नई दिल्ली: India AI Impact Summit 2026 में स्वदेशी AI मॉडल्स की एक सीरीज लॉन्च हो रही है, जिसमें बेंगलुरु की स्टार्टअप Sarvam AI का नया प्रोडक्ट Sarvam Edge सबसे ज्यादा चर्चा में है। कंपनी का दावा है कि यह ऑन-डिवाइस AI प्लेटफॉर्म स्मार्टफोन और लैपटॉप पर बिना इंटरनेट के चल सकता है, और भारतीय भाषाओं में कुछ खास टास्क जैसे स्पीच रिकग्निशन, ट्रांसलेशन और OCR में ग्लोबल मॉडल्स जैसे Google Gemini और ChatGPT से बेहतर परफॉर्म करता है। हालांकि, यह दावा मुख्य रूप से इंडियन लैंग्वेज और लोकल यूज-केस पर आधारित है, न कि हर तरह के जनरल AI टास्क पर। यह ऑफलाइन AI भारत जैसे देश के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है, जहां इंटरनेट हर जगह तेज नहीं होता।
Sarvam Edge क्या है और कैसे काम करता है
Sarvam Edge एक ऑन-डिवाइस AI प्लेटफॉर्म है, जिसे Sarvam AI ने हाल ही में लॉन्च किया है। इसका मतलब है कि AI की प्रोसेसिंग आपके फोन या लैपटॉप में ही होती है, क्लाउड सर्वर पर डेटा भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। कंपनी ने 14 फरवरी 2026 को इसे अनाउंस किया था, और India AI Impact Summit के दौरान इसकी ज्यादा डिटेल्स सामने आईं।
यह प्लेटफॉर्म स्पीच-टू-टेक्स्ट, टेक्स्ट ट्रांसलेशन, टेक्स्ट-टू-स्पीच जैसे बेसिक लेकिन जरूरी टास्क को सपोर्ट करता है। खास बात यह है कि यह 10 से ज्यादा भारतीय भाषाओं में वॉइस रिकग्निशन और टेक्स्ट-टू-स्पीच करता है, जबकि ट्रांसलेशन 11 भाषाओं तक कवर करता है। ऑफलाइन मोड में काम करने से प्राइवेसी भी बेहतर रहती है, क्योंकि यूजर का डेटा बाहर नहीं जाता।
भारत में जहां ग्रामीण इलाकों या कम कनेक्टिविटी वाले इलाकों में इंटरनेट की समस्या आम है, वहां Sarvam Edge जैसे टूल काफी प्रैक्टिकल हो सकते हैं। कंपनी का फोकस वॉइस-फर्स्ट ऐप्स, ऑफलाइन ट्रांसलेशन टूल्स और एक्सेसिबिलिटी फीचर्स पर है।
Sarvam Edge vs ChatGPT: अप्रोच में बड़ा फर्क
ChatGPT, जो OpenAI का क्लाउड-बेस्ड मॉडल है, इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भर रहता है। यह बहुत पावरफुल है – जटिल सवालों के जवाब दे सकता है, लंबी बातचीत कर सकता है और ढेर सारे टॉपिक्स पर गहराई से जानकारी देता है। लेकिन भारत में जहां इंटरनेट स्लो या अनुपलब्ध होता है, वहां इसका इस्तेमाल मुश्किल हो जाता है।
दूसरी तरफ Sarvam Edge छोटे, हल्के मॉडल्स पर काम करता है। इसका लक्ष्य हर तरह का जनरल AI नहीं बनना, बल्कि कुछ स्पेसिफिक टास्क को लोकल लेवल पर आसान बनाना है। ऑफलाइन काम करने से रिस्पॉन्स तेज होता है और बैटरी/डेटा पर कम असर पड़ता है। हालांकि, पुराने या कमजोर डिवाइस पर परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है। दोनों का यूज-केस अलग है – ChatGPT बड़े स्केल के लिए, Sarvam Edge लोकल और ऑफलाइन जरूरतों के लिए।
Google Gemini से तुलना: स्केल और फोकस अलग
Google Gemini भी क्लाउड पर चलता है और मल्टीमॉडल है – टेक्स्ट, इमेज, वीडियो सबको एक साथ हैंडल करता है। यह हाई-एंड यूजर्स, कंपनियों और कॉम्प्लेक्स टास्क के लिए बनाया गया है।
Sarvam Edge का स्केल छोटा है, लेकिन टारगेट ग्राउंड लेवल यूजर्स हैं – खासकर जो हिंदी, तमिल, बंगाली जैसी लोकल भाषाओं में काम करते हैं। इसलिए दोनों को डायरेक्ट कॉम्पिटिटर कहना ठीक नहीं। Sarvam Edge भारत की रियलिटी – भाषा विविधता और कनेक्टिविटी की कमी – को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
भारतीय भाषाओं में बेहतर परफॉर्मेंस का दावा
Sarvam AI की टीम का कहना है कि उनके मॉडल्स, खासकर Sarvam Vision (एक 3 बिलियन पैरामीटर विजन लैंग्वेज मॉडल), इंडियन लैंग्वेज टास्क में Gemini और ChatGPT से आगे हैं। जैसे OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन) में – स्कैन किए डॉक्यूमेंट्स पढ़ना, पुराने दस्तावेज समझना, हिंग्लिश या मिक्स्ड लैंग्वेज कंटेंट हैंडल करना।
बेंचमार्क में Sarvam Vision ने olmOCR-Bench पर 84.3% एक्यूरेसी हासिल की, जो Gemini 3 Pro और अन्य ग्लोबल मॉडल्स से बेहतर है। OmniDocBench पर 93.28% स्कोर किया। यह 22 भारतीय भाषाओं के डेटासेट पर ट्रेन किया गया है, जिसमें फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स, अखबार, ऐतिहासिक टेक्स्ट शामिल हैं।
लेकिन यह दावा लिमिटेड है – सिर्फ इंडियन लैंग्वेज और स्पेसिफिक टास्क पर। जनरल क्वेश्चन-आंसर, कोडिंग, कॉम्प्लेक्स रीजनिंग या ग्लोबल नॉलेज में ग्लोबल मॉडल्स अभी आगे हैं। Sarvam का स्ट्रॉन्ग पॉइंट लोकल यूज-केस है।
भारत के AI इकोसिस्टम में Sarvam की भूमिका
भारत सरकार की IndiaAI Mission लोकल AI को प्रमोट कर रही है। Sarvam AI जैसे स्टार्टअप इसी का हिस्सा हैं, जो भारत के यूज-केस – भाषा, एक्सेस, प्राइवेसी – पर फोकस करते हैं। Summit में Sarvam ने अपना फुल स्टैक सोवरेन AI प्लेटफॉर्म भी दिखाया, जिसमें फाउंडेशनल मॉडल्स, ऐप्लिकेशन्स और कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है।
फिलहाल Sarvam Edge शुरुआती स्टेज में है। रियल-लाइफ यूज में कितना स्टेबल और उपयोगी साबित होता है, यह समय बताएगा। लेकिन ऑफलाइन AI की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत को सोवरेन AI की ओर ले जा सकता है।
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