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Wednesday, January 21, 2026

योगी सरकार का ऐतिहासिक कदम: यूपी बनेगा AI इनोवेशन का बड़ा हब, 10 लाख युवाओं को मिलेगी एआई ट्रेनिंग

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश एआई इनोवेशन का हब बनेगा। योगी सरकार ने प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और फ्यूचर स्किल्स में अग्रणी राज्य बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। लखनऊ में आयोजित एआई लेड इनोवेशन एंड कैपेसिटी बिल्डिंग कॉन्फ्रेंस में दिग्गज टेक कंपनियों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। सम्मेलन में सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस और नासकॉम के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए, जिससे युवाओं को उभरती तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएगा। एआई प्रज्ञा पहल के तहत 10 लाख नागरिकों को एआई साक्षरता प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।

योगी सरकार का विजन: एआई(AI) से प्रदेश का तेज विकास

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग प्रदेश में एआई आधारित नवाचार, डिजिटल स्किल्स और रोजगार सृजन को प्राथमिकता दे रहा है। 20 जनवरी को लखनऊ में राज्य स्तरीय एआई लेड इनोवेशन एंड कैपेसिटी बिल्डिंग कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश को एआई इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करना, युवाओं और सरकारी अधिकारियों की डिजिटल क्षमता बढ़ाना तथा उद्योग, सरकार और शिक्षा संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग विकसित करना है।

प्रमुख सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अनुराग यादव ने बताया कि सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल स्किल्स, फ्यूचर स्किल्स, क्षमता निर्माण और रोजगार सृजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

दिग्गज कंपनियों ने साझा किए एआई समाधान और अनुभव

सम्मेलन में वैश्विक स्तर की प्रमुख टेक कंपनियों ने भाग लिया। माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, एचसीएल, गूगल, इंटेल और वाधवानी फाउंडेशन जैसी कंपनियों ने एआई आधारित समाधान, डिजिटल इकोसिस्टम और इंडस्ट्री-रेडी टैलेंट पर प्रेजेंटेशन दिए। इन कंपनियों ने एआई के व्यावहारिक उपयोग, स्किल डेवलपमेंट और भविष्य की तकनीकी जरूरतों पर केस स्टडी प्रस्तुत कीं।

इसके अलावा एनवीडिया, आईबीएम, रेड हैट, सिफी टेक्नोलॉजीज और 1M1B फाउंडेशन ने क्लाउड कंप्यूटिंग, ओपन-सोर्स टेक्नोलॉजी, डिजिटल लर्निंग और वैश्विक स्किल प्लेटफॉर्म पर अपने विचार रखे। विशेषज्ञों ने कहा कि एआई और उभरती तकनीकें उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सुशासन का मजबूत आधार बन रही हैं।

‘भाषिणी’ प्लेटफॉर्म पर विशेष फोकस

सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में भारत सरकार के ‘भाषिणी’ प्लेटफॉर्म पर विशेष प्रस्तुति दी गई। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से बहुभाषी डिजिटल सशक्तिकरण और नागरिक सेवाओं में भाषा प्रौद्योगिकी की भूमिका पर चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश जैसे विविधतापूर्ण राज्य के लिए यह पहल बहुत उपयोगी है, क्योंकि यहां तकनीक से आम नागरिक तक सेवाएं पहुंचाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है।

नासकॉम के साथ एमओयू: युवाओं के लिए बड़ा अवसर

सम्मेलन का एक प्रमुख हिस्सा सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस और नासकॉम के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर था। नासकॉम फ्यूचर स्किल्स प्राइम कार्यक्रम के तहत यह एमओयू प्रदेश के युवाओं को उभरती तकनीकों में प्रशिक्षित करने, उद्योग-उपयोगी कौशल विकसित करने और नए रोजगार अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

नासकॉम की सीईओ डॉ. अभिलाषा गौर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में टैलेंट और अवसर दोनों की अपार संभावनाएं हैं। एआई और डिजिटल स्किल डेवलपमेंट से प्रदेश तेजी से आगे बढ़ सकता है।

‘एआई प्रज्ञा’ पहल: 10 लाख लोगों को एआई साक्षर बनाना लक्ष्य

सम्मेलन के अंत में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग ने ‘एआई प्रज्ञा’ पहल की प्रस्तुति दी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश के 10 लाख नागरिकों को एआई साक्षरता प्रदान करना है। इससे उन्हें भविष्य के डिजिटल अवसरों के लिए तैयार किया जाएगा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाया जाएगा।

योगी सरकार का मानना है कि एआई जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके प्रदेश की विकास यात्रा को नई गति मिलेगी। युवा तकनीकी रूप से सक्षम बनें और प्रदेश के विकास में योगदान दें, यही मुख्यमंत्री का विजन है।

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