आगरा/खुशबू पांडेय। उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण अब केवल नारा नहीं रहा, बल्कि जमीनी हकीकत बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के 9 वर्ष पूरे होने पर आगरा में महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने प्रेस वार्ता में विभाग की प्रमुख उपलब्धियां साझा कीं।
उन्होंने बताया कि महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। महिला अपराधों में कमी आई है, यूपी-112 का रिस्पांस टाइम घटकर लगभग 6 मिनट रह गया है, 18 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं, मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और कई योजनाओं से लाखों महिलाओं व बेटियों को लाभ मिला है।
बेटी के जन्म से स्वावलंबन तक मजबूत व्यवस्था
योगी सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसे आत्मनिर्भर बनाने तक की पूरी व्यवस्था खड़ी की है। कन्या सुमंगला योजना के तहत अब तक 26.81 लाख बेटियों को लाभ पहुंचाया गया है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के जरिए 1 लाख 5 हजार से अधिक बेसहारा बच्चों को संरक्षण मिला है। मिशन वात्सल्य के अंतर्गत 1 लाख से अधिक बच्चों को उनके परिवारों से फिर से जोड़ा गया है। ये प्रयास दिखाते हैं कि सरकार बच्चों को भविष्य के मजबूत नागरिक के रूप में देख रही है।
मातृ स्वास्थ्य और पोषण में बड़ा सुधार
स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी योगी सरकार के प्रयासों से साफ बदलाव दिख रहा है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 60 लाख माताओं को लाभ मिला है। ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव पर 1400 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 1000 रुपये की सहायता दी जा रही है। प्रदेश में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 84 से अधिक हो गया है। 0 से 5 वर्ष के बच्चों में स्टंटिंग (ठिगनापन) की दर में 6.6 प्रतिशत और अंडरवेट बच्चों की दर में 7.5 प्रतिशत की कमी आई है। 2 करोड़ 12 लाख से अधिक बच्चों और महिलाओं को अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘संभव अभियान’ के तहत पोषण ट्रैकर जैसी तकनीक से कुपोषण के खिलाफ काम तेज किया गया है।
महिला सुरक्षा: अपराधों में कमी और तेज रिस्पांस
महिला सुरक्षा को लेकर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के नतीजे सामने आ रहे हैं। 2016 में यूपी-112 का रिस्पांस टाइम 1 घंटे 5 मिनट था, जो अब 2025 में घटकर मात्र 6 मिनट 41 सेकंड रह गया है। हर थाने में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। महिला अपराधों के आंकड़ों में गिरावट दर्ज की गई है, जिसमें बलात्कार की घटनाओं में 33.92 प्रतिशत, अपहरण में 17.03 प्रतिशत और घरेलू हिंसा में 9.54 प्रतिशत की कमी आई है।
यूपी पुलिस में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत पद आरक्षित हैं, जिससे 44,000 से अधिक महिलाएं पुलिस बल में शामिल हुई हैं। 3 नई महिला पीएसी बटालियन गठित की गई हैं और हर जिले में एंटी रोमियो स्क्वायड तैनात है।
आर्थिक आत्मनिर्भरता: लखपति दीदी और रोजगार के नए अवसर
असली सशक्तिकरण आर्थिक स्वतंत्रता से आता है। उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। लखपति दीदी योजना के तहत 18.55 लाख से अधिक महिलाएं सालाना 1 लाख रुपये से अधिक कमाने वाली बन चुकी हैं। 39,885 बीसी सखियों ने 42,711 करोड़ रुपये का लेनदेन किया और 116 करोड़ रुपये का लाभांश कमाया है। 15,409 विद्युत सखियों ने बिल कलेक्शन से कमीशन अर्जित किया है।
औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है। 2017 में महिला श्रम बल भागीदारी 13 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई है। महिलाएं अब नौकरी तलाशने के बजाय नए अवसर पैदा कर रही हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सम्मान और अपग्रेडेशन
प्रेस वार्ता में मंत्री बेबी रानी मौर्य ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं का मानदेय अप्रैल 2026 से बढ़ाया जाएगा। उन्हें जीवन ज्योति और सुरक्षा बीमा योजनाओं से जोड़ा गया है। 1.90 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-स्कूल के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 5.20 लाख बेटियों के विवाह संपन्न कराए गए हैं।
योगी सरकार की पारदर्शी नीतियों और ईमानदार क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश में महिलाओं की स्थिति बदली है। सुरक्षित नारी, सक्षम नारी और स्वावलंबी नारी ही नए उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव हैं।
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