लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने फैमिली आईडी योजना को तेजी से लागू करके केंद्र और राज्य की 98 जनकल्याणकारी योजनाओं को इससे जोड़ दिया है। इस व्यवस्था से 15.07 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को सीधा फायदा मिल रहा है, फर्जी लाभार्थियों पर रोक लग रही है और योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पारदर्शी ढंग से पहुंच रहा है। अब तक 44 लाख लोगों ने फैमिली आईडी के लिए आवेदन किया है और 19 लाख से अधिक कार्ड वितरित हो चुके हैं। यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर चल रही है, जिसका मकसद हर जरूरतमंद तक सरकारी मदद पहुंचाना है।
फैमिली आईडी क्या है और कैसे काम करती है?
फैमिली आईडी एक 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या है, जिसमें पूरे परिवार के सभी सदस्यों की जानकारी एक साथ दर्ज होती है। इसे “एक परिवार – एक पहचान” का नाम दिया गया है। इस कार्ड से परिवार के हर सदस्य को अलग-अलग प्रमाणपत्र बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। आय, जाति, निवास जैसे प्रमाणपत्रों की जानकारी फैमिली आईडी डेटाबेस से खुद ही मिल जाती है। इससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते और समय की बचत होती है।
98 योजनाएं जुड़ीं, 15 करोड़ से ज्यादा लोगों को फायदा
प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार के अनुसार, केंद्र सरकार की 13 और उत्तर प्रदेश सरकार की 85 योजनाएं फैमिली आईडी से जुड़ चुकी हैं। इन योजनाओं से प्रदेश के 15.07 करोड़ से अधिक लोग लाभ ले रहे हैं। इनमें राशन वितरण, पेंशन, छात्रवृत्ति जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में जाता है, जिसमें कोई बिचौलिया नहीं रहता।
आवेदन और कार्ड वितरण की ताजा स्थिति
फैमिली आईडी पोर्टल पर अब तक 44 लाख नागरिकों ने आवेदन किया है। ग्रामीण इलाकों में ग्राम पंचायत अधिकारी और शहरों में लेखपाल इसकी जांच करते हैं। अब तक 19 लाख से ज्यादा फैमिली आईडी कार्ड लोगों को दिए जा चुके हैं। यह कार्ड पूरी तरह मुफ्त है और सरकार खुद प्रति कार्ड करीब 8 रुपये का खर्च उठाती है। कार्ड DigiLocker पर भी उपलब्ध होता है, जिससे इसे कभी भी डाउनलोड किया जा सकता है।
राशन कार्ड से वंचित परिवारों को भी मौका
कई परिवार किसी कारण राशन कार्ड नहीं बना पाते थे, लेकिन अब फैमिली आईडी के जरिए वे भी सरकारी योजनाओं से जुड़ सकते हैं। इसके लिए विशेष पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र परिवार सरकारी मदद से बाहर न रहे।
आधार और मोबाइल लिंकिंग जरूरी
फैमिली आईडी बनवाने के लिए परिवार के हर सदस्य का आधार नंबर होना जरूरी है। साथ ही आधार मोबाइल नंबर से लिंक होना चाहिए, ताकि OTP से सत्यापन हो सके। अगर मोबाइल नंबर बदल गया है तो नया नंबर आधार से लिंक कराना पड़ता है। स्व-पंजीकरण के लिए आधार से लॉगिन करके ई-केवाईसी की जाती है और परिवार के सदस्यों का विवरण अपने आप आ जाता है।
पारदर्शिता और गड़बड़ी पर रोक
फैमिली आईडी से सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक ही परिवार के लिए दोहराव या फर्जी नाम से लाभ लेना मुश्किल हो गया है। सभी योजनाओं का डेटा एक जगह होने से पात्रता की जांच आसान हो गई है। पांच स्तर की तकनीकी प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसमें आधार प्रमाणीकरण और विभागीय डेटाबेस का एकीकरण शामिल है। डेटाबेस में 70 प्रतिशत जानकारी पूरी हो चुकी है, पता 100 प्रतिशत और मोबाइल नंबर 85 प्रतिशत दर्ज है।
गरीबों और जरूरतमंदों तक सीधी पहुंच
योगी सरकार का जोर इस बात पर है कि गरीब, मजदूर, किसान, महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांगजन को उनका हक समय पर मिले। फैमिली आईडी से योजनाओं का लाभ बिना देरी और बिना भेदभाव के पहुंच रहा है। इससे सामाजिक सुरक्षा मजबूत हुई है और अंतिम छोर तक खड़े व्यक्ति को भी सरकारी सुविधाएं मिल रही हैं।
आगे की योजना
सरकार लगातार नई योजनाओं को फैमिली आईडी से जोड़ने का काम कर रही है। भौतिक सत्यापन के बाद कार्ड वितरण तेज किया जा रहा है। लोगों से अपील है कि वे जल्दी से अपना पंजीकरण कराएं ताकि कोई योजना का लाभ न छूटे।
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