लखनऊ। उत्तर प्रदेश ने पोषण अभियान और मिशन सक्षम आंगनवाड़ी के तहत महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य में बड़ी सफलता हासिल की है। राज्य ने 6 साल तक के 98.42 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों की न्यूट्रिशन मैपिंग पूरी कर ली है, जिसमें कुल 1,43,31,611 बच्चों को सफलतापूर्वक मैप किया गया। साथ ही, 99.97 प्रतिशत संस्थागत डिलीवरी दर्ज की गई है, जो सुरक्षित प्रसव में एक बड़ा रिकॉर्ड है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, ये उपलब्धियां पोषण 2.0 और अन्य योजनाओं के मजबूत क्रियान्वयन से आई हैं।
पोषण अभियान में यूपी की बड़ी उपलब्धि
उत्तर प्रदेश में पोषण अभियान के तहत छह साल तक के बच्चों का लक्ष्य 1,45,62,081 था, जिसमें से 1,43,31,611 बच्चों की मैपिंग हो चुकी है। यानी 98.42 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो गया। यह मैपिंग बच्चों को पोषण सेवाओं से जोड़ने में मदद करती है, जैसे कि सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन, स्वास्थ्य जांच और ग्रोथ मॉनिटरिंग। राज्य में कुल 1,89,736 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं, जो इस काम की रीढ़ हैं।
संस्थागत प्रसव में रिकॉर्ड सफलता
गर्भवती महिलाओं की देखभाल में भी यूपी ने कमाल दिखाया है। राज्य में 99.97 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में ही डिलीवरी करा रही हैं। 40,580 स्वास्थ्य कर्मियों की मदद से 93,65,940 लाभार्थी महिलाओं को सेवाएं दी जा रही हैं। यह संख्या दर्शाती है कि सुरक्षित मातृत्व और बच्चे की सेहत पर कितना फोकस है।
आंगनबाड़ी केंद्रों का अपग्रेड और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत
एक बड़े बदलाव में, राज्य ने 22,290 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को रेगुलर सेंटर में बदल दिया। साथ ही, 23,697 आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनबाड़ी में अपग्रेड करने की मंजूरी मिली है। ये अपग्रेड शुरुआती बचपन की देखभाल, खेल-कूद और शिक्षा में सुधार लाएंगे।
मिशन शक्ति और महिलाओं की सुरक्षा
मिशन शक्ति के तहत 31 अक्टूबर 2025 तक 2,96,173 महिलाओं को वन स्टॉप सेंटर से मदद मिली। राज्य में 124 मंजूर सेंटर्स में से 96 ऑपरेशनल हैं, जिनमें 64 अपनी बिल्डिंग में और 26 सरकारी जगहों पर चल रहे हैं। महिला हेल्पलाइन ने 31 दिसंबर 2025 तक 9,18,860 महिलाओं की मदद की है। यह हेल्पलाइन कॉमन नंबर और इमरजेंसी सपोर्ट सिस्टम से जुड़ी हुई है, जिससे तुरंत सहायता मिलती है।
मिशन वात्सल्य और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
मिशन वात्सल्य के तहत सभी 75 जिलों में 191 चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन चल रहे हैं, जहां 5,125 बच्चे संस्थागत देखभाल पा रहे हैं। कमजोर बच्चों को नॉन-इंस्टीट्यूशनल केयर भी दी जा रही है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना सभी जिलों में लागू है और स्वास्थ्य व परिवार कल्याण सिस्टम से अच्छी तरह जुड़ी हुई है।
महिलाओं के लिए हॉस्टल और अन्य सुविधाएं
राज्य को स्पेशल असिस्टेंस स्कीम के तहत 4,000 बेड वाले 8 वर्किंग वुमन हॉस्टल के लिए मंजूरी मिली है। केंद्र ने ₹381.56 करोड़ दिए, जिसमें से ₹251.83 करोड़ जारी हो चुके हैं। सामर्थ्य कंपोनेंट में 10 नए शक्ति सदन बन रहे हैं, जिनमें से कुछ को मंजूरी मिल गई है। आठ सखी निवास भी चल रहे हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पूरे राज्य में अच्छे से लागू है। सभी 75 जिलों में महिला एवं बाल विकास ऑफिस पूरी तरह काम कर रहे हैं।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कहा है कि यूपी का ढांचा और सेवाओं पर फोकस कमजोर वर्गों तक पहुंच बढ़ा रहा है, जिससे स्वास्थ्य और पोषण में सुधार हो रहा है।

