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Monday, June 17, 2024

विश्व की कल्याण यात्रा से लौटे निरंकारी प्रमुख माता सुदीक्षा, दर्शन को उमडे भक्त

नई दिल्ली /अदिति सिंह: संत निरंकारी मिशन (Sant Nirankari mission) के प्रमुख सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता की मानवता के लिए की गई विश्व कल्याणकारी प्रचार यात्राओं के उपरांत उनके आगमन पर यहां भव्य स्वागत किया गया। राजधानी के निरंकारी सरोवर के सामने ग्राउंड नं .2, बुराड़ी में विशाल सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें दिल्ली—एनसीआर के अलावा आसपास के क्षेत्रों से काफी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तगण सम्मिलित हुए।
इस मौके पर सतगुरु माता ने सत्संग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में हम जिस अवस्था में रह रहे हैं यदि हमारा जुड़ाव इस निरंकार प्रभु परमात्मा से है तब हम सहज रूप में अपनी भक्ति को निभा सकते हैं। यह तभी सार्थक है जब हमारा मन सत्संग हेतु पूर्णतः परिपक्व हो। ब्रह्मज्ञान की दिव्य रोशनी हर प्रकार के कष्टों से मुक्त कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। फिर भक्त की अवस्था कुछ इस प्रकार की बन जाती है कि हमारा जितना अधिक जुड़ाव इस निरंकार से होता है हमारी प्रेम भावना उससे ओर अधिक गहरी होती चली जाती है।

परमात्मा से जुड़ाव होगा तभी सहज रूप में भक्ति को निभा सकते हैं : माता सुदीक्षा
—सार्थक भक्ति के लिए निरंकार से पूर्णतः जुड़ाव की आवश्यकता

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज (Satguru Mata Sudiksha Maharaj) से पूर्व निरंकारी राजपिता ने अपने पावन प्रवचनों में उदाहरण सहित समझाया कि जिस प्रकार हमें फोन पर बात करने हेतु बैलेंस की आवश्यकता हेाती है तभी हम किसी से बात कर सकते हैं ठीक उसी प्रकार सार्थक भक्ति हेतु निरंकार से पूर्णतः जुड़ाव की आवश्यकता है। केवल तन से नहीं अपितु मन से जब हम इस परमात्मा से जुड़ते है तभी हमारा वास्तविक रूप में पार उतारा संभव है।
सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने ब्रह्मज्ञान के पावन संदेश को जन मानस तक पहुंचाने हेतु लगभग 80 दिनों की दूर देशों के विभिन्न स्थानों की प्रचार यात्राएं की। मानवता के परमार्थ हेतु की गई इन कल्याणकारी यात्राओं का प्रथम पड़ाव स्पेन शहर था जिसमें जुलाई माह में बार्सेलोना का निरंकारी यूरोपियन समागम भव्य रूप में आयोजित हुआ। उसके उपरांत यह यात्रा साउथ अफ्रीका की धरा पर पहुंची जिसमें दिव्य युगल का प्रथम बार आगमन हुआ। अगस्त माह में अमेरिका के ट्रेसी शहर में मुक्ति पर्व समागम का आयोजन किया गया। अमेरिका के विभिन्न शहरों से होते हुए इस दिव्य यात्रा का अंतिम पड़ाव कनाडा के टोरोंटो शहर में निरंकारी युथ सिम्पोजियम के रूप में हुआ। इस सिम्पोजियम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को सही मार्गदर्शन प्रदान करते हुए उन्हें आध्यात्मिकता से जोड़ना है जिसकी वर्तमान समय में नितांत आवश्यकता भी है।

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