नई दिल्ली। आम बजट 2026-27 (Union Budget 2026) पेश होने में अब दो हफ्ते से भी कम समय बचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट में सरकार को व्यापार में आसानी बढ़ाने और महिलाओं के लिए सभी क्षेत्रों में ज्यादा अवसर पैदा करने पर खास फोकस करना चाहिए। इससे व्यापारियों को कारोबार चलाने में कम मुश्किलें आएंगी और महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में यह बजट पेश करेंगी, जो उनका लगातार नौवां बजट होगा।
पिछले बजट की बड़ी राहतें
पिछले बजट में सरकार ने आयकर में बड़ी छूट दी थी। नए टैक्स रिजीम में अब 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं लगता। इससे आम लोगों को काफी फायदा हुआ है। साथ ही, जीएसटी 2.0 के तहत टैक्स स्लैब की संख्या घटाकर सिर्फ दो कर दी गई है, जिससे टैक्स सिस्टम और सरल हुआ है।
व्यापार में आसानी पर विशेषज्ञों के सुझाव
टैक्स एक्सपर्ट मनमोहन श्रीवास्तव काजू ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इस बार के बजट में व्यापार में आसानी को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है। अभी जीएसटी पोर्टल पर कई समस्याएं हैं। व्यापारियों को डिजिटल नोटिस मिलते हैं, लेकिन कई लोग उन्हें समय पर चेक नहीं कर पाते। इससे जुर्माना भरना पड़ता है और ज्यादा टैक्स देना पड़ जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि पुराने तरीके से फिजिकल पत्राचार (भेजे गए चिट्ठी-पत्र) को फिर से शुरू किया जाए, ताकि व्यापारी आसानी से नोटिस देख सकें और जवाब दे सकें। इससे छोटे-मध्यम व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
महिलाओं के लिए ज्यादा अवसरों की मांग
एक्सपर्ट जेनाब ने कहा कि सरकार को बजट में महिलाओं के लिए सभी क्षेत्रों में अवसर बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। खासकर मेडिकल फील्ड में महिलाओं के लिए ज्यादा मौके पैदा किए जाएं। साथ ही, महिलाओं की सुरक्षा पर भी फोकस हो। ऐसी स्कीम्स लाई जाएं, जिनसे महिलाएं उच्च शिक्षा लेने के लिए प्रेरित हों। इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर बनेंगी।
निर्मला सीतारमण का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
यह बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवां बजट होगा। उन्होंने पहले ही सी.डी. देशमुख (7 बजट) का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अगर वे 2028 का बजट भी पेश करती हैं, तो वे दिवंगत मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड (कुल 10 बजट) की बराबरी कर लेंगी। मोरारजी देसाई ने दो अलग-अलग कार्यकालों में यह रिकॉर्ड बनाया था।
यह बजट देश की अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहम होगा, जहां व्यापार सुधार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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