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Sunday, December 4, 2022

अफगानी अल्पसंख्यकों की नागरिकता पर प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र

नई दिल्ली/ नेशनल ब्यूरो : इंडियन विश्व फोरम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अफगान अल्पसंख्यक (सिख और हिंदू) शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिलने में आ रहीं बाधाओं को दूर करने की मांग की है। पत्र में भारत सरकार से अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदुओं और सिखों के साथ हीं अन्य देशों में रहने वाले अफगानी मूल के अल्पसंख्यकों को ई-वीजा के माध्यम से भारतीय नागरिकता प्रदान करते हुए अफगानिस्तान में गुरद्वारों और मंदिरों की देखभाल करने का आह्वान भी किया है। इसके साथ ही भारत सरकार से तालिबान की वजह से विस्थापित हुए अफगानी अल्पसंख्यकों को सेना और सुरक्षा बलों में भर्ती करते हुए दयनीय परिस्थितियों में दिल्ली में रहने को मजबूर अफगानी अल्पसंख्यकों की दुर्दशा को कम करने के लिए दिल्ली या उसके पास एक अफगान कॉलोनी स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है ताकि सम्मान के साथ जीने का अवसर इन्हें मिल सकें। फोरम के अध्यक्ष पुनीत सिंह चंडोक ने कहा कि भारतीय नागरिकता मांगने वाले अफगान शरणार्थियों के हजारों आवेदन संबंधित राज्यों और सक्षम अधिकारियों के पास लंबित हैं।

– तालिबान शासित अफगानिस्तान में धर्मस्थलों और मंदिरों के रखरखाव का किया अनुरोध
-इंडियन वल्र्ड फोरम ने राजधानी में एक अफगान कॉलोनी स्थापित करने का दिया प्रस्ताव
-अफगान सिखों और हिंदुओं को सेना और सुरक्षा बलों में भर्ती करने की अपील

सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण दस्तावेजों के प्रसंस्करण में देरी हो रही है। इसलिए केंद्र सरकार प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सिंगल विंडो सुविधा स्थापित कर सकती है। सरकार उन आवेदकों का जुर्माना माफ करने पर विचार कर सकती है, जिन्हें वैध भारतीय नागरिकता के बिना भारतीय पासपोर्ट जारी किए गए हैं।
चंडोक ने बताया कि जर्मनी, रूस, यूएई, यूके और अमेरिका में बड़ी संख्या में हिंदू और सिख समुदाय के अफगानी रह रहे हैं, जो कि तीर्थयात्रा और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए हर साल भारत आते हैं। लेकिन पिछले एक साल से वीजा जारी न होने के कारण उनकी यात्राएं प्रभावित हुई है। अफगानिस्तान में गुरुद्वारों और मंदिरों के रखरखाव और सुरक्षा के लिए सरकार बदलने के बाद वर्तमान सरकार में उनका प्रतिनिधित्व नहीं है। इसलिए संभव है कि वहां मौजूद असंतुष्ट तत्व अल्पसंख्यकों की निजी संपत्ति को हड़प सकते हैं। इसके लिए भारत में अफगान नेताओं की एक समिति बनाई जा सकती है और उन्हें अफगानिस्तान लौटने और उनकी संपत्ति की निगरानी करने की अनुमति दी जा सकती है। इसके अलावा बड़ी संख्या में अफगान शरणार्थी दिल्ली में गैर सरकारी संगठनों द्वारा प्रदान किए गए आवासों या किराए के आवासों में रह रहे हैं, उनमें से अधिकांश के पास अपने आवास के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। उनकी आजीविका के प्रबंध के साथ ही सरकार इन्हें भूमि उपलब्ध कराकर दिल्ली के निकट एक उपयुक्त स्थान पर अफगान कालोनी स्थापित करने पर विचार कर सकती है। चंडोक ने मोदी सरकार से अपील की है कि वह एक विशेष अभियान के तहत अफगान सिखों और हिंदुओं को सेना और सुरक्षा बलों में भर्ती करने पर विचार करे।

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