लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) का तीन दिवसीय आयोजन 19 जनवरी से शुरू हो गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में देश की सभी विधानसभाएं डिजिटल और पेपरलेस हो चुकी हैं तथा उनकी कार्यवाही का सजीव प्रसारण हो रहा है।
सम्मेलन का मुख्य संदेश ‘सशक्त विधायिका-समृद्ध राष्ट्र’ है। इस आयोजन में 28 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं और विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारी एक मंच पर जुटे हैं। यह सम्मेलन लोकतंत्र को मजबूत बनाने, तकनीक के उपयोग और विधायी जवाबदेही पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है। यह लखनऊ में चौथी बार आयोजित हो रहा है।
सम्मेलन का उद्घाटन और मुख्य अतिथियों की मौजूदगी
ऐतिहासिक विधानसभा परिसर में सम्मेलन का शुभारंभ सनातन परंपरा के अनुसार दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित किए। कार्यक्रम की शुरुआत सभी प्रतिभागियों द्वारा खड़े होकर राष्ट्रगान गाने से हुई। इसके बाद “भारत माता की जय” के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा।
ओम बिरला का महत्वपूर्ण संदेश
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि विधायिकाओं की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता का विश्वास और विश्वसनीयता बनाए रखना है। सदस्य अलग-अलग राजनीतिक दलों से आते हैं, लेकिन जनता की अपेक्षा यही रहती है कि उनके मुद्दे सदन में मजबूती से उठें। सहमति और असहमति दोनों लोकतंत्र की ताकत हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इस पर हमें गर्व होना चाहिए। उन्होंने 2015 के पिछले लखनऊ सम्मेलन का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय तकनीक अपनाने का फैसला हुआ था, जिसके नतीजे में आज सभी विधानसभाएं पेपरलेस हो गई हैं और कार्यवाही का लाइव प्रसारण हो रहा है।
उत्तर प्रदेश की प्रगति पर प्रकाश
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि इतने बड़े राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी प्रदेश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का आभार जताया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले करीब नौ वर्षों में प्रदेश की छवि बदली है और लोगों का नजरिया सकारात्मक हुआ है। उन्होंने राजनीति को लेकर नकारात्मक धारणा पर सवाल उठाए और कहा कि समाज के हर वर्ग से लोग विधायक बनते हैं, जैसे पीएचडी धारक, रिटायर्ड आईएएस-आईपीएस, जमीनी कार्यकर्ता और सफाईकर्मी भी। तीनों अंगों – विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका – के बीच सहयोग, सम्मान और संवाद से लोकतंत्र मजबूत होता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश
सतीश महाना ने लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश पढ़ा। प्रधानमंत्री ने सम्मेलन पर प्रसन्नता जताई और इसके सफल आयोजन की कामना की। उन्होंने कहा कि संवाद और विचार-विमर्श लोकतंत्र के अभिन्न अंग हैं, जो पारदर्शिता बढ़ाते हैं और विविध मतों का सम्मान करते हैं।
नेता प्रतिपक्ष और अन्य वक्ताओं के विचार
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह सम्मेलन आत्मनिरीक्षण और आत्मसुधार का मंच है। लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का अवसर नहीं, बल्कि शासन और समाज के बीच निरंतर संवाद की प्रक्रिया है। संविधान सरकार से बड़ा है और नागरिक सत्ता से ऊपर हैं।
राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने लखनऊ को तहजीब का प्रतीक और उत्तर प्रदेश को भारत का हृदय प्रदेश बताया। उन्होंने काशी, प्रयाग, अयोध्या जैसी पावन भूमियों का जिक्र किया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा सतीश महाना के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश आज अवसरों का केंद्र बन रहा है और जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उत्तर प्रदेश की झलक लघु फिल्म में
कार्यक्रम में “उत्तर प्रदेश कैसे बन रहा है सर्वोत्तम प्रदेश” पर एक लघु फिल्म दिखाई गई। इसमें तीर्थ स्थलों, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, रानी लक्ष्मीबाई, रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आज़ाद, बिस्मिल्लाह खान, पंडित रविशंकर और पंडित बिरजू महाराज जैसी महान विभूतियों का चित्रण था।
आगामी चर्चा के विषय
यह तीन दिवसीय सम्मेलन 21 जनवरी तक चलेगा। इसमें विधायी कार्यकुशलता, तकनीक का उपयोग (जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल), शिक्षा का नया युग, जनता के प्रति जवाबदेही और विकसित भारत जैसे विषयों पर विस्तृत मंथन होगा। यह विचार-विमर्श उत्तर प्रदेश से शुरू होकर पूरे देश की विधानसभाओं तक लोकतंत्र को मजबूत करने का संदेश देगा। सम्मेलन के बाद 22 जनवरी को प्रतिभागियों का अयोध्या धाम भ्रमण निर्धारित है।
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