27.1 C
New Delhi
Tuesday, February 17, 2026

Surya Grahan 2026: आज इतने बजे से लगेगा पहला सूर्य ग्रहण, जानें सूतक काल की टाइमिंग और प्रभाव

Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now

Surya Grahan 2026: साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज 17 फरवरी को लग रहा है। यह एक वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ के नाम से जाना जाता है। भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगा, इसका अधिकतम चरण शाम करीब 5 बजकर 40 मिनट के आसपास रहेगा और शाम 7 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा। कुल अवधि लगभग 4 घंटे 32 मिनट की है।

हालांकि, यह ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा, क्योंकि इसका पाथ मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध में है, खासकर अंटार्कटिका और आसपास के इलाकों में। भारत में सूर्य ग्रहण के समय सूरज क्षितिज के नीचे होगा, इसलिए यहां से कोई दृश्य नहीं दिखेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है, लेकिन चूंकि भारत में दिखाई नहीं दे रहा, सूतक काल यहां लागू नहीं होगा।

सूर्य ग्रहण 2026 कब और कितने बजे लगेगा? (Surya Grahan 2026 Timing in India)

भारतीय स्टैंडर्ड टाइम (IST) के हिसाब से सूर्य ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:26 बजे होगी। मध्य या अधिकतम चरण शाम 5:40 बजे के आसपास आएगा, जहां चंद्रमा सूर्य के करीब 96% हिस्से को ढक लेगा। ग्रहण का अंत शाम 7:57 बजे होगा। यह जानकारी NASA और अन्य खगोलीय स्रोतों से ली गई है। ग्रहण की कुल लंबाई 4 घंटे 32 मिनट है, लेकिन ‘रिंग ऑफ फायर’ का खास नजारा सिर्फ 2 मिनट 20 सेकंड तक रहेगा।

रिंग ऑफ फायर क्या है? (Ring of Fire Solar Eclipse 2026)

वलयाकार सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता, क्योंकि उस वक्त चंद्रमा पृथ्वी से थोड़ा दूर होता है। नतीजा ये होता है कि सूर्य का बीच का हिस्सा काला हो जाता है, लेकिन बाहरी किनारा चमकदार रिंग की तरह दिखता है – जैसे आसमान में आग की अंगूठी लग गई हो। यही वजह है कि इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहते हैं। इस बार यह नजारा अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में सबसे अच्छे से दिखेगा। भारत से यह बिल्कुल नहीं दिखेगा, लेकिन लोग NASA के लाइव स्ट्रीम से इसे देख सकते हैं।

भारत में सूतक काल लगेगा या नहीं? (Surya Grahan 2026 Sutak Kaal Timing)

हिंदू शास्त्रों के मुताबिक, सूर्य ग्रहण का सूतक काल तब लागू होता है जब ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि यह ग्रहण भारत में कहीं भी विजिबल नहीं है, इसलिए यहां सूतक काल नहीं माना जाएगा। मतलब मंदिरों के पट नहीं बंद होंगे, सामान्य खाना-पीना चलेगा और कोई खास नियम पालन करने की जरूरत नहीं। गर्भवती महिलाओं या बुजुर्गों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता नहीं है। जहां ग्रहण दिखेगा, वहां स्थानीय समय के अनुसार लोग अपनी आस्था के मुताबिक सावधानियां बरत सकते हैं।

ग्रहण कहां-कहां दिखेगा? (Solar Eclipse 2026 Visibility)

यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका में ‘रिंग ऑफ फायर’ के रूप में दिखेगा। आंशिक ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे, जाम्बिया, तंजानिया, मॉरिशस, अर्जेंटीना, चिली जैसे देशों के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका के अलावा अटलांटिक, पैसिफिक और इंडियन ओशन के कुछ इलाकों में भी आंशिक प्रभाव रहेगा। भारत, एशिया के ज्यादातर हिस्से और उत्तरी गोलार्ध से यह बिल्कुल नहीं दिखेगा। दुनिया की सिर्फ 2% आबादी ही इसे व्यक्तिगत रूप से देख पाएगी।

सूर्य ग्रहण क्या होता है? (What is Surya Grahan?)

सूर्य ग्रहण तब लगता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य की रोशनी को रोक देता है। वलयाकार ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह कवर नहीं कर पाता, इसलिए रिंग जैसा इफेक्ट बनता है। यह पूरी तरह प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जिसे विज्ञान अच्छे से समझता है।

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें? (Surya Grahan Dos and Don’ts)

भारत में ग्रहण न दिखने की वजह से कोई खास सावधानी जरूरी नहीं। जहां दिखेगा, वहां लोग अपनी मान्यताओं के अनुसार मंत्र जाप, ध्यान या पूजा कर सकते हैं। ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान और दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण के समय भोजन न करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि वातावरण में बदलाव से भोजन प्रभावित हो सकता है – हालांकि वैज्ञानिक रूप से इसका कोई प्रमाण नहीं। यह पूरी तरह आस्था का विषय है।

ज्योतिषीय दृष्टि से प्रभाव? (Surya Grahan 2026 Astrological Effects)

ज्योतिष में सूर्य को आत्मा और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इस ग्रहण में सूर्य और राहु कुंभ राशि में हैं, जो कुछ लोगों में मानसिक उलझन या फैसले लेने में भ्रम पैदा कर सकता है। कुंभ राशि वालों को बड़े फैसले ग्रहण के बाद एक महीने तक सोच-समझकर लेने की सलाह दी जा सकती है। वैश्विक स्तर पर संचार, मीडिया या तकनीक से जुड़ी छोटी-मोटी दिक्कतें ज्योतिषी अनुमान लगा रहे हैं, लेकिन ये सिर्फ अनुमान हैं, कोई पक्का दावा नहीं। मंगल का अस्त होना तनाव कम करने का संकेत माना जा रहा है।

यह ग्रहण एक खूबसूरत खगोलीय घटना है, जिसे लोग ऑनलाइन देख सकते हैं। अगला सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को टोटल होगा, जो कुछ जगहों पर दिखेगा।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Women Express पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related News

Delhi epaper

Prayagraj epaper

Kurukshetra epaper

Latest News