नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री को अयोध्या के श्रीराम मंदिर की एक खूबसूरत प्रतिकृति भेंट की। यह प्रतिकृति वाराणसी की पारंपरिक गुलाबी मीनाकारी कला से बनी है, जो चांदी पर की गई है। यह भेंट काशी की पुरानी हस्तकला को बढ़ावा देने और वोकल फॉर लोकल की भावना को मजबूत करने का प्रतीक है।
मुलाकात में दोनों नेताओं ने उत्तर प्रदेश के विकास कार्यों पर भी चर्चा की। यह घटना वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी को राष्ट्रीय स्तर पर और ज्यादा पहचान दिलाने वाली है, जो पहले से ही जीआई टैग और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना का हिस्सा है।
गुलाबी मीनाकारी से बनी राम मंदिर की प्रतिकृति की खासियत
यह राम मंदिर की प्रतिकृति वाराणसी के प्रसिद्ध शिल्पकार कुंज बिहारी द्वारा बनाई गई है। गुलाबी मीनाकारी वाराणसी की सदियों पुरानी कला है, जिसमें चांदी या सोने पर खास रंगों से डिजाइन बनाए जाते हैं। इस कला में गुलाबी रंग का मुख्य इस्तेमाल होता है, इसलिए इसे गुलाबी मीनाकारी कहते हैं। प्रतिकृति में राम मंदिर की बारीक नक्काशी की गई है, जो अयोध्या के भव्य मंदिर की झलक दिखाती है। इस तरह की कलाकृतियां बनाने में बहुत मेहनत और धैर्य लगता है। शिल्पकार कुंज बिहारी पहले भी राम मंदिर की इसी कला से प्रतिकृतियां बना चुके हैं, जिनमें सोना, चांदी और हीरे का इस्तेमाल हुआ है। हालांकि इस बार की भेंट में चांदी पर गुलाबी मीनाकारी का मुख्य उपयोग बताया गया है।

जीआई टैग और ओडीओपी से मिला नया जीवन
वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी को साल 2015 में जीआई टैग मिला था, जो इसकी असली पहचान की गारंटी है। इसके बाद योगी सरकार ने इसे एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल किया। इससे कारीगरों को ट्रेनिंग, नए डिजाइन बनाने की सुविधा और बाजार मिला। सरकारी प्रदर्शनियों और प्रोटोकॉल गिफ्ट के जरिए इस कला को नई ऊंचाई मिली। अब यह सिर्फ स्थानीय शिल्प नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की ब्रांड बन चुकी है। जीआई टैग से विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ी है। कारीगरों को संस्थागत मदद मिलने से कई परिवारों की आजीविका मजबूत हुई है।
वोकल फॉर लोकल को मिला बढ़ावा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुलाबी मीनाकारी को सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा बनाया है। पहले भी प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी मेहमानों को इस कला की चीजें भेंट की हैं, जैसे अमेरिकी उपराष्ट्रपति को शतरंज सेट। इसी तरह योगी आदित्यनाथ ने कई गणमान्य लोगों को गुलाबी मीनाकारी की कलाकृतियां दी हैं। इससे देश-विदेश में इस शिल्प की मांग बढ़ी है। कई महिलाओं को इस कला की ट्रेनिंग दी गई, जिससे महिला सशक्तिकरण को भी बल मिला। वोकल फॉर लोकल की मुहिम से स्थानीय कारीगरों को नया बाजार और सम्मान मिल रहा है।
गुलाबी मीनाकारी की सदियों पुरानी परंपरा
गुलाबी मीनाकारी की शुरुआत 16वीं सदी में हुई थी और यह धीरे-धीरे वाराणसी की पहचान बन गई। इस कला में रंग मेटल ऑक्साइड से बनाए जाते हैं और काम सिर्फ शुद्ध चांदी या सोने पर होता है। प्रक्रिया बहुत जटिल है, जिसमें 800 डिग्री तापमान पर कलाकृति को पकाया जाता है। सदियों से कारीगर परिवार यह कला संभालते आ रहे हैं। आज भी यह परंपरा जीवित है और आधुनिक डिजाइन के साथ आगे बढ़ रही है। योगी सरकार और केंद्र की योजनाओं से यह शिल्प नई पीढ़ी तक पहुंच रहा है।
यह भेंट न केवल शिष्टाचार का हिस्सा है, बल्कि भारतीय हस्तकला और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने का संदेश भी देती है। गुलाबी मीनाकारी जैसे शिल्पों का प्रचार आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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