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दिल्ली से अलवर तक नई नमो भारत रैपिड रेल, गुरुग्राम-रेवाड़ी होते हुए 164 km का सफर, जानिए 22 स्टेशनों का पूरा रूट

दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल (नमो भारत) के सफल संचालन के बाद अब एनसीआर में एक और बड़ी कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट पर काम तेज हो रहा है। दिल्ली से गुरुग्राम, रेवाड़ी और SNB (शाहजहांपुर-नीमराना-बेहरोड़) होते हुए राजस्थान के अलवर तक जाने वाली दिल्ली-अलवर RRTS कॉरिडोर की योजना तैयार है।

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नई दिल्ली: दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल (नमो भारत) के सफल संचालन के बाद अब एनसीआर में एक और बड़ी कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट पर काम तेज हो रहा है। दिल्ली से गुरुग्राम, रेवाड़ी और SNB (शाहजहांपुर-नीमराना-बेहरोड़) होते हुए राजस्थान के अलवर तक जाने वाली दिल्ली-अलवर RRTS कॉरिडोर की योजना तैयार है। यह सेमी-हाई स्पीड रेल लाइन करीब 164 किलोमीटर लंबी होगी और ट्रेनें अधिकतम 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेंगी।

नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्टेशन कॉरपोरेशन (NCRTC) इस प्रोजेक्ट को चला रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 35-37 हजार करोड़ रुपये है। प्रोजेक्ट को तीन-चार चरणों में पूरा किया जाएगा और कुल 22 स्टेशन बनेंगे। निर्माण कार्य 2026 में शुरू होने की संभावना है और पूरा होने पर दिल्ली से अलवर का सफर काफी आसान और तेज हो जाएगा। इससे NCR के औद्योगिक इलाकों में रोजाना लाखों यात्रियों की आवाजाही बढ़ेगी और रियल एस्टेट सेक्टर को भी फायदा होगा।

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दिल्ली-अलवर RRTS कॉरिडोर की मुख्य विशेषताएं

यह कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खान से शुरू होकर गुरुग्राम, मानेसर, रेवाड़ी, बावल और SNB क्षेत्र से गुजरते हुए अलवर तक जाएगा। रूट काफी हद तक नेशनल हाईवे 48 (NH-48) के समानांतर चलेगा। ट्रेनें 160 किमी/घंटा की स्पीड से चलेंगी, जिससे दिल्ली से अलवर का सफर करीब 2 घंटे में पूरा हो सकेगा। इसमें एलिवेटेड, अंडरग्राउंड और ग्राउंड लेवल के स्टेशन होंगे। धारूहेड़ा और अलवर में डिपो बनेंगे। नमो भारत ट्रेनों में इकोनॉमी और बिजनेस क्लास कोच होंगे, साथ ही आधुनिक सुविधाएं जैसे एसी, आरामदायक सीटें और चार्जिंग पॉइंट्स मिलेंगे।

प्रोजेक्ट के चरण और स्टेशन

प्रोजेक्ट को कई चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में दिल्ली से धारूहेड़ा या बावल तक का हिस्सा (करीब 70-100 किमी) पर फोकस रहेगा, जिसमें 13-16 स्टेशन बनेंगे। दूसरे और तीसरे चरण में SNB से सोतानाला और फिर अलवर तक एक्सटेंशन होगा।

कुल मिलाकर 22 स्टेशन होंगे, जिनमें प्रमुख नाम हैं – सराय काले खान, आईएनए, मुनिरका, एरोसिटी, साइबर सिटी, इफ्को चौक, राजीव चौक, हीरो होंडा चौक, खेरकी दौला, मानेसर, पंचगांव, बिलासपुर चौक, धारूहेड़ा, रेवाड़ी, बावल, SNB, खैरथल और अलवर। दिल्ली से गुरुग्राम तक NH-48 के किनारे स्टेशन बनेंगे, जो मौजूदा ट्रैफिक को कम करने में मदद करेंगे।

प्रोजेक्ट की स्थिति और समयसीमा

दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान सरकारों ने 2018-2019 में ही प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। DPR को अपडेट किया गया है और केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है या अंतिम चरण में है। NCRTC ने कंसल्टेंट और अन्य टेंडर जारी किए हैं। निर्माण अगस्त 2026 से शुरू हो सकता है और पूरा प्रोजेक्ट 2031 तक चालू होने का लक्ष्य है। कुछ हिस्से 2028-2029 तक शुरू हो सकते हैं। फंडिंग में विश्व बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी जैसी संस्थाओं की मदद ली जा सकती है।

एनसीआर में कनेक्टिविटी और फायदे

यह रूट दिल्ली एयरपोर्ट को भी नमो भारत नेटवर्क से जोड़ेगा। गुरुग्राम, मानेसर, रेवाड़ी, बावल और अलवर जैसे औद्योगिक इलाकों में काम करने वाले लोगों के लिए रोजाना सफर आसान हो जाएगा। अनुमान है कि 2030 तक रोजाना 8.5 लाख यात्री इससे यात्रा करेंगे। इससे ट्रैफिक कम होगा, प्रदूषण घटेगा और रियल एस्टेट में निवेश बढ़ेगा। दिल्ली-मेरठ की तरह यहां भी हाई-स्पीड और आरामदायक यात्रा मिलेगी।

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