लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने कहा है कि सरकार के लिए घोषणाएं नहीं, बल्कि परिणाम ही असली मापदंड हैं। उन्होंने इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) जैसी बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण, मेडिकल कॉलेजों की संख्या में वृद्धि, आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डन कार्ड जारी करने और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी संख्या में भर्तियों का जिक्र किया।
लखनऊ में 13 फरवरी को दिए बयान में सीएम योगी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार ने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया है, जिससे आम लोगों को बेहतर और निःशुल्क सुविधाएं मिल रही हैं।
परिणाम ही असली मापदंड: योगी आदित्यनाथ
CM योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा कि कोई भी बात करने से पहले उसके परिणाम देखने चाहिए। अगर सिर्फ लंबी-चौड़ी बातें की जाएं और नतीजे शून्य रहें, तो उसका कोई फायदा नहीं। इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में ठोस काम किया है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और कहा कि आज प्रदेश में इस बीमारी पर मजबूत काबू पाया गया है।
इंसेफेलाइटिस पर डबल इंजन सरकार की बड़ी जीत
पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस (जापानी इंसेफेलाइटिस) एक बड़ी समस्या थी, खासकर गोरखपुर और आसपास के इलाकों में। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले इस बीमारी से हर साल सैकड़ों बच्चे प्रभावित होते थे और कई की मौत हो जाती थी। समाजवादी पार्टी की कई बार सरकार बनी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने इस बीमारी पर वैसे ही सख्ती से काम किया, जैसे माफिया और अपराधियों पर किया। टीकाकरण, साफ-सफाई, मच्छर नियंत्रण और बेहतर इलाज की व्यवस्था से इंसेफेलाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण हो गया है। योगी ने कहा कि अब इस बीमारी से बच्चों की मौत लगभग शून्य हो गई है।
वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज: मेडिकल शिक्षा में क्रांति
योगी सरकार ने “वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज” की योजना को तेजी से लागू किया। पहले प्रदेश में सिर्फ 36 मेडिकल कॉलेज थे, अब यह संख्या बढ़कर 81 हो गई है। अमेठी में 81वां मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुका है और कुछ अन्य जिलों में काम चल रहा है। गोरखपुर और रायबरेली में दो एम्स (AIIMS) चल रहे हैं। कई मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी विभाग भी शुरू किए गए हैं। इससे डॉक्टरों की पढ़ाई और इलाज दोनों आसान हो रहे हैं।
हर जिले में निःशुल्क डायलिसिस और अन्य सुविधाएं
अब उत्तर प्रदेश के हर जिले में निःशुल्क डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है। आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश में 5 करोड़ 46 लाख गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इससे गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भेदभाव नहीं किया जाता – न जाति देखी जाती है, न धर्म, न वोट। जरूरतमंद को मदद मिलती है। विधायक निधि से भी गंभीर मरीजों की मदद के लिए लचीलापन दिखाया गया है। पहले कुछ निजी अस्पतालों की शिकायतें आई थीं, जांच के बाद उन्हें योजना से बाहर किया गया, लेकिन लंबित मामलों में अब भुगतान हो रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में 45 हजार से ज्यादा नई भर्तियां
स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए बड़ी भर्तियां हुई हैं। अब तक 41,868 पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती हो चुकी है। चिकित्सा शिक्षा में 4,110 से ज्यादा नियुक्तियां हुई हैं। कुल मिलाकर स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में 45,978 से ज्यादा लोग नियुक्त हुए हैं। इससे अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स, टेक्नीशियन और अन्य स्टाफ की उपलब्धता बढ़ी है। अब आईसीयू, मिनी आईसीयू, डिजिटल एक्स-रे, ब्लड बैंक, डायलिसिस यूनिट और ऑक्सीजन प्लांट जैसी सुविधाएं ज्यादातर जगहों पर हैं। ग्रामीण इलाकों में हर रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य मेले लगते हैं। 108 और 102 एंबुलेंस सेवाएं भी मजबूत की गई हैं।
निजी अस्पतालों पर नियंत्रण और भुगतान व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी अस्पतालों की मनमानी रोकना जरूरी है। सरकार सीजीएचएस दरों के अनुसार भुगतान करती है, तो अस्पतालों को भी सहयोग करना चाहिए। बाकी राशि सरकार देगी। यह पैसा जनता का है, इसलिए इसका सही इस्तेमाल होना चाहिए।
भविष्य में फार्मा और मेडटेक पर फोकस
योगी सरकार अब स्वास्थ्य को अर्थव्यवस्था से जोड़ रही है। एआई, जीनोमिक्स, टेलीमेडिसिन, मेडटेक और हेल्थटेक पर जोर दिया जा रहा है। बजट में इनके लिए प्रावधान हैं। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जा रहे हैं। ललितपुर में फार्मा पार्क की स्थापना हो रही है। गौतम बुद्ध नगर में मेडिकल डिवाइस पार्क का काम तेजी से चल रहा है। हाल में लखनऊ में फार्मा कॉन्क्लेव हुआ, जिसमें देश-विदेश के बड़े उद्यमी शामिल हुए। इससे सस्ते और अच्छे मेडिकल उपकरण और दवाएं उपलब्ध होंगी। उत्तर प्रदेश न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा बाजार बनेगा, बल्कि फार्मा प्रोडक्शन का हब भी बनेगा।

