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क्या ईरान में महिलाएं तलाक ले सकती हैं? कानून क्या कहते हैं, जानिए पूरी सच्चाई

Iran Women Marriage Divorce Rights: ईरान में महिलाओं को तलाक लेने का अधिकार बहुत सीमित है, और कानून मुख्य रूप से पुरुषों के पक्ष में है। ईरान के इस्लामी कानून के अनुसार, पति बिना किसी विशेष कारण के तलाक दे सकता है, लेकिन महिला को तलाक के लिए अदालत में साबित करना पड़ता है कि शादी जारी रखना उसके लिए बेहद कठिन और हानिकारक है।

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Iran Women Marriage Divorce Rights: ईरान में महिलाओं को तलाक लेने का अधिकार बहुत सीमित है, और कानून मुख्य रूप से पुरुषों के पक्ष में है। ईरान के इस्लामी कानून के अनुसार, पति बिना किसी विशेष कारण के तलाक दे सकता है, लेकिन महिला को तलाक के लिए अदालत में साबित करना पड़ता है कि शादी जारी रखना उसके लिए बेहद कठिन और हानिकारक है।

यह प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है, जिसके कारण कई महिलाएं हिंसक रिश्तों में फंस जाती हैं। तलाक के बाद बच्चे की कस्टडी भी 7 साल की उम्र तक मां के पास रहती है, उसके बाद पिता को मिल जाती है। हाल के वर्षों में ईरान में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले बढ़े हैं, जिसमें कई हत्याएं तलाक की मांग से जुड़ी बताई जाती हैं। मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐसे मामलों में महिलाओं की सुरक्षा का खतरा रहता है।

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ईरान में तलाक के कानून: महिलाओं के अधिकार कितने सीमित हैं?

ईरान का पारिवारिक कानून शरिया पर आधारित है। सिविल कोड के अनुसार, पति को तलाक देने का एकतरफा अधिकार है (अनुच्छेद 1133)। वह कभी भी तलाक दे सकता है, बशर्ते मेहर (दहेज) और अन्य अधिकारों का भुगतान करे। वहीं, महिला को तलाक के लिए अदालत जाना पड़ता है और साबित करना होता है कि शादी में ‘एसआर व हरज’ यानी बेहद कठिन और हानिकारक स्थिति है, जैसे पति का नशा, हिंसा या परित्याग। यह प्रक्रिया सालों लग सकती है और अदालत अक्सर महिला के दावे को आसानी से स्वीकार नहीं करती। कई मामलों में महिलाएं मेहर छोड़कर या अन्य शर्तें मानकर तलाक लेती हैं, जिसे खुला तलाक कहते हैं।

बच्चे की कस्टडी: मां के लिए बड़ा झटका

तलाक होने पर मां को बच्चे की कस्टडी केवल 7 साल तक मिलती है (लड़के के लिए 2 साल और लड़की के लिए 7 साल तक कुछ रिपोर्ट्स में भिन्नता है, लेकिन सामान्यतः 7 साल)। उसके बाद बच्चा पिता या पुरुष रिश्तेदार के पास चला जाता है। अगर मां दूसरी शादी करती है, तो कस्टडी का अधिकार और भी कम हो जाता है। यह नियम महिलाओं को बच्चों के कारण हिंसक शादी में रहने के लिए मजबूर करता है।

तलाक की मांग पर हिंसा: कई दर्दनाक मामले

मानवाधिकार संगठनों जैसे ह्यूमन राइट्स वॉच, अमनेस्टी इंटरनेशनल और ईरान वायर की रिपोर्ट्स बताती हैं कि तलाक मांगने वाली महिलाओं पर हिंसा के मामले आम हैं। उदाहरण के तौर पर, मई 2025 में शाहरूद में 23 साल की यासमीन नोसराती का शव एक कार में मिला। गला घोंटने के निशान थे। परिवार के सदस्यों के अनुसार, उन्होंने तलाक मांगा था, तो पति ने कहा था, “या तो मेरे साथ रहोगी, या जिंदा नहीं रहोगी।” कुछ हफ्तों बाद उनकी हत्या कर दी गई। ऐसे कई मामले हैं जहां तलाक की कोशिश करने पर महिलाओं की हत्या हो जाती है, जिन्हें ऑनर किलिंग या फैमिली डिस्प्यूट कहा जाता है।

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2025 में हेंगाव और अन्य संगठनों की रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में महिलाओं की हत्याओं के सैकड़ों मामले दर्ज हुए, जिनमें से कई तलाक या अलग होने से जुड़े थे। 2024-2025 में 100 से ज्यादा महिलाओं की हत्या परिवार के पुरुष सदस्यों द्वारा रिपोर्ट की गई। ईरान में घरेलू हिंसा को अपराध नहीं माना जाता और मैरिटल रेप पर कोई कानून नहीं है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

महिलाओं की स्थिति पर असर और बदलाव की कोशिशें

ईरान में महिलाएं हिजाब जैसे नियमों के कारण भी दबाव में रहती हैं, लेकिन तलाक और शादी के कानून सबसे ज्यादा विवादास्पद हैं। हाल के वर्षों में तलाक की दर बढ़ी है (तेहरान में 50% से ज्यादा), जो महिलाओं की जागरूकता और आर्थिक बदलाव को दिखाता है। हालांकि, कानून अभी भी पुरुष-प्रधान है। अंतरराष्ट्रीय संगठन ईरान से महिलाओं के अधिकारों में सुधार की मांग करते हैं, लेकिन बदलाव धीमा है।

ईरान में महिलाओं के लिए तलाक लेना आसान नहीं है और यह अक्सर जानलेवा साबित हो सकता है। कानून महिलाओं को सुरक्षा देने के बजाय कई बार उन्हें फंसाए रखता है।

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