लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में लगातार प्रयास जारी हैं। इसी क्रम में सुल्तानपुर जिले की रजनी बाला ने पारंपरिक मूंज शिल्प को बाजार से जोड़कर न केवल अपनी जिंदगी बदली है, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार का अवसर प्रदान किया है।
गांव हरखपुर की रहने वाली रजनी बाला ने मां से सीखे इस हुनर को आगे बढ़ाते हुए सिकहुला, भउका, दौरी, डोलची और कप जैसे उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भरता हासिल की है। सरकारी योजनाओं और जिला प्रशासन के सहयोग से उनका व्यवसाय अब कई जिलों तक पहुंच चुका है, जिसमें 50 प्रतिशत तक का लाभ मिल रहा है।
परंपरा से प्रगति तक: मूंज शिल्प ने बदली रजनी बाला की दुनिया
सुल्तानपुर के कुड़वार ब्लॉक के हरखपुर गांव में रहने वाली रजनी बाला ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। उन्हें मूंज शिल्प का ज्ञान अपनी मां से विरासत में मिला। बचपन से ही घर में मां द्वारा मूंज के उत्पाद बनाने का माहौल देखकर उन्होंने इस कला को सीखा।
आज वे इसी हुनर के दम पर विभिन्न प्रकार के उपयोगी और सजावटी उत्पाद बनाती हैं। उनके पति दिल्ली में एक निजी कंपनी में ड्राइवर हैं और परिवार को पूरा सहयोग देते हैं। उनके दो बच्चे हैं—बेटा लखनऊ में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी सुल्तानपुर में स्कूल जा रही है।
ग्रामीण कला को बाजार से जोड़कर बढ़ाया मुनाफा
रजनी बाला बताती हैं कि मूंज से बने उत्पादों की लागत और बिक्री मूल्य में अच्छा अंतर होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी उत्पाद की तैयारी में 100 रुपये की लागत आती है, तो बाजार में वह लगभग 150 रुपये में बिक जाता है, जिससे करीब 50 प्रतिशत शुद्ध लाभ मिलता है।
यह व्यवसाय उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बना रहा है। उनका सबसे बड़ा ऑर्डर राजस्थान से आया था, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने लगभग 100 महिलाओं को काम दिया। इस तरह वे न केवल खुद कमाती हैं, बल्कि आसपास की महिलाओं को भी आजीविका से जोड़ रही हैं।
सुल्तानपुर की बेटी ने हस्तशिल्प से गढ़ी अपनी पहचान
मूंज शिल्प उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में प्रचलित है, खासकर सुल्तानपुर में जहां यह घास प्राकृतिक रूप से उपलब्ध होती है। रजनी बाला ने इस पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुसार ढाला है। उनके उत्पाद अब नोएडा, लखनऊ और अन्य जिलों में स्टॉल के माध्यम से बिक रहे हैं। यह सफलता उनकी मेहनत और लगन का नतीजा है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन रही है।
कई जिलों तक पहुंची रजनी बाला की मेहनत की पहचान
रजनी बाला को जिला उद्योग कार्यालय से खास सहयोग मिल रहा है। जिला उपायुक्त सुश्री नेहा सिंह के मार्गदर्शन में उन्हें बड़े मंच पर उत्पाद दिखाने का मौका मिला। इसी वजह से उनका व्यवसाय स्थानीय स्तर से बाहर निकलकर अन्य जिलों में फैला है। सरकारी सहायता और व्यक्तिगत प्रयास से वे आज आत्मनिर्भरता की जीती-जागती मिसाल हैं।
सरकारी योजनाओं से मजबूत हो रही आत्मनिर्भरता की नींव
उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाएं, जैसे वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) और अन्य स्वरोजगार संबंधी कार्यक्रम, महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं। इन योजनाओं के तहत लाखों लोग लाभान्वित हो चुके हैं। सुल्तानपुर जैसे जिलों में भी इनका सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है।
सरकार का मकसद है कि अधिक से अधिक लोग इन योजनाओं से जुड़ें और प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें। विभाग स्तर पर मार्गदर्शन और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। रजनी बाला जैसी सफल कहानियां अन्य लोगों को प्रेरित कर रही हैं और पूरे राज्य में आत्मनिर्भरता की नई लहर पैदा कर रही हैं।
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