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ पड़ी। लाखों लोग गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में पवित्र स्नान कर पुण्य कमाने पहुंचे। साधु-संतों सहित किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भी स्नान में शामिल हुईं। मेला अधिकारी के अनुसार, सुबह 8 बजे तक करीब 6.5 लाख श्रद्धालु स्नान कर चुके थे। प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं। यह मेला 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें कुल 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
स्नान में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
पौष पूर्णिमा पर माघ मेले के पहले दिन संगम तट पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुबह से ही लोग विभिन्न घाटों पर पहुंचकर स्नान कर रहे थे। आम लोगों के साथ-साथ साधु-संत और कल्पवासी भी बड़ी संख्या में मौजूद थे। किन्नर अखाड़ा महामंडलेश्वर स्वामी कल्याणी नंदगिरी भी मेले में पहुंचीं और पवित्र स्नान किया। उन्होंने कहा कि इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में श्रद्धालुओं के लिए अच्छी व्यवस्थाएं की गई हैं। वे मां गंगा से सभी के कष्ट दूर करने की प्रार्थना करेंगी।
मेला अधिकारी ऋषि राज ने बताया कि पौष पूर्णिमा पर माघ मेला शुरू हो चुका है। सुबह 8 बजे तक लगभग 6.5 लाख श्रद्धालु स्नान कर चुके थे। श्रद्धालु और कल्पवासी लगातार आ रहे हैं। विभिन्न घाटों पर स्नान सुचारू रूप से चल रहा है। प्रशासन ने चेंजिंग रूम और बाथरूम की पर्याप्त व्यवस्था की है।
सुरक्षा और सुविधाओं के इंतजाम
प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान कर रहे हैं। लोग सुरक्षित तरीके से स्नान करके अपने गंतव्य की ओर जा रहे हैं। सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मी और अधिकारी तैनात हैं। जल पुलिस, एनडीआरएफ और जीआरएफ की टीमें भी ड्यूटी पर हैं। सभी व्यवस्थाएं पूरी हैं, ताकि कोई असुविधा न हो।
एक श्रद्धालु ने स्नान के बाद कहा कि यह उनकी तीसरी यात्रा है। पहले भी वे कुंभ और माघ मेले में आ चुके हैं। यहां की व्यवस्था बहुत अच्छी है। सब कुछ सुव्यवस्थित है। स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, अगर किसी की तबीयत खराब हो तो डॉक्टर तुरंत मदद करते हैं।
माघ मेले का महत्व और आगे की तैयारियां
माघ मेला प्रयागराज में हर साल आयोजित होता है, जहां श्रद्धालु माघ मास में स्नान कर पुण्य कमाते हैं। इस बार महाकुंभ 2025 के बाद पहला बड़ा मेला है, इसलिए श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने की उम्मीद है। मेले में कल्पवास करने वाले भी बड़ी संख्या में आए हैं। प्रशासन ने घाटों का विस्तार किया है और पंटून पुलों की संख्या बढ़ाई है।
मेला 44 दिनों तक चलेगा। प्रमुख स्नान पर्वों पर और ज्यादा भीड़ रहेगी। प्रशासन की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के स्नान कर सकें। यह मेला आस्था और एकता का प्रतीक है, जहां लोग दूर-दूर से आकर संगम में डुबकी लगाते हैं।
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