spot_img
22.1 C
New Delhi
Wednesday, October 20, 2021
spot_img

गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप गायब होने का विरोध दिल्ली में शुरू

–जागो का ऐलान, 2 सितम्बर को बादल के आवास पर होगा प्रदर्शन
–पूछा, क्या कोई अपने गुरु को दस्ती किसी को दे सकता है ?
–अकाली अध्यक्ष सुखबीर बादल की जमीर जगाने की होगी अरदास

नई दिल्ली /टीम डिजिटल : शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सैकड़ों स्वरूपों की दस्ती एंट्री दिखाकर गायब करने के मामले का विरोध अब दिल्ली में भी शुरू हो गया है। इसको लेकर जागो पार्टी ने आज बड़ा ऐलान किया है। साथ ही कहा कि 2 सितम्बर को शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की चुप्पी के खिलाफ उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
जागो के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके के नेतृत्व में संगत जपुजी साहिब का पाठ करने के बाद सुखबीर सिंह बादल की जमीर जगाने तथा गायब या नष्ट हुए स्वरूपों के लिए पश्चाताप की अरदास करेंगी। प्रदर्शन की शुरुआत थाना तुगलक रोड के नजदीक लोक कल्याण मार्ग मेट्रो स्टेशन से होगा।
जीके ने दावा किया कि उक्त स्वरूप 2013 से 2015 के बीच फर्जी एंट्री दिखाकर गायब किए गए है। अगर किसी आम आदमी ने एक स्वरूप घर लेकर जाना हो तो बहुत औपचारिकता पूरी करनी पड़ती है। स्वरूप के प्रकाश करने के स्थान से लेकर ले जाने वाले लोगों की पहचान तथा गुरु प्रति प्रेम को भी जांचा जाता है। पर शिरोमणी कमेटी यह नहीं बता पा रही कि यह स्वरूप कौन ले गया, किस कार, ट्रक या ट्रैक्टर पर गए ? जीके ने दावा किया कि सुखबीर बादल के कहने पर शिरोमणी कमेटी ने यह स्वरूप उन डेरों को दिए हैं, जो सिख रहत मर्यादा को नहीं मानते हैं। सियासी फायदे के लिए स्वरूपों को दस्ती या उधारी खाते में गया हुआ बताया जा रहा है। जीके ने सवाल किया कि क्या कोई अपने गुरु को दस्ती किसी को दे सकता है ? जीके ने कहा कि सुखबीर बादल की पत्नी हरसिमरत कौर बादल को 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव बठिंड़ा से जीताने के लिए उक्त स्वरूपों को डेरों के वोट बैंक को प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया गया हो, इस आशंका को भी खारिज नहीं किया जा सकता है।

अनजान डेरों के पीछे छिपने की कोशिश कर रहें है सुखबीर बादल

2007 में डेरा सिरसा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम के द्वारा गुरु गोबिंद सिंह का स्वांग रचाने के बाद से सुखबीर बादल और डेरे की रासलीला जगजाहिर है। उन्होंने कहा कि 2015 में बुर्ज जवाहर सिंहवाला से स्वरूप चोरी होने के बाद पन्ना-पन्ना करने के बाद बरगाड़ी की गलियों-नालियों में डेरे के प्रेमियों के द्वारा बिखेरा जाता है। जो संगत इसके विरोध में रोष प्रदर्शन कर रही होती सुखबीर बादल की पुलिस उन पर गोली चलाती है और 2 सिख शहीद हो जाते है। लेकिन, सुखबीर तब भी गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों का नाम ना बताकर उसे अनजान पुलिस बताते है। उसी तर्ज पर अब स्वरूप कौन से डेरे ले गए वो भी अनजान हैं। शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष अनजान पुलिस के बाद अब अनजान डेरों के पीछे छिपने की कोशिश कर रहें है।

अकाल तख्त साहिब की वैबसाइट पर प्रकाशित करने की सलाह

जीके ने इस मामले में श्री अकाल तख्त साहिब की जाँच कमेटी की 1000 पृष्ठ की संपूर्ण रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग करते हुए रिपोर्ट को अकाल तख्त साहिब की वैबसाइट पर प्रकाशित करने की सलाह दी। जीके ने इस रिपोर्ट के आधार पर शिरोमणी कमेटी द्वारा अपने कुछ कर्मचारीयों के खिलाफ की गई कार्रवाई को ढकोसला तथा असली दोषियों को बचाने की कोशिश बताया। जीके ने सिख कौम की सभी संस्थाओं को लापता स्वरूपों के लिए अखंड पाठ/सहज पाठ तथा पश्चाताप की अरदास करने की अपील करते हुए अपने नजदीकी थानों में दोषियों के खिलाफ धारा 302 तथा 295ए की शिकायत दर्ज करवाने की भी सलाह दी।

Related Articles

epaper

Latest Articles