टोक्यो/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान की राजधानी टोक्यो में ‘यूपी इन्वेस्टमेंट रोड शो’ आयोजित किया, जहां उन्होंने जापानी उद्यमियों और निवेशकों को उत्तर प्रदेश में निवेश करने का न्योता दिया। सिंगापुर के बाद इस विदेशी दौरे के दूसरे चरण में सीएम योगी ने यूपी को निवेश के लिए सुरक्षित, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर वाला और युवा शक्ति से भरपूर राज्य बताया।
उन्होंने कहा कि पिछले नौ सालों में राज्य की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय लगभग तीन गुना बढ़ी है, और अब यूपी भारत की ग्रोथ इंजन बन चुका है। जापानी निवेशकों को विशेष रूप से नोएडा के पास प्रस्तावित जापान इंडस्ट्रियल सिटी में निवेश का मौका दिया गया, जहां 500 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है।
यूपी इन्वेस्टमेंट रोड शो: टोक्यो में सीएम योगी का संबोधन
टोक्यो में आयोजित इस रोड शो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी बिजनेस लीडर्स को संबोधित किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए भारत का सबसे आकर्षक राज्य बताते हुए कहा कि यहां स्केल, स्किल, स्टेबिलिटी और स्पीड चारों चीजें उपलब्ध हैं। यूपी की 25 करोड़ की आबादी देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है, जो निवेशकों के लिए बड़ी संभावनाएं पैदा करती है।

सांस्कृतिक जुड़ाव और स्पिरिचुअल टूरिज्म की बात
सीएम योगी ने जापान को ‘लैंड ऑफ द सनराइज’ कहकर सम्मान दिया और कहा कि यूपी सूर्यवंश के राजा भगवान राम की जन्मस्थली है। साथ ही भगवान बुद्ध की कर्मभूमि भी यही है, जहां कपिलवस्तु, सारनाथ, श्रावस्ती, कुशीनगर जैसे महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रामायण सर्किट और बौद्ध सर्किट को विकसित किया जा रहा है, जिससे स्पिरिचुअल टूरिज्म को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह सांस्कृतिक आत्मीयता भारत-जापान के रिश्तों को और मजबूत करेगी।
उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति और बदलाव
मुख्यमंत्री ने बताया कि जो राज्य कभी बीमारू कहा जाता था, अब भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन चुका है। पिछले नौ वर्षों में अर्थव्यवस्था तीन गुना बढ़ी है। देश की सिर्फ 11 प्रतिशत कृषि भूमि होने के बावजूद यूपी 21 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन करता है, जिससे फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और एग्री लॉजिस्टिक्स में निवेश के अच्छे अवसर हैं। राज्य में मीठे जल संसाधन भरपूर हैं, जो ग्रीन हाइड्रोजन जैसे नए क्षेत्रों में इस्तेमाल हो सकते हैं।

युवा शक्ति और इंफ्रास्ट्रक्चर का जोर
यूपी की 56 प्रतिशत आबादी युवा है, जो उद्योगों को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराती है। इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी आई है – एक्सप्रेसवे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क, ईस्टर्न-वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन यूपी में है। एक्सप्रेसवे के किनारे 27 औद्योगिक क्लस्टर विकसित हो रहे हैं। सीएम ने जापानी निवेशकों को इन परियोजनाओं में भागीदारी का न्योता दिया।
जापान इंडस्ट्रियल सिटी और एयर कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से यीडा क्षेत्र में प्रस्तावित जापान इंडस्ट्रियल सिटी की जानकारी दी। यहां 500 एकड़ भूमि चिन्हित है, ताकि जापानी उद्योग क्लस्टर के रूप में निवेश कर सकें। बेहतर कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और निर्यात सुविधाएं मिलेंगी। राज्य में 16 एयरपोर्ट संचालित हैं, जिनमें 4 अंतरराष्ट्रीय हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जल्द शुरू होगा, जो इस इंडस्ट्रियल सिटी के लिए फायदेमंद होगा।

निवेश के प्रमुख क्षेत्र और उपलब्धियां
उत्तर प्रदेश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का 55 प्रतिशत और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का 60 प्रतिशत उत्पादन होता है। डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, रिन्यूएबल एनर्जी में अच्छी संभावनाएं हैं। हाल में नोएडा में सेमीकंडक्टर यूनिट की आधारशिला रखी गई। प्रदेश के पास 75,000 एकड़ लैंड बैंक है, और झांसी के पास बुंदेलखंड में 56,000 एकड़ में नया औद्योगिक शहर बन रहा है।
2023 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 40 लाख करोड़ के प्रस्ताव मिले, जिनमें से 15 लाख करोड़ की परियोजनाएं जमीन पर उतर चुकी हैं और 7 लाख करोड़ प्रक्रिया में हैं। राज्य में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं, जो तीन करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देती हैं। नई इकाइयों को 1,000 दिनों तक कई एनओसी से छूट मिलती है।
निवेश करने में आसानी और अन्य सेक्टर
34 से ज्यादा सेक्टोरल पॉलिसी लागू हैं। निवेश मित्र और निवेश सारथी जैसी सिंगल विंडो व्यवस्था से प्रक्रिया आसान हुई है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में यूपी आगे है। बेहतर कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता के कारण निवेश सुरक्षित है। पिछले साल 156 करोड़ पर्यटक आए, जिससे होटल, रेस्टोरेंट, हेरिटेज और स्पिरिचुअल टूरिज्म में मौके बढ़े। इलेक्ट्रिक व्हीकल, डीप टेक, फिनटेक, मेडटेक और सर्विस सेक्टर में भी निवेश की गुंजाइश है।
सीएम योगी ने जापानी उद्यमियों से यूपी आने, निवेश करने और आध्यात्मिक स्थलों का अनुभव लेने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे भारत-जापान का औद्योगिक सहयोग और मजबूत होगा।
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