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Sunday, June 16, 2024

बंगाल चुनाव के बाद 25 लोगों की हुई हत्या, 7000 महिलाओं पर अत्याचार हुआ

-फैक्ट फाइंडिंग कमिटी ने गृह मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट, चौकाने वाले खुलासे
-बीजेपी ने रिपोर्ट के आधार पर ममता सरकार पर बोला हमला
-पोस्ट पोल वायलेंस, सुनियोजित रणनीति के तहत हुआ : बीजेपी
– अपराधियों और षड्यंत्रकारियों ने राजनीतिक दल के साथ मिल कर हिंसा को अंजाम दिया

नई दिल्ली/ खुशबू पाण्डेय : भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने आज यहां पोस्ट वायलेंस पर गृह मंत्रालय की ओर से बनाई गई फैक्ट फाइंडिंग कमिटी की रिपोर्ट के खुलासे पर पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार जमकर हमला बोला। साथ ही कहा कि इस कमिटी की जो रिपोर्ट सामने आ रही है, इसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कमिटी की रिपोर्ट से यह सामने आया है कि पोस्ट पोल वायलेंस, सुनियोजित रणनीति के तहत हुआ है।

बंगाल चुनाव के बाद 25 लोगों की हुई हत्या, 7000 महिलाओं पर अत्याचार हुआ

अपराधियों और षड्यंत्रकारियों ने राजनीतिक दल के साथ मिल कर बंगाल में चुनाव बाद हिंसा को अंजाम दिया है। जो लोग तृणमूल कांग्रेस विरोधी थे, उन्हें मारा गया। महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं हुई, कई घरों को नेस्तोनाबूद किया गया। इसके अलावा पीडि़तों को पुलिस स्टेशन जाने से रोका गया और उन लोगों पर जुर्माने लगाए गए जो भारतीय जनता पार्टी की ओर से काम कर रहे थे। फैक्ट फाइंडिंग कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि पूरी हिंसा के दौरान बंगाल पुलिस पूरी तरह से मूकदर्शक बनी रही। इससे ज्यादा शर्मनाक कोई बात नहीं हो सकती।

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बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि जो लोग तृणमूल कांग्रेस को छोड़ कर अन्य राजनीतिक पार्टियों के लिए काम कर रहे थे, उनके आधार कार्ड और राशन कार्ड तक छीन लिए गए। ख़ास तौर में एससी, एसटी, महिलाओं और कमजोर लोगों को टारगेट किया गया। चुनाव के बाद 25 लोगों की हत्या हुई हैं। 15000 हिंसा की घटनाएं हुई और 7000 महिलाओं के ऊपर अत्याचार हुआ है। बता दें कि गृह मंत्रालय की ओर से पोस्ट वायलेंस पर बनाई गई फैक्ट फाइंडिंग कमिटी में सिक्किम हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके जस्टिस प्रमोद कोहली, केरल के पूर्व चीफ सेक्रेटरी आनंद बोस, कर्नाटक के पूर्व अतिरिक्त सचिव मदन गोपाल, आईसीएसआई के पूर्व अध्यक्ष निसार चंद अहमद और झारखंड की पूर्व डीजीपी निर्मल कौर शामिल हैं। कमिटी ने गृह मंत्रालय को आज मंगलवार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। इसको लेकर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि कमिटी की तरफ से जो रिपोर्ट दी गई को गृहमंत्रालय के द्वारा जांच करेंगे और इस मामले में जो भी कदम उठाने होंगे, हम उठाएंगे।

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बीजेपी अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा पर बोलते हुए कहा कि टीएमसी ने विधान सभा चुनाव में विजय मनाने से पहले ही विध्वंस की राजनीति शुरू की। जिस तरह से पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार के संरक्षण में राजनीतिक हिंसा की गई, वह हम सबको मालूम है। चुनाव तो केरल, तमिल नाडु, असम, पुदुच्चेरी और असम में भी हुए थे, लेकिन कहीं भी हिंसा नहीं हुई। वहां हिंसा इसलिए नहीं हुई क्योंकि वहां तृणमूल कांग्रेस नहीं थी। बंगाल विधान सभा चुनाव के बाद हुई हिंसा में 1,399 प्रॉपर्टीज को डिस्ट्रॉय किया गया, 1298 कार्यकर्ताओं पर एफआईआर की गई, 676 लूट की घटनायें हुई और कम से कम 108 परिवारों को धमकाया गया।

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नड्डा ने कहा कि बंगाल में पोस्ट पोल वायलेंस में कमीशन ने 2,067 शिकायत दर्ज की है, मानव अधिकार कमेटी में 254, अनुसूचित जाति आयोग में 1769, एसटी कमीशन में 25, महिला आयोग में 19 और जनरल पुलिस कम्प्लेंट के रूप में 5,650 केस दर्ज हुए हैं। आरामबाग और बिष्णुपुर के भाजपा कार्यालयों को जला दिया गया। ममता बनर्जी के रूप में एक महिला मुख्यमंत्री के रहते पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक महिलाओं के खिलाफ अत्याचार किया गया। हमें इस तथ्य को जनता के सामने उजागर करना चाहिए। एक महिला मुख्यमंत्री की सरकार में ही यदि महिलायें सुरक्षित नहीं हैं तो यह किस प्रकार की राजनीति है?
बीजेपी अध्यक्ष नड्डा ने पूछा कि कहां चले गए देश के सारे विरोधी दल? दुर्भाग्य से कोई घटना यदि भाजपा शासित राज्य में हो जाती तो आनन-फानन में तूफान खड़ा कर दिया जाता, सारे दल एक सुर में भाजपा के खिलाफ बोलने लग जाते। लेकिन जब बंगाल में दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और महिलाओं के साथ हिंसा होती है और उन्हें टारगेट किया जाता है तो इन मावनाधिकार कार्यकर्ता के गले की जान समाप्त हो जाती है, आवाज ही नहीं निकलती। ऐसे तथाकथित मानव अधिकार कार्यकर्ताओं को भी बेनकाब करना जरूरी है।

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