कोपेनहेगन, 24 मार्च। डेनमार्क में आज मंगलवार को अचानक बुलाए गए संसदीय चुनाव हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन (PM Mette Frederiksen) तीसरे कार्यकाल के लिए उम्मीदवार हैं। हालिया जनमत सर्वेक्षणों में उनके वामपंथी गठबंधन को दक्षिणपंथी गुट पर थोड़ी बढ़त दिख रही है, लेकिन 179 सीटों वाली संसद फोल्केटिंग में किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना कम है।
डेनमार्क संसदीय चुनाव 2026
डेनमार्क के मतदाता आज 24 मार्च 2026 को वोट डाल रहे हैं। प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने फरवरी में इन चुनावों की घोषणा की थी। वे 2019 से सत्ता में हैं और अब तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की कोशिश कर रही हैं। चुनाव अभियान में ग्रीनलैंड मुद्दा, महंगाई, आप्रवासन और कल्याणकारी योजनाएं मुख्य रहे।
ग्रीनलैंड विवाद ने बढ़ाई फ्रेडरिकसेन की लोकप्रियता
फ्रेडरिकसेन की काफी सराहना हुई जब उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को खरीदने या शामिल करने की मांगों को ठुकरा दिया। ग्रीनलैंड डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। इस मजबूत रुख से उनकी पार्टी सोशल डेमोक्रेट्स को जनमत सर्वेक्षणों में फायदा हुआ। हालांकि, चुनाव अभियान में इस मुद्दे पर ज्यादा चर्चा नहीं रही। मतदाताओं का ध्यान घरेलू मुद्दों पर अधिक रहा।
महंगाई और आप्रवासन जैसे मुद्दे चुनाव में प्रमुख
दूसरे कार्यकाल में बढ़ती महंगाई से फ्रेडरिकसेन की लोकप्रियता पर असर पड़ा था। पेंशन, संभावित संपत्ति कर और कल्याणकारी राज्य जैसे विषयों पर बहस हुई। फ्रेडरिकसेन रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन के मजबूत समर्थक के रूप में भी जानी जाती हैं।
इस महीने उन्होंने कुछ सख्त प्रस्ताव दिए। इनमें शरण प्रक्रिया पर आपातकालीन रोक और बिना कानूनी अधिकार वाले अपराधियों पर कड़ी निगरानी शामिल है। सरकार ने उन विदेशियों को देश से बाहर भेजने की योजना भी बनाई, जिन्हें गंभीर अपराधों के लिए कम से कम एक साल की जेल की सजा मिली हो।
चुनौतीकर्ता और दक्षिणपंथी दलों की स्थिति
दो मध्य-दक्षिणपंथी नेता फ्रेडरिकसेन को चुनौती दे रहे हैं। इनमें रक्षा मंत्री ट्रोल्स लुंड पॉलसेन और लिबरल अलायंस के 34 वर्षीय एलेक्स वैनोप्सलैघ शामिल हैं। आप्रवासन विरोधी डेनिश पीपल्स पार्टी पिछले 2022 के चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के बाद इस बार वापसी की उम्मीद कर रही है।
ताजा सर्वेक्षणों के मुताबिक वामपंथी गठबंधन को दक्षिणपंथी गुट पर करीब नौ सीटों की बढ़त है। लेकिन यूरो न्यूज जैसी रिपोर्टों में कहा गया है कि 179 सीटों में किसी भी ब्लॉक को बहुमत नहीं मिल सकता। इसमें ग्रीनलैंड और फैरो द्वीपों की सीटें भी शामिल हैं।
फ्रेडरिकसेन का बयान और आगे का रास्ता
फरवरी में संसद को संबोधित करते हुए फ्रेडरिकसेन ने कहा था कि मतदाता तय करेंगे कि अगले चार सालों में डेनमार्क किस दिशा में जाएगा। सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और यूरोपीय चुनौतियां प्रमुख रहेंगी।
चुनाव नतीजे शाम तक या बुधवार सुबह तक साफ हो सकते हैं। अगर फ्रेडरिकसेन की पार्टी सबसे बड़ी रहती है तो वे गठबंधन बनाकर सरकार चला सकती हैं। डेनमार्क की राजनीति में अक्सर गठबंधन सरकारें बनती हैं।
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