Prerna Canteen: उत्तर प्रदेश में प्रेरणा कैंटीन योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का एक प्रभावी माध्यम बन गई है। स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाएं सरकारी कार्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य व्यस्त जगहों पर छोटी कैंटीन चलाकर सस्ता और साफ-सुथरा खाना उपलब्ध करा रही हैं।
इस पहल से अब तक 10,000 से अधिक महिलाओं की आय में सुधार हुआ है और वे महीने में औसतन 10,000 रुपये या उससे ज्यादा कमा रही हैं। आजीविका-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) जैसी संस्थाओं के सहयोग से यह योजना तेजी से फैल रही है।
प्रेरणा कैंटीन क्या होती है?
प्रेरणा कैंटीन महिलाओं द्वारा संचालित एक छोटी फूड व्यवस्था है, जिसमें चाय, नाश्ता और साधारण भोजन परोसा जाता है। इसमें आमतौर पर चाय, समोसा, पकोड़े, पोहा, उपमा, पराठा या घर जैसी थाली मिलती है। इसकी खासियत सस्ती कीमत, अच्छी सफाई और ताजा भोजन है, जिससे ग्राहक बार-बार आते हैं। यह योजना मुख्य रूप से स्वयं सहायता समूह की 2 से 5 महिलाओं के समूह द्वारा चलाई जाती है।
सरकार का उद्देश्य महिलाओं को स्थायी रोजगार देना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 2,100 से अधिक प्रेरणा कैंटीन चल रही हैं, जो जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय, सीएचसी, पीएचसी और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर उपलब्ध हैं। इन कैंटीनों से महिलाओं को नियमित आय के साथ-साथ आत्मविश्वास भी मिल रहा है।

प्रेरणा कैंटीन कैसे शुरू करें?
प्रेरणा कैंटीन शुरू करना अपेक्षाकृत आसान है। सबसे पहले महिलाएं अपने क्षेत्र के स्वयं सहायता समूह से जुड़ सकती हैं। समूह के जरिए सरकारी सहायता मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
सही जगह चुनना बहुत जरूरी है। ऑफिस, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस स्टैंड या औद्योगिक क्षेत्र के पास जगह हो तो अच्छा रहता है। इसके बाद FSSAI फूड सेफ्टी लाइसेंस और स्थानीय नगर निगम या ग्राम पंचायत से अनुमति लेनी पड़ती है।
ट्रेनिंग के लिए आजीविका मिशन या संबंधित विभाग से संपर्क किया जा सकता है। कई जगहों पर सरकार जगह उपलब्ध कराती है या कम ब्याज पर लोन देती है। शुरू में 2-5 महिलाएं मिलकर काम बांट सकती हैं – एक खाना बनाए, दूसरी बिक्री संभाले और तीसरी सफाई का ध्यान रखे।
प्रेरणा कैंटीन खोलने में कितना खर्च आता है?
यह योजना कम लागत वाली है। शुरुआत में गैस स्टोव, बर्तन, टेबल, कुर्सी और बुनियादी सामान पर 20,000 से 50,000 रुपये तक का निवेश पर्याप्त हो सकता है। अगर सरकारी मदद या SHG के माध्यम से सहायता मिले तो खर्च और कम हो जाता है।
कई जिलों में महिलाओं को प्रशिक्षण और प्रारंभिक सामग्री के लिए सहयोग दिया जाता है। इससे नए उद्यमी महिलाओं का जोखिम कम होता है।
प्रेरणा कैंटीन से कितनी कमाई हो सकती है?
कमाई मेहनत, खाने की गुणवत्ता और जगह पर निर्भर करती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन कैंटीनों से जुड़ी महिलाएं औसतन 10,000 रुपये प्रति माह या उससे अधिक कमा रही हैं। कुछ मामलों में अच्छी लोकेशन और नियमित ग्राहकों के साथ आय इससे भी बढ़ जाती है।

रोजाना 1,000 से 3,000 रुपये तक की बिक्री होने की संभावना रहती है, जो महीने में 30,000 रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि यह हर जगह एक समान नहीं होती। कई महिलाओं ने इस व्यवस्था से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारी है और नियमित आय सुनिश्चित की है।
सरकार की भूमिका और भविष्य की योजनाएं
उत्तर प्रदेश सरकार इस योजना को बढ़ावा दे रही है। आजीविका-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और UPSIDA मिलकर औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास भी प्रेरणा कैंटीन खोलने में मदद कर रहे हैं।
मुजफ्फरनगर, संत कबीर नगर, बाराबंकी और कानपुर जैसे जिलों में नई कैंटीन शुरू करने की तैयारी चल रही है। स्कूलों और थानों में भी कुछ जगहों पर ऐसी व्यवस्था की जा रही है। सरकार का फोकस महिलाओं को ट्रेनिंग, लाइसेंस और बाजार उपलब्ध कराने पर है।
महिलाओं के लिए फायदे
इस योजना से महिलाओं को घर से निकलकर काम करने का मौका मिलता है। वे परिवार की आय बढ़ा पाती हैं और समाज में सम्मान हासिल करती हैं। साथ ही, स्थानीय लोगों को सस्ता और पौष्टिक भोजन मिलता है।
यह मॉडल दिखाता है कि सही सहयोग और मेहनत से छोटे स्तर पर भी स्थायी व्यवसाय शुरू किया जा सकता है। इच्छुक महिलाएं अपने जिले के विकास खंड कार्यालय या NRLM कार्यालय से संपर्क करके अधिक जानकारी ले सकती हैं।
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