अयोध्या। उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या के विकास के लिए 250 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इसमें से 150 करोड़ श्री अयोध्या जी तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद को दिए जाएंगे, जबकि बाकी 100 करोड़ पर्यटन और बुनियादी ढांचे के कामों पर खर्च होंगे।
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है, इसलिए सरकार कम चर्चित लेकिन ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रही है। आठ ऐसे स्थलों पर सौंदर्यीकरण और विकास कार्य होंगे, जो अयोध्या को धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
योगी सरकार की बड़ी सौगात: अयोध्या विकास बजट 2026
फरवरी 2026 के ताजा बजट में अयोध्या को 250 करोड़ रुपये की मोटी रकम मिली है। यह राशि रामनगरी को और चमकदार बनाने के लिए इस्तेमाल होगी। श्री अयोध्या जी तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद को 150 करोड़ रुपये का हिस्सा दिया गया है, जो धार्मिक स्थलों के संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं पर फोकस करेगी। बाकी 100 करोड़ अन्य विकास कार्यों जैसे सड़क, पार्किंग और सफाई पर लगेंगे। राम जन्मभूमि मंदिर के बाद अयोध्या में रोज लाखों श्रद्धालु आ रहे हैं, इसलिए सरकार का यह कदम समय पर लगता है। परिषद ने आठ कम चर्चित स्थलों के लिए विकास योजनाएं शासन को भेजी हैं, जिन्हें जल्द शुरू करने की योजना है।
आठ धार्मिक स्थलों को मिलेगी नई पहचान
अयोध्या के आसपास कई ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थान हैं, जो अभी ज्यादा लोगों को नहीं पता। सरकार अब इन्हें संवारने जा रही है ताकि श्रद्धालु राम मंदिर के अलावा इनका भी दर्शन कर सकें। इनमें शामिल हैं:
- बेतिया मंदिर, मीरापुर, डेराबीबी (अयोध्या धाम): यहां दो करोड़ रुपये से विकास कार्य होंगे। मंदिर परिसर को सुंदर बनाया जाएगा।
- मणिपर्वत: तीन करोड़ रुपये की लागत से इस महत्वपूर्ण स्थल का सौंदर्यीकरण होगा।
- दशरथ समाधि स्थल के पास भगवान शंकर जी का मंदिर (विकास खंड पूरा): एक करोड़ रुपये से मंदिर क्षेत्र को बेहतर बनाया जाएगा।
- श्री अंजनेश्वर महादेव धाम (तमसा नदी तट, ग्राम अंजना सदर): एक करोड़ रुपये से इस धाम को पर्यटक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
- श्री महर्षि वाल्मीकि आश्रम (आलापुर, मजरा दोस्तपुर): एक करोड़ रुपये से आश्रम का रखरखाव और विकास होगा।
- आंबेडकर पार्क (ग्राम कुढ़ासादात, तहसील रुदौली): एक करोड़ रुपये से पार्क को आकर्षक बनाया जाएगा।
- मिल्कीपुर में आस्तीकन गहनाग बाबा: एक करोड़ रुपये से इस स्थल का पर्यटन विकास होगा।
- नगर पंचायत भदरसा में भरत जी की तपोस्थली: दो करोड़ रुपये से तपोस्थली को नया रूप दिया जाएगा।
ये परियोजनाएं डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) के साथ तैयार हैं। इससे अयोध्या धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर और मजबूत होगी।
श्रद्धालुओं की सुविधा पर जोर: परिषद का मुख्य लक्ष्य
योगी आदित्यनाथ सरकार ने श्रद्धालुओं की आसानी के लिए श्री अयोध्या जी तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद बनाई है। इसका मकसद अयोध्या और आसपास के इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देना है। धार्मिक स्थलों का रखरखाव, साफ-सफाई और बेहतर सुविधाएं जैसे पार्किंग, रेस्ट हाउस और गाइड सर्विस पर फोकस रहेगा। परिषद के सीईओ जयेंद्र कुमार ने कहा, “सरकार ने अयोध्या के लिए अच्छा बजट दिया है। हमारी आठ योजनाओं को जल्द मंजूरी मिलेगी और काम शुरू हो जाएगा। इससे पर्यटन को नई उड़ान मिलेगी।”
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। पहले जहां हफ्ते में कुछ हजार लोग आते थे, अब रोजाना लाखों की संख्या है। ऐसे में इन कम चर्चित स्थलों को जोड़ना सही कदम है, ताकि लोग ज्यादा समय रुकें और पूरा सर्किट घूमें।
आर्थिक फायदे: स्थानीय रोजगार और व्यापार को मिलेगा बूस्ट
डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के प्रोफेसर आशुतोष सिन्हा (अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष) ने इस बजट को सराहा। उन्होंने बताया, “250 करोड़ का प्रावधान अयोध्या के लिए बड़ा कदम है। यह सिर्फ सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।” प्रोफेसर सिन्हा के मुताबिक, राम मंदिर के बाद श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से होटल, दुकानें, ट्रांसपोर्ट और हस्तशिल्प का कारोबार जोर पकड़ रहा है। इन नए स्थलों के विकास से ठहराव का समय बढ़ेगा, जिससे ज्यादा खर्चा होगा और रोजगार के मौके बनेंगे।
उन्होंने कहा, “तीर्थ परिषद को 150 करोड़ मिलना दिखाता है कि सरकार धार्मिक पर्यटन को प्लानिंग के साथ आगे बढ़ा रही है। अगर काम समय पर और पारदर्शी तरीके से हो, तो अयोध्या उत्तर भारत का पर्यटन हब बन सकती है।” छोटे व्यापारियों, गाइड्स और कारीगरों को इससे फायदा होगा। कुल मिलाकर, यह निवेश लंबे समय तक आर्थिक लाभ देगा।
अयोध्या पर्यटन को नई दिशा: भविष्य की संभावनाएं
अयोध्या अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि पर्यटन का बड़ा स्पॉट बन रही है। सरकार का यह प्रयास कम चर्चित स्थलों को जोड़कर पूरे क्षेत्र को एक सर्किट में बदल देगा। श्रद्धालु राम जन्मभूमि से शुरू कर वाल्मीकि आश्रम, भरत तपोस्थली तक घूमेंगे। इससे अयोध्या की साख बढ़ेगी और यूपी का पर्यटन चार्ट पर ऊपर चढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता और समयबद्ध काम से यह योजना कामयाब होगी। फिलहाल, परिषद योजनाओं को लागू करने की तैयारी में जुटी है। अयोध्या अब और चमकेगी, और श्रद्धालुओं को यादगार अनुभव मिलेगा।

