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पल्लवी पारे चौकसे का मिरर इमेज राइटिंग में कमाल, रामचरितमानस और गीता लिख इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2026 में शामिल

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की पल्लवी पारे चौकसे ने 25 वर्षों की निरंतर साधना से मिरर इमेज राइटिंग यानी दर्पण लेखन में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2026 में नाम दर्ज कराया है।

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मध्य प्रदेश/खुशबू पांडेय। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की पल्लवी पारे चौकसे ने 25 वर्षों की निरंतर साधना से मिरर इमेज राइटिंग यानी दर्पण लेखन में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2026 में नाम दर्ज कराया है। उन्होंने श्रीरामचरितमानस, श्रीमद्भगवद्गीता और बाइबिल जैसे प्रमुख ग्रंथों को रिवर्स राइटिंग में लिखा है। यह उपलब्धि उनकी मेहनत, परिवार के सहयोग और समर्पण का नतीजा है, जो मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के लिए गौरव की बात है।

मिरर इमेज राइटिंग क्या है और पल्लवी की उपलब्धि

मिरर इमेज राइटिंग या दर्पण लेखन एक खास कला है, जिसमें अक्षर उल्टे लिखे जाते हैं। जब इन्हें आईने में देखा जाता है तो सामान्य पढ़ने लायक हो जाते हैं। नर्मदापुरम की रहने वाली पल्लवी पारे चौकसे ने इस दुर्लभ कला में 25 साल तक लगातार अभ्यास किया। वर्ष 2000 से शुरू हुई इस यात्रा में उन्होंने कई महत्वपूर्ण ग्रंथों को रिवर्स राइटिंग में उतारा है। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2026 ने उनकी इस उपलब्धि को मान्यता दी है।

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पल्लवी पारे चौकसे का मिरर इमेज राइटिंग में कमाल, रामचरितमानस और गीता लिख इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2026 में शामिल
पल्लवी पारे चौकसे का मिरर इमेज राइटिंग में कमाल, रामचरितमानस और गीता लिख इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2026 में शामिल

पढ़ाई के दिनों में शुरू हुई दर्पण लेखन की शुरुआत

पल्लवी की यह यात्रा 2000 में स्कूल-कॉलेज के दिनों में शुरू हुई। वे अपने नोट्स कभी सीधे और कभी उल्टे अक्षरों में लिखा करती थीं। शुरू में यह सिर्फ एक मजेदार अभ्यास था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी विशेष पहचान बन गई। उनके पिता अरुण पारे ने इस प्रतिभा को सबसे पहले पहचाना और उन्हें पूरा प्रोत्साहन दिया। परिवार के आध्यात्मिक माहौल ने भी इस कला को आगे बढ़ाने में मदद की।

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महान ग्रंथों को रिवर्स राइटिंग में लिखा

पल्लवी ने पिछले 25 सालों में तुलसीदास जी रचित सम्पूर्ण श्रीरामचरितमानस, श्रीमद्भगवद्गीता, मधुशाला और बाइबिल (न्यू टेस्टामेंट) जैसे ग्रंथों को दर्पण लेखन में लिखा है। इन कार्यों में उन्हें सिर्फ हाथ की कुशलता नहीं, बल्कि गहरी एकाग्रता और मानसिक मजबूती की जरूरत पड़ी। उन्होंने इन ग्रंथों को श्रद्धा के साथ रिवर्स राइटिंग में अंकित किया है। यह काम आसान नहीं था, क्योंकि हर अक्षर को उल्टा लिखते हुए अर्थ और भावना को बनाए रखना पड़ता है।

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परिवार का सहयोग सफलता की मजबूत नींव

पल्लवी की सफलता में उनके पति महेंद्र चौकसे का बड़ा योगदान रहा है। शादी के बाद उन्होंने पल्लवी की इस अनोखी कला का पूरा सम्मान किया और हर कदम पर साथ दिया। घर की जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने यह ध्यान रखा कि पल्लवी की साधना बिना रुके जारी रहे। पल्लवी अपने दोनों बेटों शिवोहम चौकसे और शाम्भव चौकसे के साथ इस उपलब्धि का जश्न मना रही हैं। बच्चे अपनी मां की इस उपलब्धि पर बहुत गर्व महसूस कर रहे हैं।

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पल्लवी का संदेश और प्रेरणा

पल्लवी इस सफलता का पूरा श्रेय ईश्वर की कृपा को देती हैं। वे कहती हैं कि 25 साल की तपस्या का यह फल उनके लिए बहुत पवित्र है। उनकी कहानी दिखाती है कि धैर्य और निरंतर अभ्यास से कोई भी मुश्किल काम संभव हो सकता है। नर्मदापुरम जिले के लिए यह उपलब्धि प्रेरणा का स्रोत बन गई है। कई युवा अब इस अनोखी कला के बारे में जानने और सीखने में रुचि ले रहे हैं।

पल्लवी पारे चौकसे की यह उपलब्धि साबित करती है कि साधारण शुरुआत से भी असाधारण नतीजे निकल सकते हैं। उनकी मिरर इमेज राइटिंग की कला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।

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