लखनऊ/खुशबू पांडेय। बरेली जिले के फतेहगंज पश्चिमी ब्लॉक के छोटे से गांव घंघोरा-घंघोरी की रहने वाली नसरीन बी ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं के सहारे एक सफल बेकरी व्यवसाय खड़ा किया है। पहले परिवार की जिम्मेदारियों से जूझती नसरीन आज ‘जनता’ स्वयं सहायता समूह की अगुवाई कर रही हैं, जिसमें 10 महिलाएं शामिल हैं। इस समूह से हर महीने करीब 1 लाख रुपये की कमाई हो रही है।
योगी सरकार की मदद से मिली वित्तीय सहायता और क्रीम रोल मशीन ने उनके कारोबार को नई ऊंचाई दी है। अब वे बेकरी उत्पादों के अलावा पापड़ और चिप्स भी बना रही हैं, जिससे गांव की महिलाओं को रोजगार मिला और वे आत्मनिर्भर बनीं। यह कहानी ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल है।
सशक्तिकरण की शुरुआत: स्वयं सहायता समूह से जुड़ना
नसरीन बी पहले अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर हमेशा चिंतित रहती थीं। गांव में सीमित संसाधनों के बीच जीवन चलाना मुश्किल था। फिर उन्हें ‘जनता’ स्वयं सहायता समूह के बारे में पता चला, जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत काम करता है।
इस मिशन का मकसद ग्रामीण महिलाओं को संगठित करना, बचत की आदत डालना और उन्हें वित्तीय सहायता देकर उद्यमिता की ओर ले जाना है। नसरीन ने इस समूह से जुड़कर छोटे-छोटे कदम उठाए। समूह में महिलाएं मिलकर बचत करतीं और छोटे-मोटे काम शुरू करतीं।
योगी सरकार की योजनाओं से मिली मजबूत मदद
2022 में समूह को पहली बार 15,000 रुपये की सहायता मिली। इसके कुछ समय बाद 1 लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय मदद भी प्रदान की गई। यह राशि NRLM और उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं के तहत दी गई, जिसका इस्तेमाल उन्होंने बेकरी व्यवसाय शुरू करने में किया।
नसरीन बताती हैं कि इस मदद ने उनका आत्मविश्वास बहुत बढ़ाया। उन्होंने क्रीम रोल बनाने की मशीन खरीदी, जिससे उत्पादन तेज हुआ और गुणवत्ता भी बेहतर हुई। सरकारी प्रशिक्षण के जरिए उन्होंने बेकरी उत्पाद बनाने की तकनीक सीखी। रस्क, फैन, क्रीम रोल जैसे आइटम बनाने शुरू किए, जो स्थानीय बाजार में अच्छी तरह बिकने लगे।
कारोबार में विस्तार: नए उत्पाद और रोजगार के अवसर
शुरुआत में सिर्फ बेकरी उत्पादों पर ध्यान था, लेकिन धीरे-धीरे समूह ने कारोबार बढ़ाया। क्रीम रोल मशीन से उत्पादन क्षमता बढ़ने के बाद उन्होंने बरेली शहर तक सप्लाई शुरू की। उचित मूल्य रखकर और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर उन्होंने ग्राहकों का भरोसा जीता।
आज समूह न सिर्फ बेकरी आइटम बनाता है, बल्कि पापड़, चिप्स और अन्य स्नैक्स भी तैयार करता है। इससे आय के स्रोत बढ़े हैं। समूह की 10 महिलाएं नियमित रूप से काम करती हैं और हर महीने कुल मिलाकर 1 लाख रुपये तक की कमाई हो रही है। यह कमाई न सिर्फ परिवारों की मदद करती है, बल्कि महिलाओं को सामाजिक सम्मान भी दिलाती है।
महिलाओं को मिला रोजगार और नई पहचान
नसरीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने अपनी सफलता को अकेले नहीं रखा। गांव की अन्य 10 महिलाओं को अपने साथ जोड़ा, उन्हें प्रशिक्षण दिया और रोजगार मुहैया कराया। ये महिलाएं अब आर्थिक रूप से मजबूत हैं और अपने परिवारों का सहारा बन रही हैं। समूह को प्रशासनिक सहयोग भी मिल रहा है, जिससे उत्पादों का प्रचार बढ़ा है। नियमित ऑर्डर आते हैं और बाजार में उनकी पहचान मजबूत हुई है। यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भूमिका को बदल रहा है।
प्रेरणा का स्रोत: छोटी शुरुआत से बड़ा बदलाव
नसरीन बी की कहानी साबित करती है कि अगर सही अवसर और सरकारी मदद मिले, तो कोई भी महिला अपनी परिस्थितियां बदल सकती है। NRLM जैसी योजनाएं हजारों महिलाओं को लाभार्थी से उद्यमी बनाने में मदद कर रही हैं। योगी सरकार की इन पहलों से ग्रामीण उत्तर प्रदेश में आत्मनिर्भरता का माहौल बन रहा है। नसरीन और उनका समूह पूरे गांव के लिए मिसाल बन चुके हैं, जो अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।
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