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Wednesday, February 25, 2026

उत्तराखंड में डिजिटल क्रांति: सीएम धामी ने राजस्व विभाग के 6 नए वेब पोर्टल किए लॉन्च, अब घर बैठे मिलेगी सत्यापित खतौनी

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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में राजस्व विभाग से जुड़े 6 महत्वपूर्ण वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। इन पोर्टलों में ई-भूलेख (अपडेटेड वर्जन), भू-नक्शा, भूलेख अंश, भू-अनुमति, एग्री लोन और ई-वसूली पोर्टल (ई-आरसीएस पोर्टल) शामिल हैं।

इस पहल से प्रदेश के नागरिक अब मोबाइल या इंटरनेट के जरिए घर बैठे ही सत्यापित खतौनी, भूमि मानचित्र और अन्य राजस्व सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, जिससे लोगों का समय बचेगा और दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।

मुख्यमंत्री धामी का डिजिटल गवर्नेंस पर जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में कहा कि राज्य सरकार सरलीकरण, समाधान और निस्तारण के संकल्प के साथ काम कर रही है। विज्ञान, आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से आमजन को अधिक से अधिक सुविधाएं दी जा रही हैं। इन 6 वेब पोर्टलों के शुरू होने से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को घर बैठे ही राजस्व संबंधी सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि यह पहल विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड के लक्ष्यों के अनुरूप है, साथ ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को भी बढ़ावा देगी।

खतौनी अब घर बैठे ऑनलाइन प्राप्त करें

ई-भूलेख पोर्टल के अपडेटेड वर्जन के जरिए खतौनी (भूमि रिकॉर्ड) की सत्यापित प्रमाणित प्रति अब तहसील कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नागरिक मोबाइल या कंप्यूटर से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, निर्धारित शुल्क का भुगतान पेमेंट गेटवे के माध्यम से कर सकते हैं और सत्यापित खतौनी प्राप्त कर सकते हैं। पहले लोगों को तहसील जाकर समय और संसाधन खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो गई है।

भूलेख अंश पोर्टल से किसानों को मिलेगा लाभ

भूलेख अंश पोर्टल के तहत प्रदेश के भू-अभिलेखों में संयुक्त खातेदारी और गोल खातों में दर्ज खातेदारों का अलग-अलग अंश निर्धारित किया जा रहा है। इससे किसानों की फार्मर रजिस्ट्री तैयार करने का रास्ता साफ होगा। इस प्रक्रिया में खातेदारों की जाति, लिंग और पहचान संख्या जैसी जानकारी भी संकलित की जा रही है, जिससे भविष्य में भू-अभिलेखों का एक समेकित डेटाबेस तैयार हो सकेगा।

भू-अनुमति और एग्री लोन पोर्टल से उद्योग व कृषि को बढ़ावा

भू-अनुमति पोर्टल के माध्यम से उद्योग और कृषि प्रयोजनों के लिए भूमि उपयोग या भूमि कार्य की अनुमति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है। खासकर हरिद्वार और उधम सिंह नगर जनपद में कृषि व बागवानी के लिए भूमि खरीद की अनुमति डिजिटल तरीके से मिलेगी। वहीं, एग्री लोन पोर्टल से किसान अपनी भूमि के आधार पर बैंक से कृषि ऋण लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। ऋण चुकता होने के बाद बैंक द्वारा एनओसी जारी करने पर चार्ज अपने आप हट जाएगा।

ई-वसूली और भू-नक्शा पोर्टल की सुविधाएं

ई-वसूली पोर्टल (ई-आरसीएस) से राजस्व वसूली की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो गई है। बैंक या संबंधित विभाग अब बकायेदारों से वसूली के प्रकरण ऑनलाइन कलेक्टर को भेज सकेंगे। पूरी प्रक्रिया के हर स्तर पर ट्रैकिंग संभव होगी। भू-नक्शा पोर्टल के तहत भूमि मानचित्र (कैडस्ट्रल मैप) को सार्वजनिक डोमेन में निःशुल्क देखने की सुविधा उपलब्ध है, जिससे नागरिक आसानी से अपनी जमीन का नक्शा देख सकेंगे।

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारी

इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव राजस्व एस.एन. पांडेय, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद रंजना राजगुरु, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव, स्टाफ ऑफिसर सोनिया पंत, एनआईसी के वरिष्ठ निदेशक मनीष वालिया, नरेंद्र सिंह नेगी, संयुक्त निदेशक चंदन भकुनी सहित राज्य के सभी जिला मुख्यालयों से जिलाधिकारी, मंडल आयुक्त और तहसील अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े रहे।

यह पहल उत्तराखंड में डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो आम लोगों की जिंदगी को आसान बनाएगी और प्रशासन को अधिक पारदर्शी व जवाबदेह बनाएगी।

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