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Wednesday, March 4, 2026

4जी तकनीक से लैस होगी रेलवे, बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार, नहीं रोक पायेगा कोहरा

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  • भारतीय रेलवे पांच साल में 4 जी संचार तकनीक से लैस हो जाएगी
  • वर्तमान में भारतीय रेलवे 2 जी संचार सिगनल प्रणाली पर काम करती है

नई दिल्ली, टीम डिजिटल: भारतीय रेलवे पांच साल में 4 जी संचार तकनीक से लैस हो जाएगी जिससे नयी पीढी के संचार एवं सिगनल प्रणाली हो पाएगी और गाड़ियों की औसत गति बढ़ने के साथ ही कोहरे के कारण ट्रेनों की रफ्तार ज़रा भी कम नहीं होगी।
रेलवे बोर्ड में सदस्य (इन्फ्रास्ट्रक्चर) संजीव मित्तल ने यहां एक संवाददाताओं से बातचीत में हाल में केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा रेलवे के लिए 700 मेगा हर्ट्ज़ फ्रीक्वेंसी बैंड में पांच मेगा हर्ट्ज़ का स्पैक्ट्रम आवंटित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान किये जाने के प्रभावों पर चर्चा करते हुए यह  जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारतीय रेलवे 2 जी संचार सिगनल प्रणाली पर काम करती है। लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन (एलटीई) 4 जी तकनीक मिलने से रेलवे की सिगनल एवं संचार प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव आयेगा। इसके लिए भारतीय रेलवे ने आगामी पांच साल में कुल 56,955 करोड़ रुपए के निवेश की योजना बनायी है।

पहले चरण में 37300 रूट किलोमीटर मार्ग में टीकैस
उन्होंने कहा कि सिगनल प्रणाली में करीब 25 हजार करोड़ रुपए खर्च किये जाएंगे। रेलवे के उच्च सघनता वाले 15 हजार किलोमीटर रूट किलोमीटर ट्रैक और उच्च मालवहन वाले मार्गों पर स्वचालित ब्लॉक सिगनलिंग प्रणाली लगायी जाएगी जिससे लाइन की क्षमता बढ़ जाएगी। इस प्रणाली में वर्तमान में 10 से 20 किलोमीटर के ब्लॉक की बजाए एक-एक किलोमीटर के ब्लॉक स्थापित किये जाएंगे। इससे गाड़ियों की औसत गति बढ़ेगी और अधिक गाड़ियों का परिचालन किया जा सकेगा। मित्तल ने कहा कि गाड़ियों में स्वचालित टक्कररोधी प्रणाली टीकैस लगाने से गाड़ियों के परिचालन में मानवीय त्रुटि से दुर्घटना की संभावना शून्य हो जाएगी तथा भविष्य में लोकोपायलट रहित गाड़ियों का परिचालन भी संभव हो सकेगा। पहले चरण में 37300 रूट किलोमीटर मार्ग में टीकैस प्रणाली लगायी जाएगी।

अब तक 2221 स्टेशनों पर इलैक्ट्रौनिक इंटरलॉकिंग
रेलवे बोर्ड में अपर सदस्य (दूरसंचार) अरुणा सिंह ने कहा कि इस प्रणाली के तहत लोकोपायलट को गाड़ी के इंजन में ही वास्तविक सिगनल से  पहले ही सिगनल प्राप्त होंगे जिससे उसे अंधेरे, सुरंग, पुल या कोहरे में  गाड़ी धीमी करने की जरूरत नहीं होगी। इस प्रणाली के लागू होने से गाड़ियों को ढाई सौ किलोमीटर की गतिसीमा तक चलाया जा सकेगा।
रेलवे बोर्ड में अपर सदस्य (सिगनल) राहुल अग्रवाल ने बताया कि इलैक्ट्रौनिक इंटरलॉकिंग को भी इस तकनीक से बढ़ाया जा  सकेगा। अभी तक 2221 स्टेशनों पर इलैक्ट्रौनिक इंटरलॉकिंग हो चुकी है। अगले  तीन साल में 1550 स्टेशनों पर यह प्रणाली लगायी जाएगी। उन्होंने बताया कि गाड़ियों में स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली लगायी जाएगी। उन्होंने कहा कि केन्द्रीयकृत यातायात नियंत्रण कमान तैयार की जाएगी जो 300 से 400 किलोमीटर के दायरे में गाड़ियों के परिचालन को नियंत्रित करेगी। वर्तमान में मंडल मुख्यालयों एवं कुछ अन्य स्टेशनों पर यातायात नियंत्रण कक्ष सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर के दायरे में परिचालन को नियंत्रित करते हैं। इससे परिचालन दक्षता बढ़ेगी।
मित्तल ने कहा कि 4 जी प्रणाली से रेल परिसरों, कोचों में सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड प्राप्त की जा सकेगी। इससे यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी।

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