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Monday, March 9, 2026

ड्यूटी के साथ पढ़ाई, दिल्ली पुलिस ACP अपूर्वा वर्मा ने UPSC 2025 में 42वीं रैंक हासिल की, अब बनेंगी IAS

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UPSC Success Story: दिल्ली पुलिस में सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के पद पर तैनात अपूर्वा वर्मा ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 42वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की है। ड्यूटी की व्यस्त जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और टॉप-50 में जगह बनाई।

अपूर्वा ने विभाग के सहयोग, पति के समर्थन और परिवार की प्रेरणा से यह सफलता प्राप्त की है। वे बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के नरकटियागंज से हैं और पहले 2022 में यूपीएससी पास कर आईपीएस बनी थीं। अब वे आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करेंगी।

UPSC में 42वीं रैंक: अपूर्वा वर्मा की उपलब्धि

UPSC सिविल सेवा परीक्षा के हालिया परिणामों में अपूर्वा वर्मा का नाम 42वीं रैंक के साथ सामने आया है। यह परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है, जहां लाखों उम्मीदवार हिस्सा लेते हैं। अपूर्वा ने अपनी ड्यूटी निभाते हुए तैयारी की, जो उनकी लगन और अनुशासन को दर्शाता है।

दिल्ली पुलिस में ACP रहते हुए तैयारी

अपूर्वा वर्मा वर्तमान में दिल्ली पुलिस में ACP के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने ANI को दिए इंटरव्यू में बताया कि यह प्रयास उनके लिए बहुत खास था क्योंकि उन्होंने अपनी आधिकारिक ड्यूटी पूरी करते हुए यह सफलता हासिल की। विभाग ने उनका पूरा सहयोग किया और पढ़ाई के लिए छुट्टियां भी प्रदान कीं। अपूर्वा ने कहा, “यह वाकई बेहद खास अनुभव है।”

पति का समर्थन और परिवार की प्रेरणा

अपूर्वा के पति भी एक सिविल सेवक हैं, जिन्होंने उनकी इस यात्रा में काफी मदद की। उन्होंने परिवार की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि दादा और नाना दोनों प्रभावशाली व्यक्तित्व थे। घर में अकादमिक माहौल था, जहां पढ़ाई की इज्जत सिखाई गई। इसी प्रेरणा से उन्होंने UPSC में जाने का फैसला किया। भगवान के आशीर्वाद से आज यह मुकाम हासिल हुआ।

चंपारण से बोकारो तक का सफर

अपूर्वा वर्मा बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के नरकटियागंज (सुगौली गांव) से आती हैं। उनके दादा टीपी वर्मा कॉलेज में प्रिंसिपल थे। पिता एक सिविल इंजीनियर हैं, जो बोकारो स्टील प्लांट में कार्यरत रहे। अपूर्वा ने बचपन चंपारण में बिताया, लेकिन बाद में परिवार बोकारो शिफ्ट हो गया। वहां उन्होंने पढ़ाई पूरी की। अपूर्वा ने बताया कि चंपारण में आज भी शिक्षा के क्षेत्र में कई चुनौतियां हैं, जहां बच्चे पढ़ाई के लिए मुश्किलों का सामना करते हैं।

यह सफलता न केवल अपूर्वा की मेहनत का नतीजा है, बल्कि यह दिखाती है कि सरकारी सेवा और व्यक्तिगत लक्ष्यों को संतुलित किया जा सकता है। उनकी कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी, खासकर उन लोगों के लिए जो नौकरी के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

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